Varanasi Trip Plan 2026: काशी घूमने का सबसे सस्ता और बेस्ट तरीका

Varanasi Tour Guide: मेरे 5 दिन के काशी अनुभव का वो सच।

भाई लोग, नमस्ते! मैं हूँ अमित, खूबसूरत भारत से। आज मैं आपसे Varanasi के बारे में बात करने वाला हूं, वो भी ऐसे जैसे हम दोनों कॉफी शॉप में बैठे हों और मैं अपनी ट्रिप की कहानी सुना रहा हूं। यार, Varanasi तो वो जगह है जहां जिंदगी और मौत दोनों एक साथ नाचती हैं, और बीच में गंगा मैया सब कुछ बहा ले जाती हैं। मैं जांजगीर से हूं, छत्तीसगढ़ वाला, और अभी कुछ दिन पहले ही Kolkata Trip से लौटा था। वो ट्रिप भी कमाल की थी, लेकिन Varanasi का प्लान तो प्रयागराज जाने के बाद से ही मन में घूम रहा था।

याद है ना, प्रयागराज में वो संगम पर खड़े होकर लगा था कि अब काशी जाना ही पड़ेगा, वरना जिंदगी अधूरी रह जाएगी। आखिरकार संयोग बना, और मैं अपने दोस्त भवानी और संतोष के साथ ट्रेन पकड़कर निकल पड़ा।

ट्रेन का सफर भी मजेदार था, भाई – चाय की थड़ी पर गपशप, बाहर की हवा में वो पुरानी यादें। हम लोग कोलकाता से वापस आते हुए सोचे कि सीधे Varanasi क्यों ना हो आएं? और बस, हो गया। ट्रेन थी गोरखपुर एक्सप्रेस, स्टेशन में उतरे, वहाँ से एक शेयर ऑटो लिया और सीधा गोदौलिया चौक। ठंड थी भयंकर पर मन में आग लगी थी। ऑटो वाला भैया बोला – “बाबू, पहली बार बनारस?” हम तीनों एक साथ चिल्लाए – “हाँ भैया!” वो हँस पड़ा – “तो फिर आज तुम लोग बनारसी हो जाओगे।”

Varanasi समझने की कोशिश मत करो, बस यहाँ खो जाओ

दोस्त, बनारस कोई साधारण शहर नहीं है… ये दुनिया का सबसे पुराना जीता-जागता शहर है यार! लोग कहते हैं कि ये 5000 साल से भी ज्यादा पुराना है। मार्क ट्वेन ने सही कहा था – “Banaras is older than history, older than tradition, older even than legend, and looks twice as old as all of them put together.” पूरा कोट यहाँ Mark Twain on Varanasi पर देख सकते हो।

ये वो शहर है जो कभी सोता नहीं। रात 3 बजे भी घाटों पर लोग स्नान कर रहे होते हैं, कहीं चिता जल रही होती है, कहीं कोई पंडित पूजा कर रहा होता है, कहीं कोई लड़का गिटार बजाकर बॉब मार्ले गा रहा होता है। सब एक साथ।

Varanasi को तीन नामों से जाना जाता है – बनारस, काशी और वाराणसी। काशी मतलब “जहाँ प्रकाश है”। मान्यता है कि यहाँ बाबा विश्वनाथ खुद रहते हैं और जो यहाँ आखिरी साँस लेता है, उसे वो तारक मंत्र कान में बोलकर मोक्ष दे देते हैं। पूरा डिटेल यहाँ है Official Varanasi Tourism मे।

ये शहर गंगा के किनारे 88 घाटों पर बसा है। हर घाट की अपनी कहानी है – कोई राजा ने बनवाया, कोई रानी ने, कोई पूजा के लिए, कोई जलाने के लिए। गंगा यहाँ उत्तर की तरफ बहती है (हाँ भाई, उल्टी दिशा में!), इसीलिए इसे उत्तरवाहिनी गंगा कहते हैं। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि यहाँ का पानी खास है – Ganga Water Study – IIT Kanpur कि स्टडी भी देख सकते हो।

यहाँ की गलियाँ इतनी पतली हैं कि बाइक भी मुश्किल से निकलती है। लेकिन यही गलियाँ आपको ले जाती हैं विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्निका, ब्लू लस्सी, कचौड़ी गली तक। एक बार खो जाओ ना इन गलियों में, तो निकलने का मन ही नहीं करता।

Varanasi वो शहर है जहाँ सुबह 5 बजे योगा करने वाले हिप्पी, दोपहर में बनारसी साड़ी खरीदती आंटियाँ, और रात में घाट पर गाना गाते लोकल लड़के – सब एक साथ रहते हैं। यहाँ ना कोई जल्दी है, ना कोई टेंशन। टाइम यहाँ “बनारसी स्टाइल” में चलता है – मतलब जब मन करे तब।

Varanasi tourist places

संक्षेप में कहूँ तो – बनारस वो जगह है जहाँ आप आते हो घूमने, और वापस जाते हो खुद को बदलकर। यहाँ की हवा में कुछ है जो आपको अंदर से हिला देती है। तो भाई, जब भी लगे कि जिंदगी फ्लैट हो गई है… एक ट्रेन पकड़ो, कैंट स्टेशन उतरो, और सीधे घाट पर पहुँच जाओ। बाकी गंगा मैया और बाबा विश्वनाथ संभाल लेंगे।

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काशी विश्वनाथ मंदिर – वो जगह जहाँ पहुँचते ही सब साइलेंट हो जाता है

ट्रेन से उतरे, ऑटो लिया और सीधा Kashi Vishwanath Temple। भाई, वहाँ पहुँचते ही जो घंटियों की आवाज, जो भीड़, वो लाइन – दिल धक् से हो गया। भवानी ने तो माथा टेकते ही बोला, “अब सारी टेंशन गंगा में बहा दी।” संतोष ने तुरंत ताना मारा, “तेरी वो वाली गर्लफ्रेंड की याद भी बहा दी क्या?” हम तीनों हँसते हँसते पागल हो गए। अंदर जो ज्योतिर्लिंग है ना, उसका दर्शन करके सच में मन शांत हो गया। अगर आप पहली बार जा रहे हो तो नए Kashi Vishwanath Corridor से होकर जाओ, लाइन कम लगती है। पूरा इतिहास यहाँ  Wikipedia Kashi Vishwanath पर पढ़ सकते हो।

यार, जब भी कोई मुझसे पूछता है कि बनारस में सबसे खास क्या लगा, तो मैं बिना सोचे बोल देता हूँ – बाबा विश्वनाथ का दरबार।
Kashi Vishwanath Temple वो जगह है जहाँ मैं पहुँचा और अचानक मेरे मुँह से आवाज़ ही गायब हो गई। ना फोटो खींचने का मन हुआ, ना कुछ बोलने का। बस खड़ा रहा और देखता रहा।

हम तीनों सुबह-सुबह लाइन में लगे थे। नया कॉरिडोर बना है ना, उससे होकर जाना बहुत आसान हो गया है। पहले घंटों लगते थे, अब 30-40 मिनट में दर्शन हो जाते हैं। जैसे ही अंदर घुसे, सामने वो शिवलिंग… छोटा सा, लेकिन ऐसा लगा जैसे पूरी कायनात उसी में समा गई हो। भवानी ने आँखें बंद करके माथा टेका और जब बाहर निकला तो उसकी आँखें गीली थीं। उसने बस इतना कहा, “अमित भाई, आज तक जो माँगा वो सब मिल गया लगता है।” संतोष ने माहौल हल्का करने के लिए बोला, “अब तो तेरी शादी भी पक्की, बाबा ने सुन लिया।” हम फिर हँस पड़े, लेकिन हँसी में भी एक अजीब सा सुकून था।

ये मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, और मान्यता है कि यहाँ दर्शन मात्र से मोक्ष मिलता है। मंदिर को कई बार तोड़ा गया – औरंगजेब ने भी तुड़वाया था, लेकिन हर बार फिर बन गया। अब जो नया स्वरूप है ना, वो कमाल का है – चौड़ा कॉरिडोर, साफ-सुथरा, और गंगा का सीधा व्यू।  shrikashivishwanath.org पर भी काशी विश्वनाथ मंदिर के बारे में देख सकते हो।

लाइन में खड़े-खड़े एक पंडाजी बता रहे थे कि बाबा यहाँ अपने भक्तों को तारक मंत्र खुद कान में बोलते हैं। सुनकर रोंगटे खड़े हो गए। मैंने भी मन ही मन अपनी सारी परेशानियाँ बाबा के सामने रख दीं – नौकरी की टेंशन, घर की चिंता, सब। बाहर निकला तो सच में हल्का लग रहा था, जैसे कोई बोझ उतार दिया हो।

ये तरीके फालो करो:

  • सुबह 4-5 बजे का मुहूर्त बेस्ट है, भीड़ कम होती है
  • ऑनलाइन VIP पास भी ले सकते हो (₹300-500 में) – यहाँ बुक करो: Official Booking
  • जूते-चप्पल बाहर ही छोड़ दो, अंदर ले जाना मना है
  • और हाँ, प्रसाद में जो पेड़ा मिलता है ना, वो जरूर लेना – घर लाकर मम्मी को दे देना, बहुत खुश हो जाएँगी

बाहर निकलकर हम लोग गंगा किनारे बैठ गए। चाय पी और बस चुपचाप बाबा को याद करते रहे। सच बता रहा हूँ दोस्त, अगर बनारस सिर्फ एक जगह देखनी हो तो यही देख लो। बाकी सब तो बाद में भी हो जाएगा। बस इतना कहूँगा – हर हर महादेव!

सुबह-सुबह बोट राइड और दशाश्वमेध घाट का जादू – वो वाला सीन जो जिंदगी भर याद रहता है

दोस्त, अलार्म 4:30 बजे बजाया और तीनों नींद में लडख़ड़ाते हुए Assi Ghat पहुँचे। अंधेरा अभी पूरा था, सिर्फ घाट पर दीये जल रहे थे। बोट वाला मिला, बोला “साहब, सूरज निकलने वाला है, जल्दी बैठो।” हम बोट में चढ़े और जैसे ही गंगा पर खेने लगे, ठंडी हवा ने सारी नींद उड़ा दी। चारों तरफ सन्नाटा, सिर्फ चप्पू की आवाज़ और दूर कहीं मंत्रों की गूँज।

Varanasi Trip with friends
मेरे साथ मेरा दोस्त भवानी और संतोष Varanasi trip में

हम Assi से शुरू करके धीरे-धीरे आगे बढ़े – हर घाट अलग कहानी बता रहा था। कहीं कोई बाबा स्नान कर रहा था, कहीं कोई लड़की योगा कर रही थी, कहीं कुत्ता भी चुपचाप बैठा गंगा देख रहा था। फिर अचानक सूरज निकला… भाई, वो लाल-नारंगी रंग गंगा पर बिखर गया, ऐसा लगा जैसे कोई ने सोने की पिघली हुई बाल्टी उड़ेल दी हो। संतोष ने चिल्लाया, “अमित भाई, ये तो स्वर्ग है यार!” मैं और भवानी बस मुँह बाये देखते रह गए।

Dashashwamedh Ghat पहुँचे तो बोट वाला बोला, “अब शाम को आना, आरती देखना।” लेकिन हमने उसी दिन शाम को फिर बोट बुक कर ली। रात में आरती का सीन तो अलग लेवल का था – सात पंडित जी एक साथ दीये घुमाते हैं, हजारों लोग ताली बजाते हैं, पूरा घाट दीयों से जगमगा उठता है। बोट पर बैठकर आरती देखने का अपना अलग मजा है, हवा में अगरबत्ती की खुशबू, मंत्रों की गूँज, और गंगा का पानी छूता हुआ… रोंगटे खड़े हो गए थे।

मेरी तरफ से टिप:

  • सुबह 5 बजे की बोट जरूर लेना (200-300 रुपये प्रति व्यक्ति, सूर्योदय वाला)
  • शाम की आरती के लिए 6:45 बजे तक पहुँच जाना, बोट से देखना बेस्ट है
  • कैमरा चार्ज करके ले जाना, फोटो नहीं खींचोगे तो बाद में पछताओगे

सच कह रहा हूँ दोस्त, Varanasi में अगर एक चीज मिस कर दी तो बोट राइड और गंगा आरती मिस कर दी। ये वो पल हैं जो सालों बाद भी आँख बंद करते ही सामने आ जाते हैं। तो अगली बार जब बनारस आओ ना, सुबह सबसे पहले यही करना। बाकी सब बाद में।

मणिकर्निका घाट – जहाँ जिंदगी और मौत साथ नाचते हैं

यार, Manikarnika Ghat का नाम सुनते ही अंदर से कुछ काँप जाता है, लेकिन वहाँ पहुँचकर जो देखा वो कभी भूल नहीं सकता। हम तीनों बोट से दूर से ही देख रहे थे, क्योंकि करीब जाना मना है। वहाँ 24 घंटे चिता जलती रहती है, दिन हो या रात। लकड़ियाँ तौली जा रही थीं, कहीं कोई रो रहा था, कहीं बिल्कुल सन्नाटा। लेकिन हैरानी की बात ये कि ठीक उसी के बगल में लोग कपड़े धो रहे थे, कोई स्नान कर रहा था, कोई फोटो खींच रहा था… जैसे मौत यहाँ कोई अनजान चीज नहीं, बल्कि रोज़ का हिस्सा है।

भवानी चुप हो गया था, बोला, “अमित भाई, यहाँ आकर सच में समझ आया कि जिंदगी कितनी छोटी है।” संतोष ने मूड हल्का करने के लिए बोला, “अरे तो फिर जल्दी शादी कर ले, वरना मुझे तो यहीं जलाना पड़ेगा।” हम हँसे, लेकिन हँसी में एक अजीब सा डर भी था। पंडित जी बता रहे थे कि यहाँ चिता की आग कभी बुझती नहीं, सदियों से जल रही है, और मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ खुद यहाँ आखिरी साँस लेने वालों को तारक मंत्र बोलकर मोक्ष देते हैं।

मैं बस दूर से देखता रहा, आग की लपटें, धुआँ, और उसमें भी गंगा शांत बह रही थी। लगा जैसे गंगा मैया कह रही हों, “डर मत, सब यहीं से आते हैं और यहीं चले जाते हैं।” वहाँ से निकले तो तीनों चुप थे। कोई मजाक नहीं, कोई फोटो नहीं। बस एक सवाल मन में घूमता रहा – हम भाग-दौड़ क्यों करते हैं इतनी? दोस्त, मणिकर्निका घाट देखने जरूर जाना, लेकिन दिल मजबूत करके। वहाँ जाकर समझ आता है कि बनारस सिर्फ घूमने की जगह नहीं, जीने और मरने का फुल कोर्स है।

सारनाथ – जहाँ बुद्ध ने पहला उपदेश दिया, और हम तीनों चुप होकर सुनते रहे

दोस्त, Varanasi से करीब 12 किमी दूर है Sarnath, लेकिन वहाँ पहुँचते ही लगा जैसे किसी दूसरी दुनिया में आ गए। हम लोग सुबह-सुबह ऑटो लेकर पहुँचे, टिकट 50 रुपये का और अंदर घुसते ही वो शांति… भाई, आवाज़ भी धीमी हो गई हमारी। सबसे पहले Dhamek Stupa के सामने खड़े हुए – वो विशाल ईंटों वाला स्तूप जहाँ गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था, पंचवटी के नीचे। 2500 साल पहले यहीं बैठकर उन्होंने चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग बताया था। मैं तो बस सोचता रहा कि यहीं से पूरी दुनिया को शांति का फॉर्मूला मिला था।

फिर हम लोग म्यूजियम में गए, वहाँ वो अशोक स्तंभ वाला शेर वाला चिन्ह देखकर गर्व से सीना चौड़ा हो गया। संतोष ने फोटो खींचते हुए बोला, “अमित भाई, ये तो हमारा नेशनल एम्ब्लम है यार!” भवानी तो मुलगंधकुटी विहार के बगीचे में बैठकर ध्यान लगाने लगा, बोला “अब घर जाकर रोज़ मेडिटेशन करूँगा।” (अब तक शुरू नहीं किया है वैसे)

चारों तरफ हिरण घूम रहे थे, बिल्कुल वैसा ही जैसा बुद्ध के समय में रहा होगा। हम लोग वहाँ करीब 3-4 घंटे रहे, और निकलते वक्त तीनों चुप थे। कोई मजाक नहीं, कोई शोर नहीं। बस मन में एक अजीब सा सुकून था। अगर आपको और डिटेल्स चाहिए तो Archaeological Survey of India – Sarnath पर भी देखा जा सकता है।

मेरी सलाह:

  • सुबह 9 बजे तक पहुँच जाओ, भीड़ कम होती है
  • म्यूजियम जरूर घूमना (टिकट अलग से 10 रुपये)
  • और एक कोने में 10 मिनट शांति से बैठकर बस महसूस करना

सारनाथ वो जगह है जहाँ बनारस का शोर अचानक खत्म हो जाता है, और बुद्ध की बातें आज भी हवा में गूँजती लगती हैं। अगर बनारस आ रहे हो तो सारनाथ मिस मत करना भाई, वरना ट्रिप अधूरी रह जाएगी।

बुद्धं शरणं गच्छामि!

बनारास हिंदू यूनिवर्सिटी – पूरा एक शहर है भाई

BHU Campus में घुसते ही मुँह खुला रह गया। इतना बड़ा कैंपस! लगा कि हम किसी दूसरे राज्य में आ गए। 1300 एकड़ का कैंपस, चौड़ी-चौड़ी सड़कें, हिरण घूम रहे हैं, और स्टूडेंट्स साइकिल पर उड़ाते हुए। हम लोग गेट पर उतरे और साइकिल रेंट कर ली (50 रुपये पूरा दिन), फिर शुरू हो गया टूर। सबसे पहले कैंपस का अपना काशी विश्वनाथ मंदिर – बाहर वाला जितना फेमस, ये भी उतना ही पावरफुल। लाइन छोटी थी, दर्शन जल्दी हो गए।

फिर भारत कला भवन म्यूजियम – भाई, वहाँ पुरानी पेंटिंग्स, मिनिएचर आर्ट, तानसेन का तंबूरा, सब कुछ है। संतोष तो घंटों खड़ा रहा, बोला “स्कूल में इतिहास पढ़ाते तो ऐसे पढ़ाते!” बाहर निकले तो भूख लगी, कैंटीन में 40 रुपये में दाल-चावल-सब्जी-रायता, भर पेट। स्टूडेंट्स से बात की, सबने कहा “भाई यहाँ पढ़ लो तो लाइफ सेट।” मैंने हँसकर कहा, “अब तो उम्र निकल गई वरना एडमिशन ले लेता।”

कैंपस में एक कोने में लाइब्रेरी है, इतनी बड़ी कि खो जाओगे। और बीच-बीच में पुराने मंदिर, तालाब, बगीचे। भवानी ने तो घोषणा कर दी, “अगली ट्रिप में यहीं 2 दिन रुकेंगे, पूरा कैंपस पैदल नापेंगे।”

कुछ टिप्स ले लो:

  • सुबह 9 बजे तक पहुँच जाओ, पूरा दिन लगेगा
  • साइकिल जरूर लो, वरना पैर दुख जाएँगे
  • भारत कला भवन का टिकट 20 रुपये, अंदर फोटो मना है लेकिन देखने लायक है

BHU देखकर लगा कि बनारस सिर्फ घाटों का नहीं, पढ़ाई-लिखाई का भी बादशाह है। तो अगली बार बनारस आओ तो एक पूरा दिन यहाँ जरूर रखना, वरना बनारस अधूरा रह जाएगा।

संकट मोचन, तुलसी मानस, दुर्गा कुंड – एक ही इलाके में पूरा पैकेज

दोस्त, Varanasi में एक ऐसा इलाका है जहाँ ऑटो वाले को बोलो “संकट मोचन” तो बाकी दो जगहें अपने आप हो जाती हैं। सुबह-सुबह हम लोग Sankat Mochan Temple पहुँचे। लाइन में खड़े-खड़े ही लड्डू का प्रसाद मिलने लगा, भवानी ने तो चार-चार ले लिए और बोला, “अब साल भर संकट नहीं आएगा!” मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति देखकर मन शांत हो गया। बाहर निकले तो ठीक सामने Tulsi Manas Mandir, जहाँ दीवारों पर पूरी रामचरितमानस हिंदी में लिखी हुई है। मैं तो पढ़ता ही रह गया, लगा जैसे गोस्वामी तुलसीदास जी खुद सामने खड़े होकर सुना रहे हों। संतोष ने मजाक किया, “अब तो तू रामायण रट लेगा, परीक्षा देगा क्या?”

बस दो मिनट की वॉक और पहुँचे Durga Kund Temple। लाल पत्थर का मंदिर, अंदर माँ दुर्गा की मूर्ति इतनी जीवंत कि देखते ही झुक गए। तालाब के किनारे बंदरों का आतंक था, भवानी का चश्मा छीनकर भाग गए, हम दौड़ाते रहे और हँसते रहे। ये तीनों मंदिर एक-दूसरे से 5-7 मिनट की दूरी पर हैं, मतलब एक ही रिक्शे में तीन जगहें हो गईं।

मेरा मानना है कि अगर Varanasi में एक ही दिन बचा हो और कुछ खास करना हो तो यहीं आ जाओ। हनुमान जी से ताकत, तुलसीदास जी से ज्ञान, और माँ दुर्गा से शक्ति, सब एक साथ मिल जाएगा। हम लोग वहाँ से निकले तो संतोष ने कहा, “अमित भाई, आज तो पूरा recharge हो गया।” बिल्कुल सही कहा था उसने।

तो अगली बार जब बनारस आओ ना, सुबह का एक घंटा यहाँ जरूर रखना। और हाँ, संकट मोचन के लड्डू घर भी ले जाना, मम्मी को बहुत पसंद आएँगे!

रामनगर किला और Varanasi की वो छुपे हुए रत्न जो गाइड भी नहीं बताते

दोस्त, रामनगर किला सुनकर लगता है बस एक पुराना किला होगा, लेकिन वहाँ पहुँचकर मुँह खुला रह गया। गंगा के उस पार है, बोट से भी जा सकते हो या पुल से ऑटो। 18वीं सदी का किला है, राजा बलवंत सिंह ने बनवाया था। लाल पत्थर का पूरा, अंदर म्यूजियम में पुरानी तलवारें, राजाओं की पालकियाँ, हाथी दाँत की चीजें, और एक से एक पुरानी गाड़ियाँ… भवानी तो देखता रह गया, बोला “यार ये तो इंडियन म्यूजियम से भी कूल है!” सूर्यास्त के वक्त किले की छत से गंगा का नजारा ऐसा कि फोटो खींचते-खींचते बैटरी खत्म हो गई। टिकट सिर्फ 50 रुपये था, और अगर तुमको पुरानी चीजें पसंद हैं तो पूरा दिन भी कम पड़ेगा। ऑफिशियल डिटेल यहाँ है – Ramnagar Fort

और हाँ, पास में ही कुछ छुपे रत्न हैं जिनके बारे में ज्यादातर गाइड भी नहीं बताते:

  • चेत सिंह घाट (वहाँ 1781 में अंग्रेजों से छत्रपति की लड़ाई हुई थी),
  • रीवा घाट (एकदम शांत, फोटोग्राफी के लिए बेस्ट),
  • नेपाल मंदिर (काठमांडू स्टाइल लकड़ी का मंदिर, ऊपर से पूरा बनारस दिखता है),
  • और लोलार्क कुंड (प्राचीन कुआँ, लोग कहते हैं निसंतान दंपत्ति यहाँ आकर संतान पाते हैं)।

हम तीनों तो किले से निकलकर शाम तक इधर-उधर भटकते रहे। संतोष ने बोला, “अमित भाई, ये जो छुपी हुई जगहें हैं ना, ये असली बनारस हैं।” बिल्कुल सही कहा था उसने। तो अगली बार जब Varanasi आओ तो रामनगर किला जरूर रखना लिस्ट में, और बोट से जाना – मजा दोगुना हो जाएगा!

विश्वनाथ गली और गोडौलिया मार्केट – खाने पीने का स्वर्ग जहाँ पेट और जेब दोनों खाली हो जाते हैं

यार, बाबा के दर्शन करके जैसे ही हम लोग विश्वनाथ गली में घुसे, वहाँ की खुशबू ने हमें पागल कर दिया। तंग सी गली, चारों तरफ दुकानें, और हर दुकान से अलग-अलग आवाजें – “कचौड़ी ले लो भैया!”, “ब्लू लस्सी वाला ये रहा!”, “मलाईयो ठंडा ठंडा!” हम तीनों तो बस देखते रह गए। पहले नंबर पर ब्लू लस्सी – मिट्टी के कुल्हड़ में लस्सी, ऊपर से फ्रूट्स, ड्राई फ्रूट्स, ऐसा लगा जैसे दूध का पूरा बगीचा पी रहे हों। भवानी ने दो गिलास ठोंके और बोला, “अब मर भी जाऊँ तो कोई गम नहीं।”

फिर कचौड़ी गली में घुसे – वहाँ की आलू-दाल वाली कचौड़ी और जलेबी खाकर संतोष ने घोषणा कर दी कि “अब घर जाकर मम्मी की कचौड़ी फीकी लगेगी।” उसके बाद ठंडाई, मलाईयो, बनारसी पान, चाट, सब कुछ चख लिया। पेट फूल गया, पर मन नहीं भरा। गली में इतनी भीड़ थी कि एक-दूसरे को धक्का लग रहा था, लेकिन किसी को गुस्सा नहीं आ रहा था – सब हँस रहे थे।

गोडौलिया मार्केट में शाम को पहुँचे, वहाँ तो साड़ी, ज्वेलरी, मसाले, सब कुछ मिलता है। मम्मी-पापा के लिए बनारसी साड़ी और मसाले लिए, और संतोष ने अपनी होने वाली वाली (जो अभी तक नहीं है) के लिए भी एक साड़ी खरीद ली, बोला “पहले से तैयार रहूँगा।”

सच बता रहा हूँ दोस्त, अगर बनारस सिर्फ खाने के लिए भी आओ तो घाटा नहीं होगा। ये गलियाँ हैं ही इतनी जादुई कि एक बार घुस गए तो बाहर निकलने का मन नहीं करता। बस एक सलाह – खाली पेट आना, और ढीली पजामी पहनकर आना, क्योंकि पेट निकल आएगा बाहर!

Varanasi कैसे पहुँचें – मेरा वाला आसान फॉर्मूला

दोस्त, Varanasi पहुँचना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस थोड़ा प्लानिंग चाहिए। हम तीनों जांजगीर-चाम्पा से थे तो सबसे सस्ता और मजेदार तरीका था ट्रेन। Kolkata trip से वापसी के बाद हमने planning की, फिर Sarnath express पकड़ी, रात 11 बजे चढ़े और शाम को बनारस कैंट उतर गए। सीधा, सस्ता (स्लीपर में ₹400, 3AC में ₹950 के आसपास) और रात भर गप्पे मारते हुए सफर कट गया।

अगर आप दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या हैदराबाद से आ रहे हो तो रोज़ 15-20 ट्रेनें हैं:

  • सबसे पॉपुलर है 12382 न्यू दिल्ली-हावड़ा पूर्वा एक्सप्रेस
  • 12560 शिवगंगा एक्सप्रेस (नई दिल्ली से)
  • बेंगलुरु से 22688 बनारस एक्सप्रेस (सप्ताह में 2 दिन)

हवाई जहाज़ से आना चाहते हो तो ललित नारायण मिश्र एयरपोर्ट (VNS) है, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद से रोज़ फ्लाइट्स हैं। एयरपोर्ट से शहर सिर्फ 22 किमी, प्रीपेड टैक्सी 600-800 रुपये में छोड़ देगी।

और हाँ, दो स्टेशन हैं कैंट और मंडुआडीह (अब बनारस स्टेशन कहते हैं), ज्यादातर अच्छी ट्रेनें कैंट पर ही रुकती हैं। वहाँ से घाट तक ऑटो 150-200 रुपये लेगा, या ओला-उबर भी मिल जाता है।

मेरा वाला प्रो टिप:

  • ट्रेन में जनरल टिकट मत लेना, तत्काल या 3AC कर लो, आराम से सोकर उतरोगे
  • बनारस कैंट स्टेशन पर ही बाहर निकलते ही चाय वाला मिलेगा, पहले एक कुल्हड़ चाय पी लो फिर होटल ढूँढना
  • अगर रात में पहुँच रहे हो तो पहले से होटल बुक कर लो (घाट के पास 800-1500 में अच्छे मिल जाते हैं)

बस इतना कर लिया ना, फिर बाबा विश्वनाथ और गंगा मैया खुद लेने आ जाएँगी। तो अब कोई बहाना नहीं – टिकट काटो और निकल पड़ो!

Varanasi में कहाँ रुकें – मेरे वाले 100% टेस्टेड ऑप्शन (जेब और सुकून दोनों का ध्यान रखा)

यार, Varanasi में होटल ढूँढने का फंडा बहुत सिंपल है – जितना घाट के पास, उतना मजा दोगुना। हम तीनों ने 4 रातें अलग-अलग जगह ट्राई की, तो अब मुझे पता है कहाँ दिमाग लगाना है:

  1. अगर बजट 1000-2000 है → Assi Ghat के आसपास ले लो।
    हमने “गंगा व्यू गेस्ट हाउस” और “संकट मोचन के पास वाला होमस्टे” लिया – सुबह 5 बजे दरवाजा खोला और सीधे घाट पर। रूम साफ, AC-नॉन AC दोनों, और मालिक लोग इतने अच्छे कि चाय तक फ्री में पिलाते थे। बुकिंग: Booking.com या MakeMyTrip पर “Assi Ghat” सर्च करो, 1200-1800 में बढ़िया मिल जाएगा।
  2. अगर थोड़ा और कंफर्ट चाहिए (2500-4000) → Dashashwamedh Ghat से 5 मिनट पैदल।
    हमने एक रात “BrijRama Palace” के बाहर से ही फोटो खींची (बहुत महंगा था), लेकिन उसके ठीक बगल में “Hotel Sita” और “Ganpati Guest House” लिया – गंगा का फुल व्यू बालकनी, साफ बाथरूम, और सुबह आरती की आवाज़ कमरे में आती थी।
  3. अगर फैमिली के साथ या शांति चाहिए → Ravidas Ghat या Shivala Ghat के पास।
    भीड़ कम, घाट साफ, और रूम 1500 से शुरू। हमने आखिरी रात यहीं रुके थे, सुबह कोई शोर नहीं, बस गंगा की लहरों की आवाज़।
  4. हॉस्टल में मस्ती करनी हो → Assi के हॉस्टल (Live Free Hostel, Stops Hostel) – 400-600 रुपये में डॉरमेटरी, छत पर सब विदेशी लड़के-लड़कियाँ गिटार बजा रहे होते हैं, पार्टी मूड हो तो यहीं।

मेरा परफेक्ट वाला कॉम्बो (जो मैं अगली बार करूँगा):
पहले 2 रात Assi (शांति + सुबह बोट आसान), फिर 2 रात Dashashwamedh के पास (आरती + गलियाँ आसपास)।

एक बात और – होटल बुक करते वक्त “Ganga Facing Room” जरूर लिखना, नहीं तो पीछे की गली में कमरा दे देंगे।
और हाँ, पहुँचकर मालिक से बोल देना “अमित भाई ने भेजा है”… शायद डिस्काउंट भी मिल जाए।

Varanasi Travel Tips – मेरे वाले, जो किताबों में नहीं मिलेंगे

भाई, Varanasi कोई शिमला-मनाली नहीं है कि 5 स्टार में ठहरो और घूम लो। यहाँ थोड़ा दिमाग लगाना पड़ता, वरना मजा खराब हो जाएगा। मेरी तरफ से टॉप टिप्स:

  1. कम से कम 4-5 दिन रखो – 2 दिन में सिर्फ़ थक जाओगे, कुछ समझ नहीं आएगा।
  2. होटल घाट से 5-10 मिनट पैदल दूरी पर लेना (Assi, Dashashwamedh या Ravidas Ghat के आसपास) – 1000-2000 में साफ-सुथरा कमरा मिल जाएगा, सुबह 5 बजे उठकर सीधा घाट।
  3. जूते-चप्पल कम पहनो – गलियों में गोबर-कीचड़ का कॉम्बो रहता है, हवाई चप्पल या फ्लोटर सबसे बेस्ट।
  4. कैश साथ रखो – यहाँ ATM लाइन लंबी और नेटवर्क गायब हो जाता है, 200-500 के नोट ही चलते हैं।
  5. गर्मी में (अप्रैल-जून) मत आना अगर सह सकते हो तो – पसीना ऐसे निकलेगा जैसे गंगा में डुबकी लगाई हो। अक्टूबर से मार्च बेस्ट टाइम।
  6. बोट वाला पहले से फिक्स कर लो – सुबह 5 बजे का सूर्योदय और शाम 6:30 वाली आरती दोनों बुक कर लो, 250-400 रुपये प्रति व्यक्ति में हो जाएगा।
  7. खाने में लोकल ही खाओ – ब्लू लस्सी, कचौड़ी गली, बाबा ठंडाई, मधु मक्खन वाली दुकान – ये सब ट्राई करो, पेट खराब हो जाए तो विशुद्ध इमली की गोली ले लेना, तुरंत ठीक।
  8. गाइड मत लो अगर बजट कम है – पर मेरा वाला प्लान ठीक से देख लो और खुद घूमो, ज्यादा मजा आएगा। अगर लेना है तो पहले ये देख लो- Tour Guide Hire Karne ki 5 Bhool? [मेरा 140+ Trips का Experience]
  9. शाम को घाट पर बैठकर चाय पीना और कुछ नहीं बोलना – बस ये कर लेना, सारी थकान गंगा में बह जाएगी।
  10. और सबसे जरूरी – यहाँ टाइम “बनारसी स्टाइल” में चलता है, मतलब 10 मिनट का काम 1 घंटे में होगा। गुस्सा मत करना, चिल करो। यही बनारस है।

एक लाइन में कहूँ तो: Varanasi को अपने तरीके से मत चलाना, इसे खुद को चलाने दो। बस बैग उठाओ, ट्रेन पकड़ो और आ जाओ – बाकी गंगा मैया और बाबा विश्वनाथ संभाल लेंगे। आपका यार अमित (जो अब बनारसी बन गया है।)

Varanasi Trip के लिए कुछ जरूरी सवालों के जवाब

1. बनारस घूमने का सबसे बेस्ट टाइम कब है?

October से March सबसे बढ़िया मौसम मिलता है। गर्मियों में बहुत गर्मी पड़ती है, इसीलिए विंटर या मॉनसून के बाद आओ।

2. बनारस में कितने दिन चाहिए पूरे घूमने के लिए?

कम से कम 3 दिन।
Day 1 – बाबा विश्वनाथ मंदिर, गली-चक्कर
Day 2 – घाट, बोट राइड, आरती
Day 3 – सारनाथ, BHU, या रामनगर किला

3. सुबह की बोट राइड का टाइम क्या है?

सुबह 5 बजे से 6 बजे के बीच सूर्योदय का सबसे शानदार नज़ारा मिलता है।

4. Ganga Aarti कहाँ देखनी चाहिए – बोट से या घाट पर?

अगर आराम से और भीड़ से बचकर देखना है तो बोट सबसे बेस्ट है। अगर पूरा माहौल महसूस करना है तो घाट पर जाकर बैठो।

5. बनारस में सबसे जरूरी जगहें कौन-सी हैं?

  • काशी विश्वनाथ मंदिर
  • अस्सी घाट
  • दशाश्वमेध घाट
  • मणिकर्निका
  • सारनाथ
  • BHU
  • रामनगर किला
  • विश्वनाथ गली & गोडौलिया मार्केट

6. क्या काशी विश्वनाथ में मोबाइल ले जा सकते हैं?

नहीं। बाहर लॉकर में जमा करना पड़ता है।
VIP Pass हो तब भी अंदर मोबाइल allowed नहीं है।

7. VIP Darshan के लिए टिकट कहाँ मिलता है?

ऑनलाइन बुक कर सकते हो — लेकिन अंदर मोबाइल allowed नहीं रहेगा।

8. अस्सी घाट से बोट राइड की कीमत क्या है?

Normal shared boat – ₹150–300 प्रति व्यक्ति
Private boat – ₹600–1200 (घाट और टाइम पर निर्भर)

9. क्या बनारस में रात को घूमना सुरक्षित है?

हाँ, बहुत सुरक्षित है। विशेषकर गोडौलिया–अस्सी के बीच का इलाका रात 1–2 बजे तक जागता है।

10. बनारस में अच्छा और सस्ता खाना कहाँ मिलता है?

  • विश्वनाथ गली – कचौड़ी, जलेबी
  • ब्लू लस्सी
  • बाउल ऑफ हेवन
  • भैरव नाथ चाट भंडार
  • अस्सी घाट – पिज़्ज़ा, पास्ता, बनारसी चाय

11. Varanasi में रहने के लिए सबसे बेस्ट जगह कौन सी है?

Assi Ghat – शांत, कैफे, सस्ता
Godowlia/Dasashwamedh – एकदम सेंटर
BHU Area – शांत और साफ-सुथरा

12. क्या मणिकर्निका घाट के पास फोटो लेना allowed है?

नहीं। ये बहुत संवेदनशील जगह है- दूर बोट से देखना बेस्ट है।

13. सारनाथ कितनी दूर है और कैसे जाएँ?

Varanasi से 10–12 km।
Auto / Cab / Ola Auto आसानी से मिल जाता है।

14. क्या BHU कैंपस आम लोगों के लिए खुला है?

हाँ। आप अंदर घूम सकते हो, साइकिल भी रेंट कर सकते हो।

15. बनारस में शॉपिंग कहाँ करें?

  • गोडौलिया मार्केट
  • विश्वनाथ गली
  • लहरी शेरवानी
  • ठाकुरजी साड़ी
  • पीली कोठी होलसेल मार्केट

16. क्या बनारस में पब्लिक ट्रांसपोर्ट अच्छा है?

हाँ – Auto, E-Rickshaw, Cab, Shared Auto हर जगह मिलते हैं।

17. क्या बनारस में 1 दिन में भी मुख्य जगहें देखी जा सकती हैं?

हाँ, अगर जल्दबाज़ी में हो:

  • बाबा विश्वनाथ
  • दशाश्वमेध घाट
  • गंगा आरती
  • बोट राइड
  • विश्वनाथ गली फूड

अलविदा काशी – ट्रेन में बैठकर जो मन में आया, वही लिख रहा हूँ

दोस्त, वापसी की ट्रेन में हम तीनों खिड़की के पास बैठे थे। बाहर गंगा दूर तक दिख रही थी, सूरज डूबने वाला था। संतोष ने हेडफोन लगा रखा था, भवानी चुपचाप पान चबा रहा था, और मैं बस देखता रहा। कोई बात नहीं कर रहा था।

फिर अचानक भवानी ने फोन निकाला और हमारी एक ग्रुप फोटो देखने लगा – वो वाली जिसमें हम तीनों मणिकर्निका के सामने खड़े थे। बोला, “अमित भाई, पता है… ये ट्रिप खत्म नहीं हुई ना, बस शुरू हुई है।” मैंने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया।

Varanasi ने कुछ ऐसा कर दिया कि अब घर लौटकर भी पूरा घर नहीं लग रहा। जांजगीर पहुँचा तो मम्मी ने पूछा, “कैसा लगा?” मैंने सिर्फ इतना कहा, “मम्मी, वहाँ जाकर लगा कि मैं पहले कभी जीया ही नहीं था।”

तो बस यही आखिरी बात कहना चाहता हूँ – पैसे बचाओ, छुट्टी जोड़ो, दोस्तों को बोलो, और एक बार बनारस जरूर आना। यहाँ ना धर्म है, ना सिर्फ मज़ा है… यहाँ वो चीज है जो कहीं और नहीं मिलती – खुद से मिलने का मौका। जाओ, खो आओ, और जब वापस आओ तो मेरे जैसे बनकर आना – थोड़ा पागल, थोड़ा शांत, और पूरा का पूरा बनारसी।

जय गंगा मैया, जय बाबा विश्वनाथ
और हाँ… अगली बार मिलते हैं घाट पर ही, चाय मेरी तरफ से। तब तक आप प्रयागराज और अयोध्या घूम लीजिए।

तुम्हारा यार,
अमित जो अब भी बनारसी लहजे में सपने देखता है।

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