Nagpanchami : दलहा पहाड़ के मेले की मस्ती और दोस्तों के साथ एक यादगार सैर

Nagpanchami : दोस्तों के साथ दलहा पहाड़ की मस्ती और मेले का जादू

हाय दोस्तों, मैं हूँ तुम्हारा यार, खूबसूरत भारत का एक घुमक्कड़, जो हर बार कुछ नया अनुभव लेकर तुम्हारे सामने हाज़िर होता है। आज मैं तुम्हें ले चलता हूँ एक ऐसे त्योहार की सैर पर, जो मेरे लिए बहुत स्पेशल है – Nagpanchami। ये कोई साधारण त्योहार नहीं है, भाई! ये है आस्था, परंपराओं, मस्ती और दोस्तों के साथ यादगार पलों का मेल। इस बार मैं अपने यारों – भवानी, संजय, संतोष और अनिल के साथ जांजगीर से बाइक पर दलहा पहाड़ जा रहा हूँ, जहाँ सदियों पुराना Nagpanchami Mela लगता है। तो चलिए, मेरी इस यात्रा और इस खास त्योहार की कहानी को एकदम दोस्ताना अंदाज़ में सुनते हैं।

Nagpanchami क्या है? Nagpanchami कब है?

सबसे पहले तो ये समझ लो कि Nagpanchami कोई छोटा-मोटा त्योहार नहीं है। भारत के कोने-कोने में इसे अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है, लेकिन इसका मकसद एक ही है – प्रकृति और साँपों के प्रति सम्मान। हिंदू मान्यताओं में साँप को भगवान शिव का आभूषण माना जाता है, और Nagpanchami के दिन लोग नाग देवता की पूजा करते हैं। ये त्योहार सावन महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आता है, और इस वर्ष 2025 में ये पंचमी तिथि 28 जुलाई 2025 को रात्रि 11 बजे 24 मिनट पर प्रारंभ होगा और 30 जुलाई 2025 को पूर्वाह्न 12 बजे 46 मिनट पर समाप्त होगा। पंचांग के आधार पर इस वर्ष यह पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा। Nagpanchami Muhurt के बारे ज्यादा डिटेल्स के लिए अमर उजाला में भी देख सकते हैं।

मैं बचपन से देखता आ रहा हूँ कि मेरे गाँव में लोग इस दिन नाग मंदिरों में दूध चढ़ाते हैं, पूजा करते हैं, और साँपों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। लेकिन मेरे लिए Nagpanchami का असली मज़ा है दलहा पहाड़ के मेले में। यार, वो रंग-बिरंगी भीड़, दुकानों की चमक, मंदिर की घंटियाँ और दोस्तों के साथ हँसी-मज़ाक – ये सब मिलकर इस दिन को मेरे लिए खास बना देते हैं। अगर तुम इस त्योहार की गहराई को और समझना चाहते हो, तो विकिपीडिया पर Nagpanchami के बारे में एक शानदार लेख पढ़ सकते हो।

Nagpanchami में दलहा पहाड़ का मेला  सदियों पुरानी परंपरा

चलो, अब तुम्हें ले चलता हूँ दलहा पहाड़, जो जांजगीर-चांपा जिले में बस्ती है। ये जगह मेरे लिए किसी तीर्थ से कम नहीं। हर साल Nagpanchami के दिन यहाँ हज़ारों लोग जुटते हैं। ये मेला कोई नई चीज़ नहीं है, भाई! सदियों से ये परंपरा चली आ रही है। कहते हैं कि यहाँ का नाग मंदिर बहुत प्राचीन है, और लोग मानते हैं कि यहाँ पूजा करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और परिवार की रक्षा करते हैं।

Nagpanchami story
Nagpanchami Mela, Dalha Pahad, Chhattisgarh

मेले में पहुँचते ही सबसे पहले जो चीज़ आँखों में समाती है, वो है वो रंग-बिरंगी भीड़। औरतें साड़ियों में, बच्चे खिलौनों के पीछे भागते हुए, और हम जैसे यार लोग बाइक पर सवार होकर मेले की धूल उड़ाते हुए। इस बार हम पाँचों दोस्त – मैं, भवानी, संजय, संतोष और अनिल – जांजगीर से बाइक लेकर सुबह-सुबह निकल पड़ेंगे। रास्ते में खेतों की हरियाली, ठंडी हवा और भवानी के बाइक पर गाने गाने का शौक – यार, वो मज़ा ही अलग है।

पिछले साल की बात बताऊँ? हम Nagpanchami 2024 मेले में पहुँचे तो संजय ने जिद पकड़ ली कि उसे मिट्टी का साँप खरीदना है। हम सब हँसते-हँसते लोटपोट हो गए, क्योंकि वो दुकानदार से बोला, “भैया, ये साँप जिंदा तो नहीं है ना?” दुकानदार भी मस्तमौला था, बोला, “नहीं भैया, ये मिट्टी का है, लेकिन पूजा में रखोगे तो नाग देवता का आशीर्वाद ज़रूर मिलेगा।” बस, फिर क्या था, हमने वो साँप खरीदा और मंदिर में चढ़ाया। ऐसे छोटे-छोटे पल इस मेले को मेरे लिए यादगार बना देते हैं।

Nagpanchami के दिन Dalha Pahad की चढ़ाई, मस्ती और थकान का मज़ेदार मेल

अब ज़रा Dalha Pahad की चढ़ाई की बात करते हैं, क्योंकि ये मेले का सबसे रोमांचक हिस्सा है। मंदिर तक पहुँचने के लिए खड़ी ऊंचाई पर चढ़ना पड़ता हैं, और यार, ये कोई आसान काम नहीं है! लेकिन मजाल है कि हम दोस्तों का जोश कम हो। हर साल हम लोग बाइक पार्क करके, पानी की बोतल और कुछ स्नैक्स लेकर चढ़ाई शुरू करते हैं। भवानी तो शुरू में ही हाँफने लगता है और बोलता है, “यार, अगले साल मैं जिम जॉइन करूँगा!” और हम सब उसकी टांग खींचते हैं।

पिछले साल Nagpanchami 2024 में संतोष ने बीच रास्ते में एक पेड़ के नीचे बैठकर ड्रामेबाज़ी शुरू कर दी थी – “बस, अब मैं नहीं चढ़ सकता!” लेकिन फिर अनिल ने उसे एक चॉकलेट दी, और वो फिर से चढ़ने को तैयार हो गया। रास्ते में लोग गाते-बजाते, नाग देवता के जयकारे लगाते चढ़ते हैं, जिससे माहौल और भी ज़िंदादिल हो जाता है। ऊपर पहुँचने पर जब जो दृश्य नजर आता हैं और ठंडी हवा चेहरे को छूती है, तो सारी थकान गायब हो जाती है। वो नज़ारा, वो शांति, और दोस्तों के साथ वो हँसी-मज़ाक – यार, ये अनुभव हर साल मुझे फिर से यहाँ खींच लाता है।

Nagpanchami की पूजा

अब थोड़ा सीरियस बात करते हैं। Nagpanchami सिर्फ मेले और मस्ती का त्योहार नहीं है, इसमें गहरी आस्था भी जुड़ी है। दलहा पहाड़ के मंदिर में लोग सुबह से ही लाइन लगाकर पूजा करने आते हैं। यहाँ का माहौल इतना पवित्र होता है कि मन अपने आप शांत हो जाता है। लोग दूध, फूल, चंदन और मिठाई चढ़ाते हैं। कुछ लोग तो अपने साथ मिट्टी या धातु के साँप भी लाते हैं, जिन्हें मंदिर में रखा जाता है।

मैंने अपने नाना से सुना था कि पुराने ज़माने में लोग साँपों को दूध पिलाने की कोशिश करते थे, लेकिन अब जागरूकता बढ़ने से लोग ऐसा कम करते हैं। और ये अच्छी बात है, क्योंकि साँपों के लिए दूध हानिकारक हो सकता है। अगर तुम भी Nagpanchami festival मनाने की सोच रहे हो, तो मेरा सलाह है कि प्रकृति का सम्मान करो, साँपों को नुकसान न पहुँचाओ। इसके बजाय, तुम किसी मंदिर में जाकर पूजा कर सकते हो या अपने घर में ही नाग देवता की तस्वीर के सामने दीप जलाओ। इस पूजा की प्रक्रिया को और समझने के लिए livehindustan.com पर एक बढ़िया ऑर्टिकल है।

मेरे लिए ये पूजा बहुत खास है। पिछले साल मेले में जब मैंने मंदिर में माथा टेका, तो मुझे मेरी माँ की बात याद आई। वो हमेशा कहती थीं, “बेटा, प्रकृति का सम्मान करना कभी मत भूलना।” उस पल मेरे मन में एक अजीब-सी शांति थी। शायद यही इस त्योहार का जादू है, जो हमें प्रकृति और परंपराओं से जोड़े रखता है।

मेले की मस्ती, खाना, खिलौने और दोस्तों का हंगामा

अब थोड़ा मूड हल्का करते हैं, भाई! मेले का असली मज़ा तो उसकी दुकानों और खाने में है। दलहा पहाड़ के मेले में तुम्हें हर तरह की चीज़ मिलेगी – मिट्टी के खिलौने, रंग-बिरंगे कपड़े, चूड़ियाँ, और हाँ, वो मस्त-मस्त खाने की दुकानें। मेरे दोस्त अनिल को तो बस जलेबी की तलाश रहती है। पिछले साल वो एक दुकान पर रुक गया और बोला, “यार, ये जलेबी तो मेरे गाँव वाली जलेबी से भी स्वादिष्ट है!” हम सब हँस पड़े, क्योंकि अनिल हर मेले में यही डायलॉग मारता है।

मेले में एक खास चीज़ है – मिट्टी के साँप और नाग देवता की छोटी-छोटी मूर्तियाँ। ये इतनी खूबसूरत होती हैं कि तुम इन्हें देखते रह जाओ। अगर तुम Nagpanchami Mela में जाना चाहते हो, तो मेरी सलाह है कि कुछ पैसे बचाकर रखो, क्योंकि इन दुकानों से खाली हाथ लौटना मुश्किल है। मेले की और मस्ती के बारे में जानना हो तो patrika.com पर Nagpanchami के मेले का एक सुनहरा लेख पढ़ सकते हो।

और हाँ, मेले में बच्चों की मस्ती देखने लायक होती है। वो खिलौनों के पीछे भागते हैं, गुब्बारे खरीदते हैं, और कभी-कभी तो दुकानदारों से मोलभाव भी करते हैं। पिछले साल एक बच्चे ने मेरे सामने दुकानदार से कहा, “अंकल, ये गुब्बारा 20 रुपये में दे दो, मेरे पास बस इतने ही पैसे हैं।” दुकानदार ने हँसकर उसे गुब्बारा दे दिया। ऐसे पल मेले को और खास बना देते हैं।

बाइक की सैर और दोस्तों के साथ एडवेंचर

अब जरा हमारी बाइक यात्रा की बात करते हैं। जांजगीर से दलहा पहाड़ का रास्ता करीब 30 किलोमीटर का है, और यार, ये सफर अपने आप में एक एडवेंचर है। सुबह-सुबह जब हम बाइक पर निकलते हैं, तो ठंडी हवा चेहरे पर लगती है, और रास्ते में खेतों की हरियाली मन को तरोताज़ा कर देती है। भवानी को गाने गाने का शौक है, तो वो बाइक पर ही “सावन में लग गई आग” गाने लगता है। संजय उसे चिढ़ाता है, “भाई, तू गाना छोड़, बाइक संभाल!” और फिर हम सब ठहाके मारकर हँसते हैं। आप मेरे दोस्तों के साथ ऐसे ही और एक्साइटिंग बाइक यात्रा के बारे में जान सकते हो।

पिछले साल रास्ते में हमारा एक टायर पंक्चर हो गया था। हम सब रास्ते में रुक गए, और संतोष ने अपनी मकेनिक वाली कला दिखाई। आधे घंटे में टायर ठीक हो गया, और हम फिर से निकल पड़े। वो पल आज भी याद आता है, क्योंकि उस दिन हमने रास्ते में एक ढाबे पर चाय पी और खूब सारी बातें की। दोस्तों के साथ ऐसे लम्हे ही तो जिंदगी को खूबसूरत बनाते हैं, है ना? 

Nagpanchami और प्रकृति का रिश्ता

अब थोड़ा गहरी बात करते हैं। Nagpanchami सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं है, ये प्रकृति से हमारे रिश्ते को भी दर्शाता है। साँप हमारे पर्यावरण का एक अहम हिस्सा हैं। वो खेतों में चूहों को खाकर फसलों को बचाते हैं। लेकिन आजकल जंगल कट रहे हैं, साँपों का घर छिन रहा है, और लोग अक्सर डर के मारे उन्हें मार देते हैं। ये त्योहार हमें याद दिलाता है कि हमें साँपों का सम्मान करना चाहिए, न कि उनसे डरना।

मैंने एक बार एक बुजुर्ग से सुना था कि पुराने ज़माने में लोग अपने खेतों में साँपों के लिए छोटे-छोटे बिल बनाते थे, ताकि वो वहाँ रह सकें। आज के समय में हमें भी कुछ ऐसा करना चाहिए। अगर तुम अपने गाँव या शहर में Nagpanchami मना रहे हो, तो कोशिश करो कि साँपों को नुकसान न पहुँचे। इसके बजाय, तुम उनके लिए जागरूकता फैला सकते हो। साँपों और पर्यावरण के बारे में और जानने के लिए wwfindia.org पर कुछ अच्छी जानकारी मिल सकती है।

मेरे दोस्त संतोष को साँपों से बहुत डर लगता है। पिछले साल मेले में एक साँप दिख गया था, और वो चिल्लाने लगा, “यार, ये तो असली साँप है!” हम सब हँस पड़े, क्योंकि वो एक मिट्टी का साँप था। लेकिन बाद में हमने उसे समझाया कि साँप भी उतने ही ज़रूरी हैं, जितने हम। और यकीन मानो, इस साल वो भी पूजा में शामिल होने को तैयार है।

मेले में क्या करें, क्या न करें?

अगर तुम पहली बार Nagpanchami Mela में जा रहे हो, तो मेरे कुछ टिप्स तुम्हारे काम आएँगे। सबसे पहले तो, अपने साथ पानी की बोतल और कुछ स्नैक्स रखो, क्योंकि मेले में भीड़ बहुत होती है, और तुम्हें खाने-पीने की चीज़ें ढूँढने में समय लग सकता है। दूसरा, अपने जूते मज़बूत पहनो, क्योंकि दलहा पहाड़ पर चढ़ाई करनी पड़ती है। और हाँ, अपने मोबाइल की बैटरी फुल चार्ज रखो, क्योंकि मेले में फोटो खींचने का मज़ा ही अलग है।

एक ज़रूरी बात – मेले में साँपों के साथ छेड़छाड़ बिल्कुल न करो। कुछ लोग साँपों को पकड़कर दिखाने की कोशिश करते हैं, जो गलत है। हमें उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। और हाँ, अगर तुम मंदिर में पूजा करने जा रहे हो, तो थोड़ा धैर्य रखो, क्योंकि लाइन लंबी हो सकती है।

Nagpanchami और मेरी निजी कहानी

अब थोड़ा पर्सनल हो जाता हूँ। Nagpanchami मेरे लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि मेरे बचपन की यादों का खजाना है। जब मैं छोटा था, मेरे पापा मुझे अपने कंधों पर बिठाकर दलहा पहाड़ ले जाते थे। वो मुझे मंदिर की कहानियाँ सुनाते, और मैं मुँह फाड़कर सुनता। एक बार मैंने उनसे पूछा, “पापा, साँप तो डरावने होते हैं, फिर हम उनकी पूजा क्यों करते हैं?” पापा ने हँसकर कहा, “बेटा, जो डरावना लगता है, वो भी प्रकृति का हिस्सा है। हमें हर जीव का सम्मान करना चाहिए।”

उस दिन की बात आज भी मेरे यादों में बसी है। शायद यही वजह है कि मैं हर साल अपने दोस्तों के साथ इस मेले में जाता हूँ। ये मेरे लिए सिर्फ मस्ती का मौका नहीं, बल्कि मेरे पापा की उन बातों को याद करने का तरीका भी है। इस बार जब मैं मंदिर में माथा टेकूँगा, तो पापा को ज़रूर याद करूँगा।

Nagpanchami का जादू

तो दोस्तों, ये था मेरा Nagpanchami की कहानी, जिसमें मेला, मस्ती, आस्था और दोस्तों का साथ सब शामिल है। दलहा पहाड़ का मेला मेरे लिए सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि मेरे बचपन, मेरे दोस्तों और मेरी परंपराओं का हिस्सा है। इस बार जब मैं भवानी, संजय, संतोष और अनिल के साथ बाइक पर निकलूँगा, तो मेरे मन में वही उत्साह होगा, जो बचपन में पापा के कंधों पर बैठकर मेले जाने में था।

अगर तुम भी Nagpanchami मनाने की सोच रहे हो, तो अपने आसपास के नाग मंदिर में जाओ, पूजा करो, और प्रकृति का सम्मान करो। और हाँ, अगर कभी जांजगीर आओ, तो दलहा पहाड़ के मेले में ज़रूर शामिल हो। यकीन मानो, ये अनुभव तुम्हारी जिंदगी को और खूबसूरत बना देगा।

तो, क्या तुम इस साल Nagpanchami 2025 मना रहे हो? अपने प्लान्स कमेंट में ज़रूर बताओ, और अगर मेरा ये कहानी पसंद आए, तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करो। चलता हूँ, भाई! अगली बार फिर मिलेंगे, किसी नई यात्रा की कहानी के साथ।

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