Raigarh City : जहाँ लोहा भी पिघल जाए बाबा की शांति में

Raigarh City Chhattisgarh : एक यादगार सफर

हाय दोस्तों, मैं हूं अमित, खूबसूरत भारत का वो घुमक्कड़ जो हर जगह की छोटी-मोटी कहानियां आपके साथ शेयर करता रहता हूं। आज बात करूंगा छत्तीसगढ़ की Raigarh City की, जो ना तो कोई बड़ा शहर है ना ही टूरिस्ट हब जैसी चकाचौंध वाली जगह, लेकिन यार, इसमें वो असली देसी फ्लेवर है जो घूमने वाले को रोक ही ना दे। मैं तो कई बार यहां आया हूं, कभी काम से कभी बस यूहीं, लेकिन इस बार स्पेशल था। मेरे दोस्त नवीन के साथ बाइक पर जांजगीर से निकले थे, वो भी पुरानी वाली रॉयल एनफील्ड पर। रास्ते में हवा खाने का मजा, बीच-बीच में चाय की टपरी पर रुकना, और वो सड़कें जो कभी सीधी कभी टेढ़ी – बस, ट्रिप शुरू होते ही लगा जैसे पुराने दिन लौट आए।

Raigarh city Tour

देखो भाई, Raigarh city Chhattisgarh को अगर सर्च करोगे तो मिलेगा एक इंडस्ट्रियल टाउन का नाम, लेकिन असल में ये तो कल्चर और नेचर का मिला-जुला रूप है। यहां जिंदल स्टील प्लांट जैसी बड़ी फैक्ट्री है जो एक्नॉमी को चला रही है, तो साथ ही राम झरना जैसे नेचुरल स्पॉट भी हैं। जहां जाकर मन शांत हो जाता है। हमने तो पूरा रायगढ़ सिटी को एक्सप्लोर किया – मंदिरों से लेकर गार्डन्स तक, और हां, वो सत्यनारायण बाबा धाम भी, जहां जाकर लगा जैसे कोई पुराना दोस्त मिल गया। मैंने इस ट्रिप का वीडियो भी बनाया है, यूट्यूब पर डाल दूंगा कभी, लेकिन तब तक ये ब्लॉग पढ़ो, जैसे मैं खुद बता रहा हूं। चलो, शुरू से बताता हूं, स्टेप बाय स्टेप, क्योंकि दोस्तों, घूमना तो बस जगह देखना नहीं, रास्ते की कहानियां भी तो हैं ना। और हां सत्यनारायण बाबा का मै पहले भी दर्शन कर चुका हूं आप भी देख सकते हो –

Satyanarayan Baba Raigarh : जीता जगता एक इंसान बन गया भगवान

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Raigarh city Chhattisgarh एक नजर में

दोस्तों, Raigarh city को अगर किसी एक लाइन में बयां करूं तो कहूंगा ये वो जगह है जहां इंडस्ट्री की चिंगारियां और नेचर की हरीतिमा साथ-साथ नाचती हैं, ना कोई महानगर की भागदौड़, ना गांव की सादगी की कमी – बस एक परफेक्ट ब्लेंड जो घुमक्कड़ को रोक ही ना दे। मैं नवीन के साथ जब जांजगीर से बाइक पर पहुंचा था, तो शहर की एंट्री पर ही लगा जैसे कोई पुराना दोस्त मुस्कुरा रहा हो, साफ सड़कें, कम ट्रैफिक, और वो लोकल बाजार जहां चाय की दुकान पर अंकल पूछते हैं ‘कहां से आए हो बेटा?’। हां भाई थोड़ा धूल है लेकिन इंडस्ट्रियल एरिया में हैं।

Raigarh City Chhattisgarh

रायगढ़ तो 1894 में ब्रिटिश काल में राजधानी बना था, लेकिन आजादी के बाद भी अपना राजसी ठाठ बरकरार रखा, पॉपुलेशन करीब 3 लाख, लेकिन फील ऐसा कि सब जान-पहचान के। यहां Jindal Steel Plant जैसी इंडस्ट्रियल हब है जो रोजगार देती है, तो साथ ही केलो रिवर की ठंडक जो समर में राहत बांटती है। नवीन ने होटल चेक-इन करते हुए कहा, “अमित, ये शहर तो छोटा लगता है लेकिन सॉर्टा अमेजिंग, जैसे कोई अनडिस्कवर्ड ट्रेजर!” हम हंसे जब शाम को सिटी सेंटर घूमे, स्ट्रीट फूड स्टॉल्स पर रुके – एक प्लेट समोसा और चाय, 30 रुपये में, लेकिन स्वाद तो लाखों का। मुझे तो यहां की शामें याद रह गईं, जब पार्क में बैठे परिवार देखे, सोचा कितनी सादगी में खुशी बंटी रहती है।

best places to visit in Raigarh city Chhattisgarh की लिस्ट में शहर खुद ही टॉप पर है, क्योंकि यहां घूमना मतलब लाइफ के हर कलर को छूना। अगर आप भी आओ तो छत्तीसगढ़ टूरिज्म की साइट पर देख लो, वहां मैप्स भी हैं जो प्लानिंग आसान कर देंगे। हम तो चार दिन रुके, लेकिन लगा महीना बीत गया, क्योंकि रायगढ़ सिटी छत्तीसगढ़ ने सिखाया कि साइज छोटा हो तो क्या, दिल बड़ा हो तो दुनिया घूम आएगी। अगले सेक्शन में बताता हूं लोकल फूड की स्टोरीज, लेकिन तब तक सोचो, तुम्हारा नेक्स्ट स्टॉप रायगढ़ ही क्यों ना हो?

बाइक ट्रिप फ्रॉम जांजगीर टू रायगढ़: वो रोड जो दोस्ती को और मजबूत कर दे

सबसे पहले तो बात कर लूं उस बाइक ट्रिप की, क्योंकि यार, बिना इसके Raigarh city की बात अधूरी है। जांजगीर से रायगढ़ का रूट लगभग 100 किलोमीटर का है, लेकिन हमने तो 4-5 घंटे लगा दिए। सुबह 7 बजे निकले, नवीन भाई ने कहा, “अमित, आज स्पीड नहीं, एंजॉयमेंट!” मैं हंस पड़ा, क्योंकि पिछली बार मैं अकेला गया था तो रेस लगाई थी, लेकिन इस बार दोस्त के साथ था तो रुक-रुक के चले। रूट है NH-49 पर, पहले जांजगीर से शक्ति होते हुए, फिर लखनपुर क्रॉसिंग तक। रास्ते में खेतों के बीच से गुजरते हुए वो हरी-भरी वादियां, पहाड़ों को गले लगाते, छत्तीसगढ़ की वो मिट्टी की खुशबू – वाह, क्या बात है।

लेकिन भाई, मजा तो तब आया जब बीच में बाइक का टायर पंक्चर हो गया। हम एक छोटे से गांव में रुके, वहां का मैकेनिक चाचा ने ठीक किया, लेकिन चाय पीते हुए उनकी कहानी सुनो – “बेटा, ये रोड पर ऐसे ही होता है, लेकिन यही तो लाइफ है, रुकना पड़ता है ताकि आगे का मजा दोगुना हो।” नवीन ने मजाक उड़ाया, “अमित, तू तो घुमक्कड़ है, लेकिन बाइक को बोझ समझ रहा है!” हम हंसे, और सोचा कि बेस्ट प्लेसेस टू विजिट इन रायगढ़ के बारे में सोचते हुए ये रुकावट भी तो एक स्टोरी बन गई। टिप्स दूंगा दोस्तों: अगर बाइक ट्रिप फ्रॉम जांजगीर टू रायगढ़ प्लान करो तो वाटर बोतल, स्नैक्स और एक्स्ट्रा टूल किट रखना। मौसम चेक कर लो, क्योंकि छत्तीसगढ़ में कभी बारिश कभी धूप। हम तो लकी थे, सूरज ने साथ दिया। रास्ते में एक ढाबे पर रुके, वहां की चाय और पोहा – सिंपल लेकिन दिल जीत लिया। अगर आप भी सोच रहे हो तो Google Maps पर रूट चेक कर लो, आसान है।

पहुंचे तो दोपहर के 12 बजे, रायगढ़ सिटी का वेलकम जैसे गर्मजोशी से हुआ। शहर छोटा सा है, लेकिन साफ-सुथरा, ट्रैफिक कम, और लोग इतने मिलनसार कि लगता है घर आ गए। हमने होटल चेक इन किया – एक बजट वाला, नाम था होटल प्रगति, जहां से पूरा सिटी व्यू मिलता है। शाम तक रेस्ट, फिर निकले एक्सप्लोर करने।

Raigarh का इंडस्ट्रियल साइड: जिंदल स्टील प्लांट विजिट – जहां आयरन हार्ट्स बनते हैं

अब आते हैं Raigarh city की असली ताकत पर, जो है जिंदल स्टील प्लांट रायगढ़। दोस्तों, ये तो वो जगह है जहां छत्तीसगढ़ की इकॉनमी की धड़कन सुनाई देती है। हमने अगले दिन सुबह ही यहां जाना डिसाइड किया, क्योंकि नवीन को इंडस्ट्री में इंटरेस्ट है, और मैं तो बस क्यूरियस था। प्लांट खरसिया रोड पर है, शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर। एंट्री के लिए परमिशन लेनी पड़ती है, लेकिन टूरिस्ट के तौर पर आसानी से मिल जाती है – बस आईडी प्रूफ और सिक्योरिटी चेक होता है।

वहां पहुंचे तो वाह, क्या सीन था! विशाल ब्लास्ट फर्नेस, क्रेनें हवा में लटकी हुईं, और वो लोहे की चिंगारी उड़ती हुई। वहां एक सर ने बताया कि ये JSPL का प्लांट है, जहां रोजाना हजारों टन स्टील बनता है। जिंदल स्टील की ऑफिशियल साइट पर और डिटेल्स देखो, वहां हिस्ट्री भी है कैसे ओ.पी. जिंदल ने इसे खड़ा किया। हमने टूर लिया, PPE किट पहनकर – हेलमेट, गॉगल्स, सब। मजा आया जब नवीन ने पूछा, “सर, ये स्टील ट्रेन ट्रैक्स बनाता है ना?” सर ने हंसकर कहा, “हां बेटा, ये वो रेलें हैं जो पूरे भारत को जोड़ती हैं।” मुझे तो इमोशनल हो गया, सोचा कि कितने हाथ लगते होंगे यहां, कितनी फैमिलीज चलती होंगी। लेकिन यार,  हमारी शर्ट पर धूल लग गई, नवीन बोला, “अमित, अब तू स्टील मैन लग रहा है, सुपरहीरो!” हम हंसे, लेकिन सीरियसली, ये प्लांट विजिट रायगढ़ को समझने के लिए जरूरी है। अगर आप इंडस्ट्रियल टूर इन छत्तीसगढ़ सर्च करो तो ये टॉप पर आएगा।

प्लांट के आसपास का इलाका भी कमाल का है – ग्रीन एरिया, जहां वर्कर्स के लिए पार्क बने हैं। हमने लंच किया कैंटीन में, सिंपल दाल-चावल लेकिन स्वाद ऐसा कि घर का खाना याद आ गया। वापस शहर लौटते हुए सोचा, Raigarh सिर्फ नेचर नहीं, बल्कि प्रोग्रेस का भी सिंबल है।

स्पिरिचुअल जर्नी इन रायगढ़: सत्यनारायण बाबा धाम – जहां मन की बात सुनाई देती है

अब वो पार्ट जो सबसे इमोशनल था, Satyanarayan Baba Temple Raigarh। दोस्तों, ये कोसमनारा में है, शहर से कुछ किलोमीटर दूर। हम दूसरे दिन गए, सुबह-सुबह, क्योंकि नवीन ने कहा, “भाई, पहले भगवान, फिर घूमना-फिरना।” बाबा जी का धाम तो छत्तीसगढ़ का फेमस पिलग्रिमेज स्पॉट है। बाबा का जन्म 1984 में दुमरपाली गांव में हुआ था, और 1998 से वो खुले आसमान तले ध्यान करते हैं – गर्मी हो या सर्दी। बाबा धाम की ऑफिशियल वेबसाइट पर पूरी बायो पढ़ो, वहां फोटोज भी हैं जो दिल छू लेंगे। और मेरे बाबा दर्शन वाला एक्साइटिंग बाइक ट्रिप वाला पोस्ट भी पढ़ लेना

रास्ता जाते हुए हम गा रहे थे पुराने भजन, बाइक पर ही। पहुंचे तो क्राउड था, लेकिन शांति ऐसी कि लगा समय रुक गया। धाम में महामाया मंदिर और समलेश्वरी मंदिर भी हैं, जहां सूर्य की किरणें मां के चरणों को छूती हैं – वो सीन देखकर आंखें नम हो गईं। मैंने मन ही मन प्रार्थना की, परिवार के लिए, और नवीन ने कहा, “अमित, यहां आकर लगता है सारी टेंशन धुल गई।” हां भाई, पर्सनल स्टोरी बताऊं – पिछली बार मैं मामा के साथ आया था जब जॉब में प्रॉब्लम थी, और बाबा के दर्शन के बाद सब सेट हो गया। इस बार नवीन के साथ आया तो लगा जैसे दोस्ती का आशीर्वाद मिला। हमने प्रसाद लिया, लेकिन नवीन ने ज्यादा खा लिया, बोला “ये तो एनर्जी ड्रिंक है!” हम हंसे, लेकिन सीरियसली, अगर आप स्पिरिचुअल ट्रिप टू सत्यनारायण बाबा धाम रायगढ़ प्लान करो तो वीकेंड पर जाओ, क्राउड मैनेजेबल रहता है।

धाम के आसपास का नेचर भी कमाल – छोटे छोटे दुकान, पेड़ों की छांव। हमने घंटा भर बैठे, बातें कीं लाइफ की। वापस लौटते हुए लगा, Raigarh में आध्यात्मिकता का ऐसा कोना है जो भूल ना जाए।

बेस्ट प्लेसेस टू विजिट इन रायगढ़: मंदिर, गार्डन्स और नेचर स्पॉट्स – हर कोने में एक कहानी

चलो अब घुमाते हैं आपको रायगढ़ के बाकी हिस्सों में, क्योंकि दोस्तों, यहां सिर्फ दो-चार जगहें नहीं, हर गली में कुछ ना कुछ है। हमने तो चार दिनों में सब कवर किया। सबसे पहले राम झरना – ये तो रायगढ़ का जेम है। भूपदेवपुर में है, शहर से 18 किमी दूर। पानी का झरना, आसपास जंगल, और वो कूल ब्रिज – पिकनिक स्पॉट परफेक्ट। हम गए दोपहर में, नहाए भी थोड़ा, लेकिन नवीन फिसल गया, हंस-हंस के पेट दुख गया! ट्रिपएडवाइजर पर रिव्यूज चेक करो, सब यही कहते हैं कि बेस्ट नेचर एस्केप।

Raigarh City Chhattisgarh

मोती महल पैलेस रायगढ़

दोस्तों, Raigarh city घूमते हुए अगर एक जगह ऐसी है जो हिस्ट्री के पन्नों से सीधा निकलकर आ गई हो, तो वो है मोती Mahal palace Raigarh – वो पुराना महल जो मधुबन परा में बसा है, शहर के दिल में। मैं नवीन के साथ वहां पहुंचा, दोपहर की धूप में बाइक पार्क की और अंदर घुसे, तो वाह भाई, क्या बात है – खाली हॉल में हमारी ही आवाज गूंज रही थी, जैसे कोई पुरानी फिल्म का सीन चल रहा हो। दीवारें तो बताती हैं राजाओं के दिनों की कहानियां, आर्किटेक्चर इतना कमाल का कि नवीन बोला, “अमित, ये तो इंडियाना जोन्स वाला फील दे रहा, लेकिन बिना एडवेंचर के खतरे!” हम हंसे, लेकिन सीरियसली, अंदर खाली जगह देखकर थोड़ा इमोशनल भी हो गए, सोचा कितने राजा-रानियां यहां चले आते होंगे, आज सिर्फ इको और यादें बचीं। अगर हिस्ट्री लवर्स हो तो मिस ना करना, एंट्री फ्री है, बस घंटा-दो घंटा निकाल लो।

केलो डैम

सुबह की धुंध अभी छंटी भी न थी जब हम केलो डैम की ओर बढ़े, रायगढ़ के उस कोने में जहां नदी की लहरें डैम की दीवार से टकराकर जैसे कोई पुरानी लोरी गुनगुनाने लगती हैं। ये डैम, जो केलो गांव के पास बसा है, महज एक जलाशय नहीं बल्कि एक शांतिपूर्ण रिट्रीट है – चारों ओर हरी पहाड़ियां लिपटी हुईं, पानी इतना साफ कि नीचे की मछलियां मुस्कुराती नजर आती हैं, और अब तो 2025 में नाइट लाइट शो ने इसे रंगीन सपनों का ठिकाना बना दिया, जहां शाम ढलते ही लेजर की किरणें पानी पर नाचने लगती हैं।

नवीन ने किनारे पर पत्थर फेंकते हुए कहा था कि ये जगह बचपन की उन दोपहरों की याद दिलाती है जब हम नदी किनारे लेटे-लेटे बादलों के आकार गिनते थे, लेकिन यहां की हवा में कुछ और था – एक गहरी सुकून की सांस, जो शहर की हलचल भूलाने पर मजबूर कर देती। मैं घंटों बैठा रहा, बस देखता रहा कैसे सूरज पानी में डूबता है, और सोचा कि केलो डैम जैसी जगहें ही तो जीवन को सिखाती हैं धीमे चलना, रुकना, और फिर आगे बढ़ना। अगर कभी रायगढ़ घूमने जाओ तो इसे मिस मत करना, खासकर सर्दियों में जब ठंडी हवा चेहरे को सहलाती है।

टीपाखोल झील और वॉटरफॉल

यार दोस्तों, Raigarh में टीपाखोल लेक और वॉटरफॉल तो वो हिडन जेम है जो पहाड़ों के बीच बसा हुआ मिनी गोवा जैसा लगता है, शहर से महज 10-15 किलोमीटर दूर घघरघोड़ा रोड पर, जहां एक बड़ा सा जलाशय है जो बारिश में पहाड़ों से झरने की तरह पानी भरता रहता है और चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियां घेरे रहती हैं। हम दोपहर में निकले थे वहां, बाइक पर हवा खाते हुए पहुंचे तो वाह भाई, नीले पानी की चमक, बोटिंग का ऑप्शन, और वो शांत माहौल जहां सिर्फ पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देती है।

नवीन ने बोट में चढ़ते हुए मजाक उड़ाया, “अमित, ये तो गोवा का बीच है लेकिन बिना समुद्र के शोर के!” हम हंसे जब उसने पानी में पैर डालकर छपाक किया, लेकिन सीरियसली, मानसून में यहां का वॉटरफॉल वाला सीन इमोशनल कर देता है, पानी की कल-कल और वो ठंडक जो सारी थकान भुला देती है। best places to visit near Raigarh में टीपाखोल पिकनिक स्पॉट का सुपरस्टार है, खासकर शाम 3 बजे के बाद जब सनसेट की फोटोज कमाल की आती हैं, बोटिंग करो या बस किनारे बैठकर चाय पीयो। यूट्यूब पर ड्रोन वीडियो चेक कर लो, सब यही कहते हैं कि रायगढ़ में ये सबसे शांत और खूबसूरत जगह है। हम तो वहां से लौटते हुए वादा किया, नेक्स्ट मानसून में ग्रुप के साथ कैंपिंग करेंगे, क्योंकि टीपाखोल ने सिखाया कि असली नेचर की गोद यहीं मिलती है।

किशनपुर डैम

यार, Raigarh के पास किशनपुर डैम तो वो छिपी हुई जगह है जो लोकल्स की फेवरेट पिकनिक स्पॉट बनी हुई है, सी एंड डी कॉलोनी में बसा ये छोटा सा डैम जहां पानी की लहरें पहाड़ियों से टकराकर एक हल्का सा झरना सा बहता है, और शाम ढलते ही आसपास की हरीतिमा में डूब जाता है। हम शाम को वहां पहुंचे थे, बाइक पर हल्की धूल उड़ाते हुए, और जैसे ही किनारे पर रुके तो लगा जैसे शहर की टेंशन पानी में बह गई। नवीन ने पत्थर फेंककर वेव्स बनाईं, बोला “अमित, ये तो हमारा प्राइवेट स्विमिंग पूल है, लेकिन बिना क्लोरके!” हम हंसे जब उसने गीले होकर बाहर आया, लेकिन सच कहूं तो वो शांत माहौल इमोशनल कर गया, सोचा कितने फैमिलीज यहां आती होंगी, बच्चों के साथ चाय पीते हुए बातें करते।

best places to visit near Raigarh city में किशनपुर डैम सिंपल लेकिन रिफ्रेशिंग है, रेटिंग 4.4 की तो बताती ही है कि लोकल्स इसे प्यार करते हैं, जस्टडायल पर रिव्यूज चेक कर लो, सब यही कहते हैं कि वीकेंड पर आओ तो मजा दोगुना। हम तो लौटते हुए सोच रहे थे, नेक्स्ट टाइम ग्रिल लेकर बरबेक्यू करेंगे, क्योंकि किशनपुर ने याद दिलाया कि कभी-कभी छोटी जगहें ही सबसे बड़ी यादें बनाती हैं।

पचधारी वॉटर चेक डैम

दोस्तों, पचधारी वॉटर चेक डैम तो वो कूलिंग स्पॉट है जो केलो रिवर पर बसा हुआ है, जहां चेक डैम से गिरता पानी झरने जैसा बहता है और गर्मी की तपिश को भूल जाने का बहाना दे देता है, शहर से थोड़ा बाहर लेकिन रोड इतना आसान कि बाइक पर ही पहुंच जाओ। हम दोपहर को निकले, सूरज चढ़ा था लेकिन पानी की चमक देखते ही लगा जैसे एसी रूम में घुस आए – डैम के किनारे बैठे पत्थरों पर लेटे, पैर पानी में लटकाए, और वो पानी की ठंडक इमोशनल कर गई, सोचा ये डैम कितनी जिंदगियां सींचता होगा, गर्मियों में लोकल्स की राहत, हम जैसे ट्रैवलर्स की यादें। पचधारी वॉटर चेक डैम समर एस्केप का सुपरस्टार है, सब यही कहते हैं कि पिकनिक के लिए परफेक्ट, लेकिन सावधानी से जाओ। हम तो वहां से लौटते हुए वादा किया, नेक्स्ट समर में कैंपिंग करेंगे, क्योंकि पचधारी ने सिखाया कि असली कूलनेस प्रकृति की गोद में ही मिलती है।

पहाड़ मंदिर

दोस्तों, रायगढ़ का पहाड़ मंदिर तो वो ऊंचाई वाली आस्था का पर्वत है जो गजमार पहाड़ी पर बसा है, हनुमान जी का संकट मोचन बजरंग बली मंदिर जहां सीढ़ियां चढ़ते हुए लगता है जैसे हर कदम पर ताकत मिल रही हो, शहर से थोड़ा दूर लेकिन व्यू इतना मनमोहक कि नीचे रायगढ़ की लाइट्स चमकती दिखें। हम बाइक नीचे पार्क करके लंबी सीढ़ियां पार कीं, पसीना तो आया लेकिन नवीन ने हांफते हुए मजाक उड़ाया, “अमित, ये तो जिम की जगह परफेक्ट, लेकिन यहां वर्कआउट के बाद भगवान का आशीर्वाद फ्री!” हम हंसे जब टॉप पर पहुंचे तो हवा ने चेहरा सहलाया, और यहां से असली रायगढ़ का विव दिखता है, raigarh best places to visit में ये स्पिरिचुअल हाइक का किंग है, सब यही कहते हैं कि सूर्योदय पर आओ तो जिंदगी नई लगने लगती है। हम तो वहां से उतरते हुए वादा किया, नेक्स्ट टाइम दोस्तों का ग्रुप लेकर आएंगे, क्योंकि पहाड़ मंदिर ने सिखाया कि ऊंचाई पर चढ़ना आसान नहीं, लेकिन व्यू हर सांस को वर्थ बनाता है।

बूढ़ी माई मंदिर

यार, रायगढ़ की बूढ़ी माई मंदिर तो वो जगह है जो आस्था की जड़ों को छू जाती है, अग्रसेन कॉलोनी में बसा ये मंदिर कुलदेवी माता का ऐसा धाम है जहां पहुंचते ही लगता है जैसे कोई बुजुर्ग मां गले लगा रही हो, शांत वातावरण और दिव्य आभा में डूबे हुए। हम आखिरी शाम वहां गए, बाइक पर हल्की बारिश की फुहारों के बीच, और अंदर घुसते ही घंटियों की आवाज ने दिल को छू लिया – मंदिर का नवनिर्माण 2012 में उड़ीसा के कारीगरों ने किया था, दो-तीन साल लगे लेकिन नतीजा तो कमाल का, संगमरमर की चमक और मूर्ति की मुस्कान।

सोचा ये मंदिर भक्तों की हर मनोकामना सुनता होगा, जैसे मेरी मां की दुआएं। Raigarh best places में ये स्पिरिचुअल जेम है, जहां नवरात्रि में भीड़ उमड़ आती है, हम तो वहां से लौटते हुए वादा किया, नेक्स्ट फेस्टिवल में फैमिली संग आएंगे, क्योंकि बूढ़ी माई ने सिखाया कि जिंदगी की हर उम्र में मां का आशीर्वाद ही ताकत है।

फिर गार्डन्स की बात – इंदिरा गांधी पार्क शहर के बीच में है, जहां शाम को फैमिलीज घूमती हैं। हमने वहां बेंच पर बैठकर चाट खाई, लोकल वाली – तीखी लेकिन स्वादिष्ट। पार्क में फव्वारे, बच्चों के लिए स्विंग्स, और वो पुराने पेड़ जो शेड देते हैं। रायगढ़ के गार्डन्स इन छत्तीसगढ़ में ये टॉप है, क्योंकि यहां शांति है, शोर नहीं।

गोमर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी का भी जिक्र करूं – 60 किमी दूर, लेकिन अगर नेचर लवर हो तो मिस ना करना। हमने टाइम ना होने से स्किप किया, लेकिन अगली बार जरूर जाएंगे। वहां टाइगर्स, बर्ड्स – सब हैं। और केलो डैम, जहां बोटिंग कर सकते हो। रायगढ़ सिटी छत्तीसगढ़ के बेस्ट प्लेसेस टू विजिट इन लिस्ट में ये सब टॉप हैं।

लोकल कल्चर एंड फूड इन रायगढ़: देसी स्वाद जो दिल जीत लें

दोस्तों, जगहें तो ठीक है, लेकिन बिना फूड और कल्चर के घूमना अधूरा है। रायगढ़ में छत्तीसगढ़ी कल्चर जीवित है – लोक नृत्य जैसे सैला, पांडवनी की कहानियां। हमने एक शाम लोकल मार्केट में घूमे, जहां आर्टिस्ट्स स्ट्रीट पर परफॉर्म कर रहे थे। नवीन ने ट्राई किया डांस, मैंने वीडियो बनाया – हाहा, क्या सीन था!

फूड की तो बात ही अलग। चावल-दाल बेसिक है, लेकिन फरा (भाप में बनी रोटी) और ठेठरी – ट्राई करो तो भूल ना जाओ। हमने एक ढाबे पर खाया, नाम था सीजी कॉर्नर लेकिन देसी फूड सर्व करते थे। चिकन करी स्पाइसी, लेकिन होममेड जैसी। और चाय – हर कोने पर मिलेगी, गर्मागर्म। नवीन ने कहा, “अमित, ये फूड तो मां की याद दिला देता है।” हां भाई, दूर शहरों में रहने वाले के लिए यही तो कम्फर्ट है।

रायगढ़ ट्रिप की हंसी, आंसू और वो यादें जो हमेशा रहेंगी

अब कुछ पर्सनल शेयर करूं दोस्त, क्योंकि ब्लॉग तो सिर्फ फैक्ट्स नहीं, फीलिंग्स भी तो हैं। इस ट्रिप में एक रात हम पार्क में बैठे, स्टार्स देखते हुए बातें कीं – जॉब, फैमिली, ड्रीम्स। नवीन ने बताया अपनी स्ट्रगल, मैंने अपनी। लगा जैसे रायगढ़ ने हमें क्लोजर कर दिया। एक बार गलत रोड पर चले गए, GPS फेल, लेकिन लोकल अंकल ने गाइड किया, बोले “बेटा, यहां GPS दिल से चलता है!” हम हंसे, लेकिन सीरियसली, ये छोटी घटनाएं ट्रिप को स्पेशल बनाती हैं।

और सत्यनारायण बाबा के पास एक बुजुर्ग मिले, जिनकी कहानी सुनी – कैसे बाबा ने उनकी फैमिली को बचाया। सुनकर आंखें भर आईं। रायगढ़ सिटी छत्तीसगढ़ ने सिखाया कि लाइफ सिंपल है, बस रुककर देखो।

Raigarh city घूमने के ट्रैवल टिप्स: मेरे अनुभव से जो काम आएंगे

यार दोस्तों, Raigarh घूमने का प्लान बना रहे हो तो सुन लो मेरी तरफ से कुछ प्रैक्टिकल ट्रैवल टिप्स, क्योंकि मैं नवीन के साथ कई गलतियां करके सीखे हैं, ताकि तुम्हें वो झेलनी ना पड़े।

  • सबसे पहले टाइमिंग – बेस्ट सीजन अक्टूबर से मार्च तक, ठंडी हवा, साफ मौसम, और त्योहारों का मजा, गर्मी में मत जाना भाई, अप्रैल-जून में तो पसीना अलग लेवल का निकलेगा। हम नवंबर में गए थे, परफेक्ट था।
  • ट्रांसपोर्ट की बात करें तो रायगढ़ रेलवे स्टेशन अच्छा कनेक्टेड है, बिलासपुर से ट्रेन पकड़ लो या रायपुर से, लेकिन अगर बाइक या कार से आ रहे हो जैसे हम जांजगीर से आए, तो NH-49 या NH-130 रूट लो, रोड कंडीशन अच्छी है लेकिन स्पीड ब्रेकर पर ध्यान रखना। शहर के अंदर घूमने के लिए ऑटो या लोकल बस बेस्ट, या ओला-उबर भी चलता है, लेकिन बाइक रेंट कर लो अगर ग्रुप हो।
  • स्टे की टिप – बजट हो तो होटल प्रगति या होटल रॉयल पैलेस जैसे 1000-2000 रुपये वाले लो, क्लीन और सेंट्रल लोकेशन, लग्जरी चाहिए तो OP जिंदल कम्युनिटी सेंटर के गेस्ट हाउस ट्राई करो। हमने बजट वाला चुना, सिटी व्यू मिला।
  • खाने में लोकल ट्राई करो – फरा, ठेठरी, चिला जरूर, लेकिन स्ट्रीट फूड पर भरोसा करो पर क्लीन जगह से, हमने एक बार पेट खराब होने से बच गए क्योंकि पानी बोतल वाला ही पिया। पानी हमेशा बिसलेरी या लोकल फिल्टर्ड लो, बाहर का आइस मत खाना।
  • घूमने की टिप्स – सुबह जल्दी निकलो, खासकर मंदिरों और डैम के लिए, भीड़ कम रहेगी। सत्यनारायण बाबा धाम या पहाड़ मंदिर जाते हो तो आरामदायक जूते पहनो, सीढ़ियां हैं। जिंदल प्लांट विजिट के लिए पहले परमिशन ले लो, आईडी साथ रखो। राम झरना या पचधारी चेक डैम पर पानी में उतरना हो तो एक्स्ट्रा कपड़े रखो, और प्लास्टिक बैग ट्रैश के लिए – क्लीन रखो यार, प्रकृति का एहसान है। कैश साथ रखो, कुछ जगहों पर UPI नहीं चलता, ATM शहर में ढेर हैं।
  • सेफ्टी टिप – रात 10 बजे के बाद अकेले मत घूमो, हालांकि शहर सेफ है, लेकिन सावधानी अच्छी। लड़कियों के साथ हो तो ग्रुप में रहो। मोबाइल चार्जर, पावर बैंक, मेडिसिन किट मत भूलना। और हां, लोकल्स से बात करो – वो रास्ता बताते हैं, छिपी हुई जगहें दिखाते हैं। हमने एक अंकल से पता चला था पचधारी डैम का। बजट की बात करें तो 4 दिन का ट्रिप दो लोगों का 10-12 हजार में हो जाएगा – स्टे, खाना, पेट्रोल, एंट्री सब मिलाकर।

आखिरी टिप – वीडियो और फोटो बनाओ, लेकिन मोमेंट एंजॉय भी करो। हमने इतना वीडियो बनाया कि कुछ पल मिस हो गए। रायगढ़ सिटी छत्तीसगढ़ घूमने जाओ तो दिल खोलकर, क्योंकि ये जगह सिखाती है सादगी में ही असली मजा है। कोई डाउट हो तो कमेंट करो, मैं बताऊंगा। सेफ ट्रैवल्स भाई!

रायगढ़ कैसे पहुंचें: ट्रेन, बस, फ्लाइट या बाइक – हर तरीके की आसान गाइड

यार, Raigarh पहुंचना बिल्कुल आसान है, चाहे आप कहीं से भी आ रहे हो – ट्रेन हो, बस हो, फ्लाइट हो या अपनी बाइक/कार पर रोड ट्रिप। हम नवीन के साथ तो जांजगीर से बाइक पर आए थे, लेकिन मैं कई बार अलग-अलग तरीकों से भी गया हूं, तो सारी डिटेल बताता हूं ताकि तुम्हारा प्लान परफेक्ट बने।

  • सबसे पॉपुलर तरीका है ट्रेन – रायगढ़ रेलवे स्टेशन (कोड: RIG) बहुत अच्छा कनेक्टेड है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई से डायरेक्ट ट्रेनें आती हैं। जैसे हावड़ा-मुंबई गीतांजलि एक्सप्रेस, हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस, या बिलासपुर-रायगढ़ लोकल। रायपुर से तो हर घंटे ट्रेन मिल जाती है, सिर्फ 3-4 घंटे लगते हैं। स्टेशन शहर के बीचोंबीच है, बाहर निकलते ही ऑटो मिल जाएगा होटल तक। टिकट बुकिंग के लिए IRCTC की साइट चेक कर लो, अक्सर वेटिंग क्लियर हो जाती है।
  • बस से आना चाहो तो भी कोई दिक्कत नहीं – रायगढ़ बस स्टैंड पर छत्तीसगढ़ रोडवेज, प्राइवेट AC-स्लीपर बसें रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, भिलाई, दुर्ग से रोज चलती हैं। रायपुर से 5-6 घंटे, बिलासपुर से 3 घंटे। रेडबस या मेकमाईट्रिप पर ऑनलाइन बुक कर लो। हमने एक बार रात की बस ली थी, सुबह 6 बजे पहुंच गए, फ्रेश होकर सीधे घूमने निकल पड़े।
  • फ्लाइट का ऑप्शन – सबसे नजदीकी एयरपोर्ट स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर (RPR) है, करीब 230 किमी दूर। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता से डायरेक्ट फ्लाइट्स हैं। रायपुर पहुंचकर टैक्सी या बस पकड़ लो – प्रीपेड टैक्सी 4000-5000 रुपये लेगी, या शेयर्ड कैब 800-1000 पर पर्सन। अगर ग्रुप हो तो कार रेंट कर लो। दूसरा ऑप्शन झारसुगुड़ा एयरपोर्ट ओडिशा (140 किमी), वहां से भी टैक्सी मिल जाती है।
  • रोड से सेल्फ ड्राइव या बाइक ट्रिप – ये तो हमारा फेवरेट है! रायपुर से NH-53 पर 230 किमी, 5-6 घंटे। बिलासपुर से NH-49 पर सिर्फ 120 किमी। जांजगीर-चांपा से हम जैसे 100 किमी पर 4 घंटे में पहुंच गए। रोड कंडीशन ज्यादातर अच्छी है, लेकिन बारिश में सावधानी रखना। गूगल मैप्स पर “Raigarh Chhattisgarh” सर्च कर लो, बेस्ट रूट दिखा देगा। टोल करीब 400-500 रुपये लगेंगे। पेट्रोल पंप और ढाबे रास्ते में ढेर हैं।
  • शहर के अंदर घूमने के लिए – स्टेशन या बस स्टैंड से ऑटो 50-100 रुपये में होटल छोड़ देगा। लोकल घूमने को ऑटो, सिटी बस या ओला-उबर बुक कर लो। बाइक रेंट भी मिल जाती है 300-500 रुपये पर डे में।

आखिरी टिप – अडवांस बुकिंग कर लो, खासकर फेस्टिवल या वीकेंड पर। और हां, पहुंचते ही एक चाय पी लेना लोकल टपरी पर, ट्रिप का असली मजा वहीं से शुरू होता है। कोई कन्फ्यूजन हो तो कमेंट करो, मैं बताऊंगा।

 

Raigarh City Tour के लिए अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. Raigarh city Chhattisgarh घूमने के लिए कितने दिन काफी हैं?

अगर भाई सिर्फ शहर और आसपास की जगहें देखनी हैं तो 2 से 3 दिन काफी हैं, लेकिन अगर आप मेरी तरह आराम से, बाइक ट्रिप, बाबा धाम, डैम, झरना, और शाम की चाय वाली फीलिंग लेना चाहते हो तो 4 दिन परफेक्ट हैं। हम भी 4 दिन रुके थे और एक दिन एक्स्ट्रा रुकने का मन कर गया था।

2. रायगढ़ घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

मेरे एक्सपीरियंस से बोलूं तो अक्टूबर से मार्च रायगढ़ घूमने का बेस्ट टाइम है। ठंडी हवा, साफ मौसम और मंदिर-दर्शन में भी मजा आता है। अप्रैल–जून में गर्मी बहुत पड़ती है, और मानसून में झरने तो शानदार होते हैं लेकिन रास्ते फिसलन वाले हो जाते हैं।

3. Raigarh city Chhattisgarh में घूमने की सबसे फेमस जगह कौन सी है?

अगर एक नाम लेना पड़े तो सत्यनारायण बाबा धाम
इसके अलावा:

  • राम झरना
  • केलो डैम
  • मोती महल
  • पहाड़ मंदिर
  • टीपाखोल झील
    ये सब मिलकर रायगढ़ को स्पेशल बनाते हैं।

4. क्या रायगढ़ फैमिली के साथ घूमने के लिए सही जगह है?

बिल्कुल सही है भाई।
गार्डन्स, मंदिर, डैम, पिकनिक स्पॉट – सब फैमिली फ्रेंडली हैं।
बस इतना ध्यान रखना कि झरनों और डैम पर बच्चों के साथ जाएं तो सेफ्टी पहले रखें।

5. Raigarh city में कपल या दोस्तों के साथ जाना सही रहेगा?

हाँ, दोस्तों के साथ तो और भी मजा आता है, खासकर:

  • बाइक ट्रिप
  • टीपाखोल झील
  • केलो डैम
  • शाम का स्ट्रीट फूड
    कपल भी जा सकते हैं, बस भीड़-भाड़ से थोड़ा दूर शांत जगहें चुनें।

6. जांजगीर से रायगढ़ बाइक ट्रिप कैसी रहती है?

भाई, दिल खुश हो जाता है। लगभग 100 किलोमीटर का रूट है, रोड ठीक-ठाक है, बीच में गांव, खेत, ढाबे – सब मिलते हैं।
बस:

  • हेलमेट पहनना
  • पानी और स्नैक्स रखना
  • बारिश में सावधानी
    यादगार ट्रिप बन जाती है।

7. रायगढ़ में रहने के लिए बजट होटल मिल जाते हैं क्या?

हाँ, आराम से मिल जाते हैं।
₹1000–₹2000 में अच्छे, साफ होटल मिल जाते हैं जैसे:

  • होटल प्रगति
  • होटल रॉयल पैलेस
    अगर थोड़ा अच्छा चाहिए तो गेस्ट हाउस भी ऑप्शन है।

8. Raigarh city Chhattisgarh का लोकल खाना क्या ट्राय करना चाहिए?

अगर रायगढ़ आकर ये नहीं खाया तो कुछ मिस कर दिया:

  • फरा
  • ठेठरी
  • चिला
  • देसी दाल-चावल
  • लोकल चाय
    सिंपल खाना है, लेकिन दिल से जुड़ जाता है।

9. क्या जिंदल स्टील प्लांट घूम सकते हैं?

हाँ, लेकिन पहले परमिशन लेनी पड़ती है
आईडी प्रूफ जरूरी है और सिक्योरिटी नियम फॉलो करने होते हैं।
अगर इंडस्ट्री में इंटरेस्ट है तो ये विजिट काफी इंटरेस्टिंग लगेगी।

10. रायगढ़ से आसपास कौन-कौन सी जगहें घूमी जा सकती हैं?

अगर एक-दो दिन एक्स्ट्रा हों तो:

  • राम झरना
  • गोमर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी
  • पचधारी चेक डैम
  • किशनपुर डैम
    सब 20–60 किमी के अंदर हैं।

11. क्या रायगढ़ शहर सुरक्षित है?

मेरे एक्सपीरियंस में तो काफी सेफ है।
लोकल लोग मददगार हैं, लेकिन:

  • रात में ज्यादा लेट अकेले न घूमो
  • झरनों में सावधानी रखो
  • कैश और मोबाइल सुरक्षित रखो
    बस इतना ध्यान रखो।

12. Raigarh city Chhattisgarh घूमने का कुल बजट कितना आएगा?

अगर दो लोग 3–4 दिन जाएं तो:

  • होटल
  • खाना
  • पेट्रोल / लोकल ट्रैवल
  • एंट्री
    सब मिलाकर ₹10,000–₹12,000 में आराम से ट्रिप हो जाएगी।

13. क्या रायगढ़ पहली बार छत्तीसगढ़ घूमने वालों के लिए सही है?

बिल्कुल सही है।
ये शहर छत्तीसगढ़ की असली झलक दिखाता है – ना ज्यादा भीड़, ना ज्यादा बनावट, बस सादगी, अपनापन और सुकून

14. रायगढ़ में सबसे खास चीज क्या लगी?

मेरे लिए:

  • लोगों की सादगी
  • सत्यनारायण बाबा धाम की शांति
  • शाम की चाय
  • और बाइक ट्रिप की यादें

यही वजह है कि रायगढ़ बार-बार बुलाता है।

15. क्या रायगढ़ दोबारा जाने लायक जगह है?

भाई, बिल्कुल। ये वो जगह है जहां हर बार नई कहानी बनती है
मैं खुद कई बार जा चुका हूं और फिर जाऊंगा।

क्यों विजिट करे रायगढ़? मेरा फाइनल थॉट्स एंड टिप्स

दोस्तों, अगर आप छत्तीसगढ़ घूमने का प्लान बना रहे हो तो रायगढ़ मिस ना करना। बाइक ट्रिप फ्रॉम जांजगीर टू रायगढ़ करो, जिंदल प्लांट देखो, बाबा धाम जाओ, राम झरना एंजॉय करो। बजट कम, लेकिन रिटर्न ज्यादा – यादों का। कमेंट में बताओ, तुम्हारा फेवरेट स्पॉट कौन सा है? शेयर करो, और ये वीडियो भी देख लो, मिलते हैं नेक्स्ट ब्लॉग में। जय हिंद!

जांजगीर से रायगढ़ रोड ट्रिप वीडियो 

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