Kailash Mansarovar Yatra : देखिए कैसा है देवो के देव महादेव का घर

Kailash Mansarovar Yatra: मेरे दोस्त राजेश की बिलासपुर से शुरू हुई वो अनमोल कहानी, जो दिल को छू लेगी

नमस्ते दोस्तों! मैं हूं अमित, खूबसूरत भारत ब्लॉग का वो साधारण सा लड़का जो घूमने-फिरने और जिंदगी की छोटी-छोटी खुशियों में ही मग्न रहता हूं। अगर आप भी ऐसे ही हैं जो कभी-कभी सोचते हैं कि जिंदगी में कुछ बड़ा, कुछ ऐसा कर लूं जो रूह को सुकून दे, तो आज की ये पोस्ट आपके लिए ही है। आज मैं आपको नहीं, बल्कि अपने सबसे करीबी दोस्त राजेश की वो यात्रा सुना रहा हूं – कैलाश मानसरोवर यात्रा की। हां, वही पवित्र Kailash Mansarovar Yatra, जो हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्मों के लिए स्वर्ग समान है।

राजेश बिलासपुर, छत्तीसगढ़ का रहने वाला है, वो साधारण सा इंजीनियर जो दिन भर फैक्ट्री में काम करते है, लेकिन दिल में भगवान शिव का इतना भक्त है कि सालों से इस यात्रा का सपना देखता रहा। राजेश तो अब 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन बारे में भी सोंच रहा हैं.

दोस्तों, ये कहानी सुनकर आप हंसेंगे भी, रोएंगे भी, और शायद कल ही सोचने लगें कि ‘यार, मुझे भी जाना चाहिए’। राजेश ने मुझे अपनी पूरी डायरी पढ़कर सुनाई थी, वो रात भर बैठे-बैठे चाय पीते हुए। मैंने सोचा, क्यों न इसे शेयर करूं यहां पर, ताकि आप सब भी इस spiritual journey to Mount Kailash की मिठास महसूस करें। चलिए, शुरू से शुरू करते हैं। लेकिन पहले ये बताता हूं कि अगर आप भी Kailash Mansarovar Yatra 2026 के लिए प्लान कर रहे हैं, तो आधिकारिक वेबसाइट पर चेक कर लें – वहां रजिस्ट्रेशन की डिटेल्स हैं, और ड्रॉ ऑफ लॉट्स मई में होता है।

राजेश का फैसला: बिलासपुर की गलियों से Kailash Mansarovar तक का सपना

यार, राजेश को देखो तो लगता है जैसे वो हमेशा से ही ऐसे ही था – मोटा-ताजा, हंसमुख, लेकिन अंदर से थोड़ा उदास सा। तीन साल पहले, जब उसके पापा की तबीयत खराब हुई थी, तो डॉक्टरों ने कहा था कि कुछ महीने ही हैं। राजेश ने रात-रात भर शिवजी की पूजा की, व्रत रखे, और मन ही मन प्रार्थना की कि अगर सब ठीक हो जाए, तो वो Kailash Mansarovar pilgrimage पर जाएगा। चमत्कार हुआ, पापा आज भी हंसते-मुस्कुराते हैं। बस, वादा निभाने का टाइम आ गया।

बिलासपुर में रहते हुए, राजेश ने सबसे पहले लोकल एजेंट्स से बात की। Bilaspur जैसे छोटे शहर में तो सब कुछ मुश्किल लगता है, लेकिन इंटरनेट ने कमाल कर दिया। वो रोज रात को मोबाइल पर Trip to Temples जैसी साइट्स चेक करता, जहां से पैकेजेस मिलते हैं। Kailash Mansarovar Yatra cost from Bilaspur Chhattisgarh? दोस्त, शुरू में डर लगता था – करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक, लेकिन राजेश ने सोचा, ‘बस, एक बार की तो बात है।’ वो ट्रेन से दिल्ली पहुंचा, फिर फ्लाइट से काठमांडू। कुल मिलाकर, बिलासपुर से Kathmandu तक का सफर ही 2 दिन का था।

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मुझे याद है, जब वो घर से निकला, तो मां ने आंसू पोछते हुए कहा, “बेटा, सावधान रहना।” राजेश ने हंसकर कहा, “मां, शिवजी तो साथ हैं न!” और बस, निकल पड़ा। अगर आप भी बिलासपुर या छत्तीसगढ़ के आसपास से हैं, तो Ritual Holidays जैसी लोकल टूर पैकेजेस चेक कर सकते हैं – वो स्पेशली बिलासपुर से शुरू होने वाले Kailash Mansarovar tour packages from Bilaspur ऑफर करते हैं।

Kailash Mansarovar जाने की तैयारी: वो तीन महीने जो जिंदगी बदल गए

दोस्तों, Kailash Mansarovar Yatra preparation tips पर राजेश ने कितना जोर दिया! वो कहता था, “अमित भाई, ये कोई पिकनिक थोड़े है। ये तो 5000 मीटर की ऊंचाई पर चलना है, जहां ऑक्सीजन कम है, सिर चकरा जाता है।” तो उसने तीन महीने पहले से ही शुरू कर दिया। रोज सुबह 5 किलोमीटर वॉक, फिर स्टेयरक्लाइंबिंग – बिलासपुर की पुरानी कोठी के 200 सीढ़ियां चढ़ना। हाहा, सोचो तो, पड़ोसी लोग पूछते, “राजेश, क्या हो गया? जिम जॉइन कर लिया?” वो हंसता, “हां यार, शिवजी का जिम!”

फिजिकल फिटनेस के अलावा, मेंटल तैयारी भी जरूरी। राजेश ने किताबें पढ़ीं – मिलारेपा की कहानियां, शिव पुराण। और पैकिंग? ओहो, वो तो अलग ही कॉमेडी थी। थर्मल्स, वॉटरप्रूफ जैकेट, सनस्क्रीन, दवाईयां – AMS (Acute Mountain Sickness) के लिए Diamox। राजेश ने एक लिस्ट बनाई: “दोस्त, एक भी चीज भूल गया तो मुसीबत।” अगर आप नौसिखिया हैं, तो Himalayan Glacier पर जाकर देख लो, वहां complete packing list है।

और हां, मेडिकल चेकअप – ये अनिवार्य है। राजेश ने बिलासपुर के ही डॉक्टर से फिटनेस सर्टिफिकेट लिया। वो कहता, “भाई, 22 की उम्र में मैंने सोचा था, अब तो थक गया हूं, लेकिन ये यात्रा ने मुझे नया जोश दिया।” Best time to visit Kailash Mansarovar? मई से जून या सितंबर-अक्टूबर, जब मौसम सुहावना होता है। राजेश ने जून 2024 का बैच चुना, क्योंकि तब Saga Dawa festival होता है – वो खास धार्मिक उत्सव जहां सब कुछ जादुई लगता है। Tibet Travel पर डिटेल्स चेक कर लो, वरना गलती हो जाएगी।

Kailash Mansarovar Yatra की शुरुआत: बिलासपुर से काठमांडू, वो पहला एहसास

ट्रेन से दिल्ली पहुंचा राजेश, वो भी AC थर्ड क्लास में – बजट तो बनाना पड़ता है न! फिर इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से नेपाल एयरलाइंस की फ्लाइट। विंडो सीट मिली, तो नीचे हिमालय की चोटियां दिखीं। “यार अमित, लग रहा था जैसे स्वर्ग उतर आया,” वो मुझे फोन पर चिल्लाया। काठमांडू पहुंचते ही ग्रुप मिला – 20 लोग, सबकी उम्र 30 से 60 के बीच। एक बूढ़े अंकल थे जो कहते, “बेटा, ये मेरी आखिरी यात्रा है।” राजेश ने उनका हाथ थामा और कहा, “अंकल, शिवजी सब संभाल लेंगे।”

पहला दिन काठमांडू में ही रुके। पशुपतिनाथ मंदिर घूमा, जहां शिवलिंग देखकर राजेश की आंखें भर आईं। रात को होटल में सबने अपनी स्टोरीज शेयर कीं। एक लड़की थी मुंबई से, जो कह रही थी, “मैंने जॉब छोड़ दी इस यात्रा के लिए।” राजेश हंसा, “देखो बहन, मैं तो फैक्ट्री से छुट्टी ली है, सोमवार को वापस जाना है!” वो माहौल, दोस्तों – जैसे परिवार हो गया हो। अगर आप भी ग्रुप टूर ले रहे हैं, तो Kailash Yatra से बुक करो, वो guaranteed departures देते हैं।

अगला दिन: चीन वीजा और Tibet permit। ये थोड़ा टेंशन वाला था, लेकिन सब स्मूथ हो गया। फिर बस से कोदारी बॉर्डर, जहां से तिब्बत एंट्री। रास्ते में पहाड़ियां, नदियां – राजेश ने फोटो खींचे ढेर सारे। “अमित, ये तो बस ट्रेलर है, असली फिल्म तो आगे है,” उसने मैसेज किया।

मानसरोवर झील: वो पहली नजर, जो रूह हिला दे

दो दिन की ड्राइव के बाद, पहुंचे पुरंग (ताकलाकोट)। वहां से मानसरोवर झील की तरफ। दोस्तों, राजेश की डायरी में लिखा है: “जब पहली बार Lake Mansarovar दिखी, तो मैं ठिठक गया। नीला पानी, चारों तरफ बर्फीली चोटियां, और बीच में वो शांति… जैसे समय रुक गया हो।” हिंदू मान्यता है कि यहां स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं। राजेश ने डुबकी लगाई – ठंडा पानी, लेकिन मन गर्म। वो कहता, “यार, लग रहा था मां गंगा ही बह रही हो।”

Kailash Mansarovar Yatra

अगले दिन, झील की परिक्रमा – 90 किलोमीटर की ड्राइव। ग्रुप में याक्स पर सामान लादा, और चल पड़े। रास्ते में चिर्कुट गुफा रुके, जहां बौद्ध भिक्षु ध्यान करते हैं। राजेश ने एक घंटा वहां बिताया, आंखें बंद करके। “अमित भाई, वहां बैठे तो लगा जैसे सारी दुनिया की टेंशन गायब,” वो बोला। अगर spiritual significance of Lake Mansarovar जानना है, तो Great Tibet Tour पढ़ो – वहां history and significance of the sacred Kailash Mansarovar सब है।

लेकिन एक बार याक भागा, राजेश का बैग गिर गया – अंदर के बिस्किट सब फैल गए! सब हंसे, “राजेश भाई, ये तो Kailash Mansarovar Yatra funny incidents का पहला चैप्टर है!” वो भी हंस पड़ा, “चलो, याक को भी कुछ खाने को मिल गया।”

कैलाश पर्वत: दर्शन और वो भावुक पल

अब असली कमाल – Mount Kailash। पुरंग से 50 किलोमीटर की ड्राइव, फिर डारचेन कैंप। वहां से Kailash Parikrama शुरू। 52 किलोमीटर का पैदल सफर, तीन दिन में।

पहला दिन: डिरापुक तक, 20 किमी। ऊंचाई 4800 मीटर। राजेश को AMS हुआ थोड़ा – सिरदर्द, थकान। लेकिन Diamox खाई, पानी ज्यादा पिया, और चलता रहा। रास्ते में घोड़े वाले थे, लेकिन राजेश ने पैदल ही किया। “पैरों में दर्द था, लेकिन मन में शिवजी का नाम,” वो कहता।

दूसरा दिन: सबसे कठिन, डोलमा लापचा पास – 5600 मीटर। वहां हवा इतनी ठंडी कि सांस लेना मुश्किल। कई लोग रुक गए, लेकिन राजेश ने सोचा, “पापा के लिए, मां के लिए।” पास क्रॉस करते ही, नीचे घाटी दिखी – जैसे स्वर्ग। वहां शिवजी का मंदिर है, जहां सब रो पड़े। राजेश ने फोटो नहीं खींचा, बस घुटनों पर बैठ गया। “अमित, लगा जैसे बाबा ने पुकारा हो। आंसू रुक ही नहीं रहे थे,” उसकी आवाज कांप गई बताते हुए।

तीसरा दिन: आसान था, जोरपुल तक। पूरा ग्रुप थका हुआ, लेकिन खुश। रास्ते में बोनपास भी आया, जहां बोन धर्म के लोग पूजा करते हैं। राजेश ने सीखा कि Kailash कैसे multi-faith pilgrimage site है। अगर आप Kailash Parikrama route details चाहते हैं, तो Ace the Himalaya पर ultimate guide है।

रास्ते की चुनौतियां: हंसी, आंसू और सबक

दोस्तों, ये यात्रा सिर्फ सुंदरता की नहीं, चुनौतियों की भी। राजेश को एक रात बुखार आ गया – कैंप में डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाया। “यार, सोचा था अब तो वापस लौटना पड़ेगा,” वो बोला। लेकिन ग्रुप के सपोर्ट से ठीक हो गया। खाने में सिर्फ दाल-चावल, लेकिन राजेश ने छत्तीसगढ़ स्टाइल में मसाला डाल दिया – सबने तारीफ की! “बिलासपुर का स्वाद तिब्बत पहुंच गया,” हंसे सब।

लेकिन भाई सीरियस बात ये है कि ऊंचाई पर कई बार डर लगता है। एक साथी को हार्ट अटैक जैसा लगा, हेलिकॉप्टर से भेजा गया। राजेश कहता, “इसलिए preparation tips फॉलो करो – cardio exercises, breathing techniques।” Namaste Nepal Trekking पर difficulty and preparation tips अच्छे से बताए हैं।

परिक्रमा के आखिरी में, राजेश ने पापा का नाम लिया। “लगा जैसे बाबा ने कहा, ‘बेटा, तू आ गया।’” वो रोते हुए मुझे कहा। मैंने कहा, “राजेश, तू हीरो है यार।”

वापसी का सफर: और वो बदलाव जो हमेशा रहेगा

तीन हफ्ते बाद, काठमांडू वापस। रास्ते में ल्हासा रुके, पोटाला पैलेस देखा। लेकिन राजेश का मन कैलाश में ही अटका था। बिलासपुर पहुंचा तो बदला हुआ। अब वो रोज मॉर्निंग वॉक करता है, फैमिली के साथ ज्यादा टाइम स्पेंड। “अमित भाई, ये यात्रा ने मुझे नया जीवन दिया। पापा अब स्वस्थ हैं, और मैं… मैं तो शिवजी का सिपाही बन गया।”

Kailash Mansarovar Yatra itinerary from Bilaspur Chhattisgarh कुछ ऐसा था: दिन 1-2 बिलासपुर-दिल्ली-काठमांडू, दिन 3-5 तिब्बत एंट्री और मानसरोवर, दिन 6-9 कैलाश परिक्रमा, फिर वापसी। कुल 22 दिन। अगर helicopter option लेना हो, तो Adventure Altitude Treks देखो – सिर्फ 10 दिन में हो जाता है, लेकिन महंगा।

टिप्स जो राजेश देना चाहता है: आपकी मदद के लिए

चलिए, अब प्रैक्टिकल बातें। Kailash Mansarovar Yatra how to apply? MEA वेबसाइट पर ऑनलाइन अप्लाई, लॉटरी सिस्टम। Fee? 1.74 लाख।

  • फिटनेस: रोज 10 किमी वॉक, योगा।
  • पैकिंग: लेयर्स क्लोथ्स, हाइकिंग बूट्स, स्लीपिंग बैग।
  • हेल्थ: AMS से बचो, ज्यादा पानी पियो।
  • बजट: 2 लाख से शुरू, लेकिन worth it।
  • ग्रुप चुनो: छोटा ग्रुप बेहतर।

अगर आप सर्च कर रहे हो जैसे “Kailash Mansarovar Yatra spiritual experiences from India”, तो Soul Quenching Experiences पढ़ो – personal stories भरी पड़ी हैं।

इसे भी देखो:

कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े आम सवाल – राजेश के अनुभवों से

1. Kailash Mansarovar Yatra शुरू कहां से होती है?

राजेश की तरह अगर आप बिलासपुर या छत्तीसगढ़ से हैं, तो सबसे आसान रास्ता है — बिलासपुरदिल्ली → काठमांडू → तिब्बत (पुरंग)। आप चाहे तो दिल्ली से सरकारी या प्राइवेट टूर ऑपरेटर के साथ भी जुड़ सकते हैं। अगर जल्दी करना है तो helicopter route भी है – Kathmandu → Simikot → Hilsa → Mansarovar।

2. Kailash Mansarovar Yatra की कीमत कितनी आती है?

देख भाई, खर्च थोड़ा भारी है लेकिन अनुभव अनमोल है। राजेश ने करीब ₹1.8 लाख में पूरी यात्रा की थी। अगर helicopter route लो तो ₹2.5 से ₹3 लाख तक लग सकता है। लेकिन यकीन मानो, हर पैसा worth है – जब पहली बार कैलाश दिखेगा, तो सांसें थम जाएंगी।

3. क्या आम आदमी भी जा सकता है? उम्र का कोई बंधन है?

बिलकुल जा सकता है! बस हेल्थ फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी होता है, और उम्र ideally 18 से 70 साल के बीच होनी चाहिए। राजेश खुद 30 पार था, फिर भी रोज़ की वॉक और योगा ने उसे तंदुरुस्त बना दिया। तो अगर मन में आस्था है, तो शरीर को तैयार करो – शिव खुद रास्ता बना देंगे।

4. यात्रा का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

Best time to visit Kailash Mansarovar – May to June या September to October। राजेश जून में गया था, जब Saga Dawa Festival होता है,  पूरा माहौल भक्ति और ऊर्जा से भर जाता है। Barish के मौसम में avoid करो, क्योंकि रास्ते slippery हो जाते हैं।

5. यात्रा की तैयारी कैसे करें?

राजेश कहता था, “ये कोई पिकनिक नहीं, ये शिवजी की पुकार है।” तो तैयारी भी वैसी होनी चाहिए –

  • रोज़ कम से कम 5–10 km वॉक
  • सीढ़ियां चढ़ने की आदत डालो
  • AMS (ऊंचाई की बीमारी) से बचने के लिए breathing practice करो
  • Diamox जैसी दवाइयां डॉक्टर से पूछकर रखो
  • और सबसे जरूरी – मानसिक तैयारी, क्योंकि ये शरीर से ज़्यादा आत्मा की यात्रा है।

6. क्या कैलाश पर्वत की चढ़ाई करनी पड़ती है?

नहीं भाई, कैलाश पर्वत पर कोई नहीं चढ़ता। वो पर्वत खुद भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। हम सिर्फ़ तीन दिन की परिक्रमा (Kailash Parikrama) करते हैं – करीब 52 किलोमीटर की, जो पूरी यात्रा का सबसे भावुक हिस्सा होता है। राजेश कहता था, “जब डोलमा ला पास पार किया, तो लगा जैसे खुद शिवजी मिले हों।”

7. क्या मानसरोवर झील में स्नान ज़रूरी है?

धार्मिक रूप से, हां – पर ये पूरी तरह आपकी श्रद्धा पर निर्भर है।
राजेश ने ठंडे पानी में डुबकी लगाई और बोला – “जैसे आत्मा फिर से जन्म ले रही हो।” अगर मौसम खराब हो या हेल्थ इश्यू हो, तो बस जल छू लेना भी काफी है – भावना ही मुख्य है।

8. खाने-पीने का क्या इंतजाम रहता है?

राजेश के ग्रुप में ज्यादातर vegetarian food मिलता था – दाल, चावल, सूप, सब्जी। कभी-कभी noodles या ready-to-eat भी चलते हैं। Pro tip – छोटे पैकेट में चिवड़ा, बिस्किट, और छत्तीसगढ़ वाला मसाला साथ रख लो, वरना Rajesh की तरह याक को खिला दोगे सब!

9. ऊंचाई पर बीमारी (AMS) से कैसे बचें?

  • पहले कुछ दिन धीरे-धीरे acclimatize करो
  • खूब पानी पीयो (कम से कम 3-4 लीटर रोज़)
  • ज्यादा दौड़भाग मत करो
  • Diamox सिर्फ डॉक्टर की सलाह से लो
    राजेश ने यही किया, वरना 5600 मीटर पर सिर घूम जाता है।

10. Kailash Mansarovar Yatra के लिए कहां रजिस्टर करें?

सरकारी यात्रा के लिए –
https://kmy.gov.in (यहीं से Ministry of External Affairs द्वारा रजिस्ट्रेशन होता है) Private ऑप्शन के लिए – Trip to Temples, Ritual Holidays, Kailash Yatra, आदि वेबसाइट्स। May में ड्रॉ ऑफ लॉट्स होता है, तो पहले से तैयार रहो।

11. क्या Kailash Yatra में इंटरनेट या फोन नेटवर्क मिलता है?

काठमांडू तक तो ठीक-ठाक नेटवर्क मिलता है, लेकिन तिब्बत पहुंचने के बाद नेट गायब! राजेश कहता था – “ये डिजिटल detox ही सबसे प्यारा हिस्सा था। बस पहाड़, हवा और मौन।”
तो अपने फोन से ज़्यादा अपने मन से connect रहो।

12. वापसी के बाद क्या बदलाव महसूस होता है?

राजेश अब हर सुबह सूर्योदय के साथ वॉक करता है, फैमिली के साथ टाइम बिताता है, और कहता है – “कैलाश जाकर आया नहीं, बल्कि खुद को खोज लाया।” और यही असली मकसद है – बाहर नहीं, भीतर की यात्रा।

क्यों जाएं ये Kailash MansarovarYatra?

दोस्तों, राजेश कहता है, “ये सिर्फ तीर्थ नहीं, आत्मा की कॉल है।” अगर आप भी feel कर रहे हो, तो प्लान करो। मैं अमित, खूबसूरत भारत से कहता हूं – जाओ, बदल जाओ। कमेंट में बताओ, क्या सोच रहे हो? शेयर करो, लाइक करो।

जय शिव शंकर!

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