Jagannath puri Tour : पुरी की गलियों, समंदर की लहरों और भगवान की दर्शन

Jagannath Puri Tour : पुरी की गलियों, समंदर की लहरों, और भगवान जगन्नाथ मंदिर की सैर

नमस्ते दोस्तों, आप सब कैसे हैं? मैं हूं आपका दोस्त अमित, खूबसूरत भारत में आज मैं आपको अपनी एक ऐसी यात्रा की कहानी सुनाने जा रहा हूं, जो मेरे दिल को छू गई। ये कहानी है मेरी Jagannath Puri की यात्रा की, जहां मैं अपने दो यारों, नवीन और दया, के साथ गया था। ये ट्रिप इतनी खास थी कि मैं इसे Khubsurat Bharat के लिए एक ब्लॉगपोस्ट में लिखने बैठ गया। तो चलिए, तैयार हो जाइए, क्योंकि मैं आपको पुरी की गलियों, समंदर की लहरों, और भगवान जगन्नाथ के मंदिर की वो वाइब्स बताने वाला हूं, जो मैंने खुद महसूस की।

Janjgir से Jagannath Puri : हमारी ट्रेन यात्रा की शुरुआत

बात पिछले साल की है, जब मैं, नवीन और दया ने सोचा कि यार, कहीं घूमने चलते हैं। जांजगीर में बैठे-बैठे बोरियत हो रहे थे। नवीन ने कहा, “भाई, कहीं समंदर के किनारे चलते हैं, थोड़ा बीच का मजा लेंगे।” दया ने तपाक से बोला, “पुरी चलो! Jagannath Puri का मंदिर देखेंगे, समंदर की लहरों में कूदेंगे, और खाना भी तो ओडिशा का फेमस है!” बस, फिर क्या था, हमने टिकट बुक किए और निकल पड़े Puri travel के लिए।

हमारी ट्रेन थी जांजगीर से भुवनेश्वर तक, और वहां से पुरी बस से। ट्रेन में हम तीनों ने खूब मस्ती की। नवीन ने अपने बैग से चिप्स निकाले, दया ने पूरी बनाकर लाया था, और मैं? मैं तो बस गाने गुनगुनाता रहा। ट्रेन की खिड़की से बाहर का नजारा देखते हुए, हरे-भरे खेत और गांवों को पार करते हुए, मन में एक अलग ही उत्साह था। पुरी का नाम सुनते ही मेरे दिमाग में भगवान जगन्नाथ की वो बड़ी-बड़ी आंखों वाली मूर्ति घूम रही थी।

Jagannath Puri पहुंचते ही: समंदर की सैर और मंदिर की बात

पुरी पहुंचे तो सुबह के 6 बज रहे थे। स्टेशन से निकलते ही वो नमकीन हवा, समंदर की खुशबू, और चारों तरफ की हलचल ने हमें तरोताजा कर दिया। हमने पहले एक धर्मशाला में कमरा बुक किया, जो मंदिर के पास थी। Puri Jagannath Temple से बस 5 मिनट की दूरी पर था हमारा ठिकाना। धर्मशाला के बारे में टिप्स चाहिए तो Puri Dharamshala Guide देख सकते हैं।

Jagannath Temple Puri

पहला दिन हमने समंदर के किनारे बिताया। Puri Beach की लहरें देखकर नवीन तो बच्चे की तरह कूदने लगा। “यार, ये लहरें तो बिल्कुल फिल्मी हैं!” उसने चिल्लाकर कहा। दया और मैं हंसते हुए उसे देख रहे थे। हमने वहां समंदर में पैर डुबोए, बालू से खेला, और कुछ देर तक बस लहरों को देखते रहे। पुरी का समुद्र तट इतना खूबसूरत है कि आप घंटों बैठकर बस उसे निहार सकते हैं। अगर आप Odisha tourism की लिस्ट में पुरी को शामिल कर रहे हैं, तो समुद्र तट को मिस मत कीजिएगा।

शाम को हमने सोचा, चलो, मंदिर के दर्शन कर लेते हैं। Jagannath Puri Temple की भव्यता देखकर तो हम तीनों के मुंह खुले रह गए। मंदिर का वो विशाल शिखर, चारों तरफ की नक्काशी, और भक्तों की भीड़ – सब कुछ ऐसा था जैसे समय रुक गया हो। मंदिर के बारे में और जानना हो तो Jagannath Temple History  चेक कर सकते हैं।

Jagannath Puri Temple

Jagannath Puri Temple के बारे में तो आपने सुना ही होगा। ये हिंदुओं के चार धामों में से एक है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र, और बहन सुभद्रा की लकड़ी की मूर्तियां हैं। ये मूर्तियां इतनी अनोखी हैं कि इनके बड़े-बड़े नेत्र और बिना हाथ-पैर का रूप देखकर मन में एक अलग ही भावना जागती है। कहते हैं, इन मूर्तियों को हर 12 या 19 साल में बदल दिया जाता है, जिसे Nabakalebara कहते हैं। ये रिवाज अपने आप में अनोखा है।

हम तीनों ने मंदिर में प्रवेश किया। ध्यान रहे, मंदिर में केवल हिंदुओं को ही प्रवेश मिलता है, और मोबाइल, कैमरा, या चमड़े की चीजें अंदर ले जाना मना है। हमने अपने जूते-चप्पल बाहर रखे और लाइन में लग गए। भीड़ थी, लेकिन उस भीड़ में भी एक अजीब सा सुकून था। जैसे ही हम गर्भगृह के पास पहुंचे, भगवान जगन्नाथ की उन विशाल आंखों को देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। नवीन ने धीरे से कहा, “यार, ऐसा लग रहा है जैसे वो हमें देख रहे हैं।” दया ने हंसते हुए बोला, “हां भाई, शायद कह रहे हों, ‘अच्छा, तुम लोग जांजगीर से आए हो!”

मंदिर के अंदर का माहौल इतना पवित्र था कि कुछ देर के लिए हमारी सारी मस्ती गायब हो गई। हमने दर्शन किए, माथा टेका, और बाहर आकर Mahaprasad लिया। वो प्रसाद, जो मंदिर की रसोई में बनता है, सचमुच स्वादिष्ट था। कहते हैं, ये प्रसाद 56 तरह के व्यंजनों से बनता है। अगर आप पुरी जाएं, तो Mahaprasad जरूर चखें। इसके बारे में और जानना हो तो Jagannath Puri Prasad देख लीजिए।

रथ यात्रा

हमारी ट्रिप का सबसे खास हिस्सा था Rath Yatra देखना। हम खुशकिस्मत थे कि हमारी यात्रा का समय रथ यात्रा के साथ मेल खा गया। Rath Yatra हर साल आषाढ़ मास में होती है, जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, और सुभद्रा को विशाल रथों में बिठाकर गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाता है। ये रथ इतने भव्य होते हैं कि देखकर आंखें फटी रह जाएं। भगवान जगन्नाथ का रथ, जिसे Nandighosa कहते हैं, 45 फीट ऊंचा होता है।

Jagannath Temple Puri

 

हमने सुबह-सुबह रथ यात्रा की भीड़ में जगह बनाई। लाखों लोग वहां थे, लेकिन उस भीड़ में भी एक अजीब सी एकता थी। हर कोई “जय जगन्नाथ!” चिल्ला रहा था। नवीन ने मुझसे कहा, “भाई, ये तो ऐसा लग रहा है जैसे पूरा शहर एक साथ उत्सव मना रहा हो।” दया ने अपनी टिप्पणी दी, “हां, और ये रथ खींचने का मजा तो कुछ और ही है!” हमने भी थोड़ा रथ खींचने की कोशिश की, और यकीन मानिए, वो अनुभव जिंदगी भर याद रहेगा। रथ यात्रा के बारे में और जानना हो तो Rath Yatra 2025 पर एक नजर डाल सकते हैं।

पुरी की गलियों में खाना और मस्ती

पुरी सिर्फ मंदिर और समुद्र तट तक सीमित नहीं है। यहां की गलियां, खाना, और बाजार भी उतने ही मजेदार हैं। हमने एक दिन Puri Beach Market में बिताया, जहां दया ने बार्गेनिंग में अपनी कला दिखाई। उसने एक दुकानदार से इतनी मोलभाव की कि हमें शंख और मोतियों की माला आधी कीमत में मिल गई। मैं और नवीन तो बस हंसते रहे।

खाने की बात करें, तो पुरी में Odisha cuisine का मजा कुछ और ही है। हमने एक छोटी सी दुकान में Dahi Bara Aloo Dum खाया, जो इतना स्वादिष्ट था कि दया ने दो प्लेट मंगवा ली। फिर हमने Chhena Poda ट्राई किया, जो ओडिशा का फेमस डेजर्ट है। नवीन ने मजाक में कहा, “यार, अगर रोज ऐसा खाना मिले, तो मैं पुरी में ही बस जाऊं!” Odisha food के बारे में और जानना हो तो Odisha Cuisine Guide चेक करें।

पुरी के आसपास की जगहें

पुरी में मंदिर और बीच के अलावा भी बहुत कुछ है। हमने एक दिन Konark Sun Temple देखने का प्लान बनाया, जो पुरी से करीब 35 किलोमीटर दूर है। ये मंदिर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है और इसका सूर्य रथ जैसा डिजाइन देखकर हम दंग रह गए। हमारे गाइड ने बताया कि इसके पहिए असल में सूर्य की किरणों से समय बताते हैं। नवीन ने फोटो खींचते हुए कहा, “यार, ये तो इंजीनियरिंग का कमाल है!”

हमने Chilika Lake भी देखा, जो एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। वहां बोटिंग करते हुए हमने डॉल्फिन देखीं, और दया तो इतना खुश हुआ कि चिल्लाने लगा, “देखो भाई, डॉल्फिन!” अगर आप Puri tourist places की लिस्ट बनाएं, तो कोणार्क और चिलिका को जरूर शामिल करें। इनके बारे में और जानकारी के लिए Puri Nearby Attractions देख सकते हैं।

Jagannath puri का वो खूबसूरत पल

पुरी की यात्रा मेरे लिए सिर्फ घूमना-फिरना नहीं थी। एक शाम, जब हम समुद्र तट पर बैठे थे, मैंने अपनी दादी मां को याद किया। वो हमेशा कहती थीं कि Jagannath Puri के दर्शन करने से मन को सुकून मिलता है। उस पल, समंदर की लहरों को देखते हुए, मुझे सचमुच वो सुकून महसूस हुआ। मैंने नवीन और दया से अपनी मां की बात शेयर की, और हम तीनों कुछ देर तक चुपचाप लहरों को देखते रहे।

दया ने फिर माहौल हल्का करते हुए कहा, “चल भाई, अब कुछ खाते हैं, नहीं तो ये इमोशनल सीन फिल्म में बदल जाएगा!” हम हंस पड़े, लेकिन वो पल मेरे दिल में हमेशा के लिए बस गया।

पुरी जाने की प्लानिंग के लिए कुछ टिप्स

अगर आप Puri travel guide ढूंढ रहे हैं, तो मेरे कुछ टिप्स आपके काम आएंगे:

  • कब जाएं: Jagannath Puri जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च है, जब मौसम सुहाना रहता है। अगर Rath Yatra देखना हो, तो जून-जुलाई में प्लान करें।
  • कहां ठहरें: मंदिर के पास धर्मशालाएं सस्ती और अच्छी हैं। ऑनलाइन बुकिंग के लिए Jagannath Temple Website देखें।
  • क्या खाएं: Mahaprasad, Dahi Bara Aloo Dum, और Chhena Poda जरूर ट्राई करें।
  • क्या करें: Puri Beach, Konark Sun Temple, और Chilika Lake को अपनी लिस्ट में रखें।
  • ध्यान रखें: मंदिर में प्रवेश के नियम सख्त हैं, तो नियमों का पालन करें।
  • यात्रा कैसे शुरू करें : एक अनोखी पर्यटन मार्गदर्शिका

पुरी का जादू

दोस्तों, Jagannath Puri की ये यात्रा मेरे लिए एक ऐसा अनुभव थी, जो मैं शब्दों में पूरी तरह बयां नहीं कर सकता। भगवान जगन्नाथ के दर्शन, समुद्र की लहरें, रथ यात्रा की धूम, और अपने यारों नवीन और दया के साथ वो मस्ती – सब कुछ मेरे दिल में बस्ता है। अगर आप पुरी जाने का सोच रहे हैं, तो बस बैग पैक कर लीजिए और निकल पड़िए। ये जगह आपको निराश नहीं करेगी।

तो, क्या आपने कभी Puri travel किया है? या कोई ऐसी जगह, जो आपके दिल के करीब हो? कमेंट में बताइए, और अगर ये पोस्ट पसंद आई, तो Khubsurat Bharat पर शेयर जरूर करें। जय जगन्नाथ!

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