Kashi Vishwanath Temple : वो 20 Golden Tips जो आपकी काशी यात्रा को स्वर्ग बना देंगी!
नमस्ते! यारों, मैं अमित वही, खूबसूरत भारत वाला। आज जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ ना, वो सुनकर तुम्हारा भी बैग अपने आप पैक होने लगेगा। अभी कुछ दिन पहले मैं, भवानी और संतोष – हम तीन यार जांजगीर से सीधा बाबा Kashi Vishwanath Temple की चौखट पर पहुँच गए। प्लान था नहीं, बस भवानी ने रात को वॉइस नोट डाला, “यार, बाबा बुला रहे हैं, चलें?” मैंने बोला, “बस टिकट कटवा!” और संतोष ने तुरंत बोला, “मैं भी चलूँगा, बाबा को बोलना मेरी वाली नई बाइक भी मंजूर कर दें!”
ये ट्रिप कोई आम घूमने-फिरने वाली नहीं थी। ये वो यात्रा थी जहाँ हम गए तो तीन थे, पर वापस आए तो चार – चौथा था बाबा का आशीर्वाद जो सीने में बैठ गया। नया Kashi Vishwanath Corridor देखा, सुबह 4 बजे मंगला आरती में खड़े हुए, संध्या आरती में आँखें भर आईं, गंगा मैया ने नहलाया, बनारसी ठंडाई ने उड़ाया, मणिकर्णिका घाट पर जिंदगी-मौत का फर्क समझ आया… सब कुछ ऐसा हुआ कि आज भी जब आँख बंद करता हूँ तो लगता है अभी भी वहीं खड़ा हूँ, बाबा के सामने।
तो आज पूरा किस्सा सुनाने जा रहा हूँ – दिन-ब-दिन, पल-पल, हँसी-मजाक से लेकर वो इमोशनल पल तक जब तीनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया था। चाय पकड़ो, आराम से बैठो, और मेरे साथ चलो काशी की उन गलियों में जहाँ हर कदम पर हर हर महादेव गूँजता है। तो चलिए फिर शुरू करते हैं… बम भोले! और हां मैंने Kashi Vishwanath temple के बाद पूरा Varanasi explore किया, मेरे Varanasi Tour 2025 पोस्ट को देख कर आप भी कर लेना।
पहले तो ये समझ लो – Kashi Vishwanath Temple क्यों है इतना खास?
दोस्त, ये Kashi Vishwanath temple कोई आम मंदिर नहीं है। ये 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मतलब भगवान शिव का अपना घर। कहते हैं यहाँ दर्शन मात्र से मोक्ष मिल जाता है। और हाँ, बनारस को मोक्षदायिनी नगरी भी इसी वजह से बोलते हैं। पूरा इतिहास पढ़ना हो तो Wikipedia का ये पेज एक बार देख लेना, सब साफ-साफ लिखा है।
कहते हैं जहाँ भी ज्योतिर्लिंग हैं, वहाँ शिव जी साक्षात् रहते हैं, और काशी वाला तो सबसे पावरफुल माना जाता है। पुराणों में लिखा है कि यहाँ दर्शन मात्र से पाप कट जाते हैं और अंतिम समय में यहाँ सांस छूटे तो सीधा मोक्ष। तभी तो काशी को अविमुक्त क्षेत्र, आनंदवन और मोक्षदायिनी नगरी बोलते हैं।
फिर इसका नाम ही है “विश्वनाथ” – सारे विश्व का नाथ। मतलब पूरा ब्रह्मांड का मालिक। यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू है, यानी खुद प्रकट हुआ था, किसी ने बनाया नहीं। त्रेता युग में खुद भगवान शिव ने यहाँ तपस्या की थी और भोलेनाथ ने वरदान दिया था कि जो यहाँ आएगा, उसे मैं कभी नहीं त्यागूँगा।

इतिहास भी कम रोचक नहीं है भाई। ये Kashi Vishwanath Temple ना जाने कितनी बार टूटा और फिर खड़ा हुआ। मुगल काल में औरंगजेब ने 1669 में तोड़कर मस्जिद बनवाई थी (जो आज ज्ञानवापी के नाम से जानी जाती है), पर बाबा का जलवा ऐसा था कि मराठों ने, अहिल्याबाई होल्कर ने, पंजाब के राजाओं ने, फिर से बनवाया। हर बार जब लगता था अब खत्म हो गया, तब बाबा फिर से अपने भक्तों के जरिए प्रकट हो गए। ये मंदिर नहीं, जीती-जागती आस्था का प्रतीक है।
और सबसे बड़ी बात – काशी में शिव जी अंत में खुद आकर तारक मंत्र कान में बोलते हैं, जिससे आत्मा को मोक्ष मिलता है। यही वजह है कि दुनिया भर के बूढ़े-बुजुर्ग यहाँ आकर “काशी में मरना” चाहते हैं। यहाँ मरना नहीं, अमर होना है दोस्त।
इसलिए जब भी कोई पूछता है कि इतने मंदिर हैं, काशी वाला क्यों स्पेशल? मैं बस इतना कहता हूँ – “क्योंकि यहाँ भगवान नहीं, भगवान का भगवान रहता है।” बस इतना समझ लो, फिर मन खुद-ब-खुद खींचने लगता है। हर हर महादेव!
Kashi Vishwanath Temple का इतिहास – जो बार-बार टूटा, पर कभी खत्म नहीं हुआ
यार, Kashi Vishwanath temple की कहानी कोई 100-200 साल पुरानी नहीं, ये तो हजारों साल पुरानी है। पुराणों में लिखा है कि काशी विश्वनाथ का शिवलिंग सतयुग से है, खुद भगवान शिव ने यहाँ निवास किया था। स्कंद पुराण की पूरी एक खंड “काशी खंड” इसी शहर और बाबा विश्वनाथ को समर्पित है। कहते हैं दिवोदास राजा के समय शिव जी यहाँ से कुछ समय के लिए गए थे, पर बाद में खुद लौट आए और बोले, “मैं काशी को कभी नहीं छोड़ूँगा।”
लिखित इतिहास में पहला जिक्र मिलता है 11वीं-12वीं सदी का – उस समय यहाँ बहुत बड़ा और भव्य मंदिर था। फिर 1194 में मुहम्मद गोरी के सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे तोड़ दिया। हिंदू राजाओं ने फिर बनवाया। इसके बाद कई बार टूटा और बना।
सबसे दर्दनाक हमला हुआ 1669 में – औरंगजेब ने मंदिर पूरी तरह ढहा दिया और वहाँ मस्जिद बनवाई, जिसे आज ज्ञानवापी मस्जिद कहते हैं। उसने फरमान जारी किया था कि पूरे हिंदुस्तान में जितने बड़े मंदिर हैं, सब तोड़ दो। काशी, मथुरा और अयोध्या के मंदिरों को खास तौर पर टारगेट किया गया। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि उस समय मूल शिवलिंग को बचाने के लिए पंडों ने उसे पास के एक कुएँ में डाल दिया था (वही कुआँ आज भी कॉरिडोर में है)।
पर बाबा के भक्त कहाँ रुकने वाले थे?
- 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने आज वाला मुख्य मंदिर बनवाया (जो अभी तक है)।
- उनके साथ पंजाब के राजा रणजीत सिंह ने 1835 में 1 टन सोना दान किया और पूरा गुम्बद सोने का चढ़वाया (आज भी वही सोना चमक रहा है)।
- अगल-बगल का मंदिर नारायण भट्ट जी ने बनवाया था 1585 में, जब अकबर का राज था।
- 19वीं सदी में कई मराठा सरदारों, ग्वालियर के सिंधिया घराने और जयपुर के राजा ने भी चंदा दिया।
फिर आजादी के बाद भी मंदिर छोटा और घिरा हुआ था। 2019 में प्रधानमंत्री मोदी जी ने Kashi Vishwanath Corridor प्रोजेक्ट शुरू किया। 300 से ज्यादा पुरानी इमारतें खरीदी गईं, 40 से ज्यादा प्राचीन मंदिरों को बाहर निकाला गया और पूरा इलाका जोड़ दिया गया। 13 दिसंबर 2021 को पहले फेज का उद्घाटन हुआ और अब ये दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर कॉरिडोर बन गया है।
तो दोस्त, ये Kashi Vishwanath temple सिर्फ पत्थर का नहीं है – ये हर बार टूटने और फिर खड़े होने की जिद है। हर बार जब कोई तानाशाह सोचता था कि अब शिव को मिटा दूँगा, तब बाबा अपने भक्तों के हाथों फिर से प्रकट हो जाते थे। यही वजह है कि आज भी जब आप वहाँ जाते हो तो लगता है – बाबा हार मानने वालों में से नहीं हैं।
इसलिए जब कोई पूछे कि इतना पुराना मंदिर है तो इतना चमक क्यों रहा है? तो बोल देना – “क्योंकि ये टूटने वालों का नहीं, फिर से खड़े होने वालों का मंदिर है।”
नया Kashi Vishwanath Corridor – पहले और अब का फर्क देखकर मुँह खुला का खुला रह गया!
यार, मैं 2018 में भी आया था। उस टाइम तंग गलियों से गुजरते हुए लगता था कि आज दर्शन होंगे भी या नहीं। लेकिन अब जो नया कॉरिडोर बना है ना, वो देखकर लगता है कोई 5 स्टार होटल में घुस गए हैं। चौड़ा रास्ता, मार्बल का फर्श, AC वाला वेटिंग एरिया, फ्री व्हीलचेयर, लॉकर… सब कुछ। ये पूरा प्रोजेक्ट दिसंबर 2021 में शुरू हुआ था और अब तो पूरा बनकर तैयार है। आधिकारिक वेबसाइट से लेटेस्ट अपडेट देखना हो तो shrikashivishwanath.org पर चले जाना। वहाँ ऑनलाइन टिकट, लाइव दर्शन सब मिल जाएगा।
यार, जो लोग 2018-19 से पहले काशी गए हैं ना, वो आज कॉरिडोर देखकर पहचान ही नहीं पाते कि ये वही जगह है। मैं खुद तीसरी बार गया था और पहुँचते ही बोल पड़ा, “अबे ये तो दुबई आ गया क्या!”
पहले क्या था (2018 तक का सीन)
- Kashi Vishwanath Temple तक पहुँचने के लिए 4-5 फीट चौड़ी गलियाँ
- दोनों तरफ दुकानें, ऊपर से तारों का जाल, अंधेरा सा रहता था
- लाइन में 6-8 घंटे लग जाते थे, गर्मी में तो बेहोशी छूटती थी
- जूते-चप्पल कहीं भी छोड़ना पड़ता था, चोरी का डर अलग
- गंगा और मंदिर के बीच सैकड़ों मकान, एक झलक भी नहीं मिलती थी
- कुल एरिया सिर्फ 3000 स्क्वायर फीट के आसपास
अब क्या हो गया (2025 का अपडेटेड सीन)
- चौड़ी-चौड़ी 80-100 फीट की सड़कें, पूरा मार्बल
- चारों तरफ छत, बारिश-सर्दी-गर्मी कुछ नहीं लगती
- AC वाले वेटिंग एरिया, फ्री व्हीलचेयर, बुजुर्गों के लिए लिफ्ट
- 4 मुख्य गेट, CCTV हर जगह, पुलिस और सुरक्षाकर्मी मुस्तैद
- लाइन में मैक्सिमम 20-40 मिनट (सुबह जल्दी गए तो 10 मिनट में भी दर्शन)
- फ्री लॉकर रूम, जूते-चप्पल सेफ
- गंगा और मंदिर का डायरेक्ट व्यू – एक ही जगह से दोनों दिखते हैं
- कुल एरिया अब 5 लाख स्क्वायर फीट से ज्यादा (170 गुना बढ़ गया!)
- 40+ पुराने मंदिर जो सैकड़ों साल से दबे थे, उन्हें साफ करके जोड़ दिया
- म्यूजियम, फूड कोर्ट, लंगर भवन, मेडिकल रूम, टूरिस्ट सुविधा केंद्र – सब कुछ
- रात में लाइटिंग ऐसी कि लगता है स्वर्ग उतर आया हो
पहले जहाँ 500-1000 लोग मुश्किल से एक साथ आ पाते थे, अब एक साथ 50-60 हजार लोग आराम से आ-जा सकते हैं। दिवाली-शिवरात्रि में भी अब पहले जैसी भगदड़ नहीं होती। मैं जब गेट नंबर 4 से अंदर घुसा तो भवानी बोला, “यार ये तो Noida के सेक्टर-18 वाला मॉल लग रहा है!” संतोष ने तुरंत जवाब दिया, “हाँ, पर यहाँ मालिक कोई बिल्डर नहीं, बाबा विश्वनाथ हैं!” हम तीनों हँसते-हँसते पेट पकड़ लिए।
तो दोस्त, अगर तुम 5-6 साल पहले गए हो और अब जाने का प्लान बना रहे हो तो एक बात याद रखना – पुरानी काशी की तस्वीरें भूल जाओ। अब जो देखोगे, उस पर यकीन नहीं होगा कि ये वही बनारस है। पूरा प्रोजेक्ट अभी भी चल रहा है, सेकंड फेज में और सुविधाएँ आने वाली हैं। लेटेस्ट फोटो और वीडियो देखना हो तो आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल चेक कर लेना – instagram.com/shrikashivishwanath
संक्षेप में कहूँ तो – पहले बाबा की एक झलक के लिए जान हथेली पर रखनी पड़ती थी, अब बाबा खुद अपने दरबार को इतना भव्य बना चुके हैं कि लगता है स्वागत करने खड़े हैं। बस एक बार चले जाओ, फिर खुद समझ जाओगे कि “पहले और अब” का फर्क क्या होता है।
Varanasi में हमारा दिन कैसे शुरू हुआ – सुबह 4 बजे का प्लान!
भवानी ने रात को ही बोला था, “अमित, मंगला आरती देखनी है तो 3:30 बजे लाइन में लगना पड़ेगा।” मैंने बोला, “अबे सोने कौन देगा?” भाई, रात को 2 बजे ही आँख खुल गई थी, एक्साइटमेंट ऐसा कि नींद आ ही नहीं रही थी। अलार्म तो बस औपचारिकता थी। हम तीनों होटल के कमरे में तैयार हो गए, गर्म स्वेटर, मोजे, मफलर सब डाल लिया क्योंकि नवंबर की बनारस की सुबह हड्डी तक ठंडी चली जाती है। 3:40 बजे होटल से निकले, बाहर कोहरा इतना कि सामने का आदमी भी धुंधला दिख रहा था। रिक्शा वाला मिला तो बोला, “बाबूजी, आज मंगला आरती देखनी है?” हमने कहा, “हाँ भाई, जल्दी!” वो हँसा और बोला, “अरे अभी तो 3:50 बजे हैं, लाइन में सबसे आगे पहुँचा दूँगा।” रास्ते में चाय की टपरी पर रुके, कुल्हड़ वाली अदरक वाली चाय पी, हाथ तपाए और फिर चल दिए।
दशाश्वमेध घाट पर गंगा स्नान किया। नवंबर की ठंड में पानी ऐसा लगा जैसे फ्रिज से निकालकर डाल दिया हो। संतोष तो नहाते-नहाते चिल्लाया, “ये हिमालय का पानी है क्या रे!” हम तीनों हँसते-हँसते नहाए और सीधे कॉरिडोर की तरफ। 4:50 तक हम गेट नंबर 4 के बाहर थे। भीड़ थी, लेकिन सुबह की वो शांति, हल्की-हल्की घंटियों की आवाज और हर तरफ से आता “हर हर महादेव”… यार, उस पल लगा कि अब दिन शुरू भी नहीं हुआ और जिंदगी सफल हो गई।
दर्शन का वो पल – जब सच में लगा बाबा सामने खड़े हैं
लाइन में सिर्फ 25 मिनट लगे, लेकिन यार, लाइन से जैसे ही गर्भगृह के अंदर कदम रखा, सब कुछ एकदम शांत हो गया। बाहर की भीड़, ठंड, थकान… सब गायब। सिर्फ घंटियों की हल्की सी गूँज और पंडित जी का “ॐ नमः शिवाय” सुनाई दे रहा था। सामने वो चमकता हुआ शिवलिंग, इतना छोटा सा, पर इतना ज्योतिर्मय कि आँखें झपकाना भी भूल गए। सोने-चाँदी का मुकुट, फूलों की माला, दूध की धार, बेलपत्र… सब कुछ धीमी गति में चल रहा था जैसे फिल्म का स्लो-मोशन सीन हो। बाबा विश्वनाथ का शिवलिंग इतना सुंदर, इतना चमकदार… मैं तो बस देखता रह गया।
मैं हाथ जोड़कर खड़ा था, पर लगा जैसे मेरे हाथ खुद-ब-खुद ऊपर उठ रहे हों। आँखें बंद कीं तो एकदम से लगा कि कोई मेरे सिर पर हाथ फेर रहा है, ठंडा सा, भारी सा, लेकिन बहुत सुकून देने वाला। मन में सिर्फ एक ही बात आई, “बाबा, बस तेरे होकर रहना है।” दो-तीन सेकंड का वो पल था, पर लगा जैसे सालों का बोझ उतर गया। बाहर निकला तो भवानी और संतोष भी चुप थे। तीनों ने एक-दूसरे को देखा, कुछ बोले बिना ही गले लग गए। उस पल सच में लगा था कि बाबा सामने खड़े मुस्कुरा रहे थे और कह रहे थे, “आ गए मेरे बच्चे… अब डरने की कोई बात नहीं।” वो पल जिंदगी में कभी नहीं भूलेगा भाई।
मैंने सिर्फ इतना कहा, “भोलेनाथ, मेरे यारों को खुश रखना और मुझे और घूमने की ताकत देना।” बाहर निकले तो भवानी बोला, “तूने क्या माँगा?” मैंने बोला, “तेरे लिए नई बाइक!” हम हँस पड़े।
Kashi Vishwanath Corridor में और क्या-क्या देखने लायक है?
भाई, सिर्फ Kashi Vishwanath temple के दर्शन करके मत निकल जाना, कॉरिडोर अपने आप में एक पूरा तीर्थ बन गया है। हम तीनों तो 3-4 घंटे आसानी से घूमते रहे। ये रहे टॉप स्पॉट जो बिलकुल मिस मत करना:
1. माँ अन्नपूर्णा मंदिर – मुख्य विश्वनाथ मंदिर से बस 50 मीटर। यहाँ सुबह-शाम लाइन लगती है प्रसाद के लिए। सोने का चम्मच-कटोरी और बहुत स्वादिष्ट लड्डू-खीर मिलता है। कहते हैं बाबा विश्वनाथ पहले माँ अन्नपूर्णा से भोजन करते हैं, फिर भक्तों को देते हैं।
2. पुराना कुआँ (ज्ञान कूप) – औरंगजेब के समय पंडों ने मूल शिवलिंग इसी कुएँ में छिपाया था। आज भी उसमें पानी है और ऊपर शीशा लगा है। देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
3. काल भैरव मंदिर – काशी आने वाला कोई भी व्यक्ति अगर काल भैरव के दर्शन नहीं करता तो उसकी यात्रा अधूरी मानी जाती है। अब ये मंदिर भी कॉरिडोर में ही है, पहले बाहर अलग था।
4. धुंधिराज गणेश मंदिर – बहुत पुराना और चमत्कारी गणेश जी। यहाँ पहुँचते ही मन शांत हो जाता है।
5. तारकेश्वर महादेव – छोटा सा लेकिन बहुत पावरफुल शिवलिंग। कहते हैं यहाँ दर्शन करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
6. म्यूजियम और गैलरी – कॉरिडोर के अंदर फ्री म्यूजियम है। यहाँ काशी का पुराना नक्शा, औरंगजेब का फरमान, अहिल्याबाई होल्कर के पत्र, सोने का गुम्बद चढ़ाने की पुरानी तस्वीरें – सब देख सकते हो। बच्चे हों तो उन्हें जरूर ले जाना।
7. गंगा व्यू पॉइंट – ऊपरी मंजिल पर एक जगह है जहाँ से Kashi Vishwanath Temple का गोल्डन टॉप और सामने गंगा एक साथ दिखती है। फोटो खींचने वालों का फेवरेट स्पॉट। भवानी ने वहाँ 50 सेल्फी ली थीं!
8. लंगर भवन – फ्री में खाना मिलता है – पूरी, सब्जी, खीर, चटनी। स्वाद ऐसा कि पैसे देने का मन करता है। हमने भी पेट भर खाया।
9. मेडिकल रूम और व्हीलचेयर सुविधा – बुजुर्ग या बीमार हों तो फ्री व्हीलचेयर और डॉक्टर की सुविधा है।
10. फूड कोर्ट और शॉपिंग एरिया – बनारसी साड़ी, रुद्राक्ष, पूजा सामान, गुलाबी मीनाकारी – सब एक ही जगह। बार्गेनिंग भी कर सकते हो।
11. नया मंदिर – लक्ष्मी-नारायण और कार्तिकेय जी – बिलकुल नये बने हैं, बहुत सुंदर मूर्तियाँ हैं।
12. लाइट एंड साउंड शो (शाम को) – कुछ खास दिनों में शाम 7:30 के बाद लाइट-शो होता है जिसमें मंदिर का पूरा इतिहास दिखाते हैं।
संक्षेप में कहूँ तो अब कॉरिडोर में एक बार घुसे तो बाहर निकलने का मन ही नहीं करता। पहले सिर्फ बाबा विश्वनाथ के दर्शन होते थे, अब पूरी काशी एक छत के नीचे आ गई है। तो अगली बार जब जाओ, कम से कम 3-4 घंटे सिर्फ कॉरिडोर के लिए रखना, वरना बहुत कुछ मिस हो जाएगा यार! अगर आपको बनारस आने का पूरा प्लान चाहिए तो मेरा ये पोस्ट पढ़ लेना – Varanasi Trip Plan 2026: काशी घूमने का सबसे सस्ता और बेस्ट तरीका
संध्या आरती का वो नजारा
शाम के ठीक 6:45 बजे हम लोग कॉरिडोर के अंदर पहुँच गए थे, भीड़ थी पर सब इतने अनुशासित कि कोई धक्का तक नहीं लगा। जैसे ही 7 बजे घंटियाँ बजीं, पूरा माहौल बदल गया। 21 पंडित जी एक साथ कपूर की आरती करने लगे, घंटे-घड़ियाल, शंख, ढोल डमरू सब एक साथ बज उठे। लाइटें धीरे-धीरे कम होती गईं और सिर्फ आरती की लौ चमकने लगी। वो लौ जब हवा में घूमती थी तो लगता था पूरा गोल्डन गुम्बद नाच रहा हो। पंडित जी ऊँचे स्वर में “जय शिव ओंकारा, हर शिव ओंकारा” गा रहे थे और हजारों लोग एक साथ ताली बजा रहे थे। मेरे बगल में एक बुजुर्ग अंकल खड़े थे, हाथ जोड़े, आँखों से आंसू बह रहे थे। मैंने भी आँखें बंद कीं तो लगा जैसे बाबा सामने खड़े हैं और मुस्कुरा रहे हैं।
आरती खत्म हुई तो तालियों की गड़गड़ाहट इतनी जोर से हुई कि लगा पूरा बनारस झूम रहा है। बाहर निकले तो भवानी चुपके से बोला, “यार, आज तक किसी कंसर्ट में भी ऐसा नहीं लगा था।” सच कहूँ दोस्त, उस 20-25 मिनट में दिल इतना भर आया कि बोलते नहीं बना। वो संध्या आरती नहीं, बाबा का सीधा आलिंगन थी। आज भी जब रिकॉर्डिंग देखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं।
Kashi Vishwanath Temple कैसे पहुँचे
यार, बनारस पहुँचना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस थोड़ा दिमाग लगाना पड़ता है वरना ऑटो-रिक्शा वाले लूट लेते हैं। मैं तीनों तरीके बता देता हूँ, तुम अपनी जेब और टाइमिंग देख लेना।
- अगर फ्लाइट से आ रहे हो तो लल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट (बाबतपुर) उतरो, वहाँ से Uber/Ola या एयरपोर्ट की प्री-पेड कैब ले लो, बोल देना “कॉरिडोर गेट नंबर 4 ड्रॉप”, 600-800 रुपये में 45 मिनट में पहुँचा देगा।
- ट्रेन से आना सबसे मजेदार है – हम लोग Sarnath express से शाम 5 बजे बनारस जंक्शन उतरे, बाहर निकले तो प्री-पेड ऑटो काउंटर पर ₹180 में गोदौलिया तक का टिकट कटवाया और सीधा पहुँच गए। अगर कैंट स्टेशन उतरोगे तो और भी करीब है, सिर्फ 4 किमी। बस वालों से बच के रहना, वो घुमाते रहते हैं।
स्टेशन या एयरपोर्ट से गोदौलिया चौराहा तक पहुँच गए ना, समझो आधा काम हो गया। वहाँ से गाड़ी अंदर नहीं जाती, तो या तो 8-10 मिनट पैदल चल लो (रास्ते में ठंडाई-चाय पीते जाना) या इलेक्ट्रिक रिक्शा में बैठ जाओ, ₹10-20 पर पर्सन लगता है। गोदौलिया से सीधा गेट नंबर 4 की तरफ चल पड़ो, रास्ते में बोर्ड भी लगे हैं, गूगल मैप पर भी “Shri Kashi Vishwanath Corridor Gate 4” डालोगे तो बिलकुल सही लोकेशन आ जाएगी।
हमने तो होटल भी दशाश्वमेध घाट के पास ही लिया था, रात 2 बजे उठे, 10 मिनट पैदल और 4:50 तक लाइन में सबसे आगे पहुँच गए। सुबह का प्लान हो तो गोदौलिया, ललिता घाट या अस्सी के आसपास होटल बुक कर लेना, पैदल ही मंदिर चले जाना। सावन-शिवरात्रि में जा रहे हो तो एक दिन पहले पहुँच जाना, वरना ट्रेन-होटल कुछ नहीं मिलेगा।
बस इतना याद रखना – एक बार बनारस की सरजमीं पर पैर रख दिया ना, बाबा खुद खींच लेते हैं। हम तो स्टेशन उतरते ही बोल दिए थे, “चलो भाई, घर पहुँच गए!”
Kashi Vishwanath Temple Travel Tips (2025 के लेटेस्ट)
मेरे तजुर्बे से 20 गोल्डन टिप्स 2025 अपडेटेड, इन्हें फॉलो करोगे तो ट्रिप 10 गुना मजेदार हो जाएगा, अगर आप भी जाना चाहते हो तो ये टिप्स याद रखना (2025 के लेटेस्ट)
1. सबसे बेस्ट टाइम: सावन, महाशिवरात्रि, देव दीपावली, रंगभरी एकादशी – भीड़ होगी पर माहौल स्वर्ग जैसा। नॉर्मल दिन चाहो तो दिसंबर-जनवरी की ठंड बेस्ट।
2. सुबह 3-6 बजे के बीच जाना है तो रात में ही गोदौलिया/दशाश्वमेध घाट के आसपास होटल ले लो, पैदल 10 मिनट में पहुँच जाओगे।
3. मंगला आरती देखनी है तो रात 2 बजे से लाइन लग जाती है, गर्म कपड़े + मोजे + छोटा सा आसन जरूर ले जाना।
4. ₹300 का सुगम दर्शन टिकट ऑनलाइन ले लो (shrikashivishwanath.org) – 5-10 मिनट में दर्शन, पैसे वसूल।
5. मोबाइल, चमड़े की बेल्ट-पर्स, बैग, इलेक्ट्रॉनिक सामान – कुछ भी अंदर नहीं जाएगा। बाहर फ्री लॉकर है, पर लाइन लगती है इसलिए पहले ही जमा कर दो।
6. जूते-चप्पल बाहर ही उतारने पड़ते हैं, मार्बल बहुत ठंडा होता है – मोटे मोजे ले जाना मत भूलना।
7. पूजा सामग्री बाहर से मत खरीदना, अंदर फ्री बेलपत्र-फूल मिलते हैं। बाहर वाले 200-300 तक लूट लेते हैं।
8. गेट नंबर 4 से एंट्री सबसे तेज और आसान है, बाकी गेट कभी-कभी बंद भी रहते हैं।
9. दिवाली-सावन में 2-3 दिन पहले होटल बुक कर लो, लास्ट मिनट में 5000-10000 वाला कमरा भी नहीं मिलता।
10. बनारस में Uber/Ola कम चलते हैं, InDrive या Rapido बाइक बुक कर लो – सस्ती और तेज।
11. गोदौलिया से मंदिर तक ऑटो वाले 200-300 माँगते हैं, मना कर दो – इलेक्ट्रिक रिक्शा में ₹10-20 में चले जाओ।
12. गंगा स्नान के बाद बदलने के लिए पेड चेंजिंग रूम हैं घाट पर (₹20-30), तौलिया साथ रखना।
13. भांग ठंडाई पीनी है तो “बाबा ठंडाई” या “केसरिया ठंडाई” वाली दुकान पर जाना, लीगल है पर कम पीना, वरना रात भर बम-बम हो जाएगा
14. शाम 6:45 की गंगा आरती दशाश्वमेध घाट पर जरूर देखना, फिर 7 बजे की संध्या आरती कॉरिडोर में – एक ही दिन में दोनों स्वर्ग देख लोगे।
15. मणिकर्णिका घाट रात 10-11 बजे जाना, वहाँ का माहौल अलग लेवल का है।
16. बनारसी साड़ी, रुद्राक्ष, गुलाबी मीनाकारी – कॉरिडोर के अंदर ही शॉपिंग कर लो, बाहर से सस्ता और अच्छा मिलेगा।
17. फ्री लंगर 11 बजे से 2 बजे तक चलता है – पूरी-सब्जी-खीर, स्वाद जबरदस्त।
18. अगर ग्रुप में 10+ लोग हो तो पहले से VIP पास के लिए मंदिर ऑफिस में अप्लाई कर सकते हो।
19. फोटोग्राफी अंदर पूरी तरह बैन है, बाहर गेट के पास या गंगा व्यू पॉइंट पर फोटो खींच लेना।
20. सबसे जरूरी टिप – वहाँ जाकर ज्यादा प्लान मत करना, बस बाबा के साथ फ्लो में चलते जाना। जो होगा, बेस्ट होगा।
इन टिप्स को फॉलो करोगे तो ना पैसे बर्बाद होंगे, ना टाइम और ट्रिप यादगार बन जाएगी। मैं तो हर बार कुछ नया सीखकर आता हूँ, तुम भी जाओ और अपने वाले टिप्स मुझे कमेंट में बताना! हाँ अगर आप gaiud लेना चाहते हो तो पहले ये चेक कर लो – Tour Guide Hire Karne ki 5 Bhool? [मेरा 140+ Trips का Experience]
Kashi Vishwanath Temple एक एहसास है
यार, काशी कोई टूरिस्ट स्पॉट नहीं है, ये एक एहसास है जो जिंदगी भर साथ चलता है। वहाँ की गलियाँ, गंगा की लहरें, बाबा का दरबार, ठंडाई की चुस्की, संध्या आरती की घंटियाँ – सब मिलकर कुछ ऐसा कर जाते हैं कि वापस आकर भी लगता है कि दिल अभी भी वहीं छूटा हुआ है। मैं, भवानी और संतोष जब ट्रेन में बैठे थे वापसी की, तो कोई कुछ नहीं बोल रहा था। बस खिड़की से बाहर देखते रहे और आँखें नम थीं। भवानी ने आखिर में चुपके से कहा, “यार, पता है, अब हर साल आना पड़ेगा वरना जी नहीं लगेगा।” मैंने हँसते हुए कहा, “अब तो बाबा ने बुलावा दे दिया है, अब कौन रोक सकता है।”
तो दोस्त, अगर जिंदगी में कभी मन बेचैन हो, कुछ समझ ना आए, या बस यूँ ही बाबा को एक बार गले लगाना हो – टिकट कटवाओ और बनारस भाग जाओ। वहाँ पहुँचते ही सब सवाल अपने आप जवाब बन जाते हैं। मैं तो बस इतना कहूँगा – एक बार बाबा के दर पर सिर झुका लिया ना, फिर सारी उम्र सिर ऊँचा करके जीने की ताकत मिल जाती है। Kashi Vishwanath Temple दर्शन करने ke बाद आप kedarnath Temple, Omkareshwar Temple, Rameshwaram Jyotirlinga का दर्शन कर लेना मैंने तो कर लिया है।
जाओ, बाबा बुला रहे हैं।
और हाँ, जब जाओ तो मेरे लिए भी एक बेलपत्र चढ़ा देना।
हर हर महादेव
तुम्हारा यार,
अमित (जो अब काशी का हो चुका है)
Kashi Vishwanath Temple से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब
1. Kashi Vishwanath Temple कहाँ है?
यह मंदिर वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में, गंगा नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। नया कॉरिडोर सीधे गंगा से मंदिर को जोड़ता है।
2. मंदिर कब खुलता और कब बंद होता है?
मंदिर का समय: सुबह 3 बजे से रात 11 बजे तक
बीच में सिर्फ 1 घंटे का विश्राम होता है।
3. क्या मंदिर की आरती ऑनलाइन बुक हो सकती है?
हाँ, बिल्कुल। मंगला आरती, भोग आरती, सप्तऋषि आरती, संध्या आरती – सबकी बुकिंग मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर होती है: shrikashivishwanath.org
4. मंगला आरती देखने के लिए कितना पहले पहुँचना चाहिए?
अगर आपने टिकट बुक किया है, तो कम से कम 30-40 मिनट पहले पहुँचे। बिना टिकट वालों को लाइन में 3:30–4 AM तक लगना पड़ता है।
5. क्या मोबाइल अंदर ले जा सकते हैं?
नहीं। मंदिर परिसर में मोबाइल, कैमरा, बैग, चमड़े की चीजें बिल्कुल नहीं ले जा सकते।
कॉरिडोर में फ्री लॉकर मिल जाता है।
6. क्या जूते-चप्पल रखने की सुविधा है?
हाँ, फ्री शू स्टैंड है और बिल्कुल सुरक्षित है।
7. क्या स्पेशल दर्शन का टिकट है?
हाँ, ₹300 Sugam Darshan Ticket।
इससे 5–10 मिनट में आराम से दर्शन हो जाते हैं।
8. पहुँचने का सबसे आसान गेट कौन सा है?
Gate No. 4 सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
यहीं से मुख्य लाइन, व्हीलचेयर और ज्यादातर सुविधाएँ मिलती हैं।
9. क्या कॉरिडोर में व्हीलचेयर उपलब्ध है?
हाँ, फ्री व्हीलचेयर और सहायक मिलते हैं।
बुजुर्गों के लिए पूरी व्यवस्था शानदार है।
10. क्या गंगा स्नान के बाद ही मंदिर जा सकते हैं?
जरूरी नहीं, लेकिन परंपरा है कि लोग पहले दशाश्वमेध घाट या मणिकर्णिका घाट पर स्नान करते हैं और फिर मंदिर जाते हैं।
11. मंदिर में क्या-क्या ले जा सकते हैं?
आप सिर्फ
- फूल
- बेलपत्र
- दूध/जल
- हल्की पूजा सामग्री
ले जा सकते हैं।
बाकी सब लॉकर में रखना पड़ेगा।
12. क्या VIP दर्शन उपलब्ध है?
नहीं, किसी भी सेलेब्रिटी या VIP के लिए अलग लाइन नहीं है।
सिर्फ Sugam Darshan ही स्पेशल लाइन है।
13. मंदिर आने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
- सावन
- महाशिवरात्रि
- देव दीपावली
- रंगभरी एकादशी
लेकिन इन दिनों भीड़ बहुत रहती है।
अगर शांति से दर्शन चाहते हो, तो नवंबर–फरवरी का समय बेस्ट है।
14. क्या मंदिर के अंदर फोटोग्राफी allowed है?
पूरी तरह से No.
कॉरिडोर के बाहर वाली जगहों में फोटो ले सकते हो।
15. निकटतम रेलवे स्टेशन कौन सा है?
- Banaras Junction (BSBS) – 6 km
- Varanasi Cantt (BSB) – 4 km
16. निकटतम एयरपोर्ट कौन सा है?
Lal Bahadur Shastri Airport, Babatpur – लगभग 25 km।
17. कॉरिडोर घूमने में कितना समय लगता है?
अगर आराम से घूमना है तो 2–3 घंटे।
अगर सिर्फ दर्शन करके निकलना है तो 40 मिनट – 1 घंटा।
18. क्या मंदिर में भोजन या लंगर मिलता है?
हाँ, कॉरिडोर में फ्री लंगर भवन है।
इसके अलावा फूड कोर्ट भी है।
19. क्या आसपास होटल आसानी से मिल जाते हैं?
हाँ, दशाश्वमेध घाट और गोदौलिया इलाके में, ₹800 से लेकर ₹5000+ तक के सभी बजट के होटल मिल जाते हैं।
20. क्या पूरे परिवार के लिए यात्रा सुरक्षित है?
100% सुरक्षित। कॉरिडोर में
- CCTV
- महिला सुरक्षा
- सिक्योरिटी
- मेडिकल रूम
सब मौजूद हैं।





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