Bhimtal Lake Uttarakhand : जहाँ पहाड़ों की धुंध में छिपी है एक अलौकिक दुनिया!
यार, नैनीताल का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में क्या आता है? गाड़ियों का ट्रैफिक, मॉल रोड की भीड़ और हर मोड़ पर बजते हॉर्न, सही कहा ना? पर सोचो, अगर मैं तुमसे कहूँ कि नैनीताल से बस कुछ ही किलोमीटर दूर एक ऐसी जगह है जहाँ शांत पानी की झील है, पहाड़ों की ठंडी हवा है और सुकून इतना कि दिल खुश हो जाए? जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ Bhimtal की!
अगर तुम भी शहर की भागदौड़ से बोर हो चुके हो और वीकेंड पर किसी ऐसी जगह जाना चाहते हो जहाँ चाय की चुस्की के साथ परिंदों की चहचहाहट सुनाई दे, तो यह ब्लॉग तुम्हारे ही लिए है। चलो, आज तुम्हें भीमताल की उस खूबसूरत दुनिया की सैर कराता हूँ!
Bhimtal Lake Travel Story
नमस्कार दोस्तों! मैं हूं अमित और स्वागत है आपका आपके अपने Tourist Platform खूबसूरत भारत पर।
अभी यह पोस्ट लिखते वक्त मैं भीमताल की खूबसूरत झील के ठीक किनारे बैठा हूँ। हलकी-हलकी बारिश की बूंदें चेहरे पर पड़ रही हैं, ठंडी हवा चल रही है, और हाथ में कुल्हड़ वाली गरम चाय है। मेरे सामने फैली झील का शांत पानी और पास में बैठी रश्मि… जो चाय का सिप लेते हुए मुस्कुरा रही है। वाइब इतनी कमाल की है कि लगा सब कुछ तुरंत आपके साथ शेयर करूँ!
दरअसल, यह सब प्लान में था ही नहीं। कुछ दिन पहले ही हम लोग कैंची धाम दर्शन करने आए थे। वहाँ नीम करौली बाबा के दर्शन किए और फिर लौटकर Bhowali में आराम से रुके थे। भोवाली की शांत गलियों में घूमते-घूमते रश्मि ने अचानक चाय का कप रखते हुए कहा, यार अमित, जब यहाँ तक आ ही गए हैं, तो यहाँ की बाकी झीलों को क्यों छोड़ना? चलो आगे एक्सप्लोर करते हैं!
बस फिर क्या था! रश्मि की बात में दम था, तो बैग उठाया और निकल पड़े भीमताल की तरफ। यहाँ का दीदार करने के बाद हमारी अगली मंज़िल सातताल होने वाली है।
वैसे, यहाँ तक कैसे पहुँचना है? रास्ता, बस और ट्रेन की सारी डिटेल्स मैं अपने कैंची धाम वाले पोस्ट में पहले ही बता चुका हूँ, तो यहाँ आपको रास्तों में ज़्यादा नहीं उलझाऊँगा। बस इतना समझ लीजिए कि दिल्ली से बस पकड़कर आना सबसे आसान और बजट-फ्रेंडली है, और पहाड़ी घुमावदार सड़कों पर सफ़र करने का अपना ही मज़ा है।
यह पोस्ट मैं किसी भारी-भरकम ट्रैवल गाइड की तरह नहीं लिख रहा हूँ। भीमताल एक ऐसी जगह है, जहाँ आकर सच में मन एकदम शांत हो जाता है। नैनीताल जैसी आपाधापी और गाड़ियों का शोर यहाँ बिल्कुल नहीं है। यहाँ की झील नैनीताल से भी बड़ी है, पानी और नीला है, और माहौल में एक अजीब सा अपनापन है।
अगर आप भी Bhimtal Tourism के बारे में सोच रहे हैं या गूगल पर Best Places to Visit in Bhimtal सर्च करते-करते थक गए हैं, तो रुक जाइए। किसी किताबी गाइड की ज़रूरत नहीं है मेरी यह कहानी और मेरा अपना अनुभव सुन लीजिए।
मैं आपको एक-एक करके भीमताल की हर ख़ास बात बताऊंगा, बिल्कुल वैसे ही जैसे दो दोस्त चाय की दुकान पर बैठकर आपस में बातें करते हैं कोई भारी-भरकम फॉर्मल भाषा नहीं, सीधी और साफ़ अपनी खूबसूरत भारत वाला स्टाइल में।
तो चलिए, चाय का कप उठाइए और मेरे साथ महसूस कीजिए भीमताल की इस खूबसूरत शाम को!
Bhimtal कहाँ है और यहाँ का माहौल कैसा है?
सबसे पहले तो यह समझ लो कि भीमताल कहाँ है और यहाँ पहुँचना कितना आसान है। यह खूबसूरत जगह नैनीताल से लगभग 22 किलोमीटर और भोवाली से करीब 11 किलोमीटर की दूरी पर है। समुद्र तल से इसकी ऊँचाई लगभग 1,370 मीटर है।

यहाँ की झील पूरे कुमाऊँ मंडल की सबसे बड़ी झीलों में से एक है। इसका नाम महाभारत वाले बलशाली भीम के नाम पर पड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पांडव अपने अज्ञातवास/वनवास में थे, तब भीम ने पानी की तलाश में यहाँ ज़मीन पर अपनी गदा से ज़ोरदार प्रहार किया था और यह विशाल झील बन गई।
अब यह कहानी पौराणिक गाथा हो या सच, लेकिन जब आप इस शांत झील के किनारे खड़े होते हो ना, तो ये बातें अपने आप याद आ जाती हैं और मन में एक अलग ही सुकून भरा भाव जग जाता है। अगर आपको इसके इतिहास या सरकारी जानकारियों के बारे में और डिटेल चाहिए, तो आप उत्तराखंड टूरिज्म की ऑफिशियल साइट पर भी देख सकते हो, जहाँ इसे एक परफेक्ट ‘Idyllic Getaway’ यानी सुकून देने वाली जगह बताया गया है।
हमारी भीमताल यात्रा की शुरुआत
ख़ैर, अब हमारी बात सुनो! जब हम लोग भोवाली से भीमताल के लिए निकले, तो हल्की-हल्की रिमझिम बारिश शुरू हो चुकी थी। रश्मि तुरंत अपना छाता खोलने लगी, तो मैंने कहा “अरे यार छोड़ भी दो छाता, हल्की बूँदें चेहरे पर लगने दो! पहाड़ों में भींजने का अपना ही अलग मज़ा है।”
सड़कें एकदम घुमावदार थीं, दोनों तरफ़ घने हरे-भरे पेड़ और बीच-बीच में जैसे बादल ही ज़मीन पर उतर आए हों। लगभग आधे घंटे के खूबसूरत सफ़र के बाद हम भीमताल पहुँच गए।
जैसे ही हमारी पहली नज़र उस विशाल झील पर पड़ी, रश्मि खुशी से चिल्ला उठी अरे यार अमित, यह जगह तो नैनीताल से भी ज़्यादा शांत और हसीन लग रही है!
और सच में भाई! Bhimtal Lake का वो एकदम शांत, नीले पानी वाला नज़ारा दिल जीत लेने वाला था। चारों तरफ़ ऊँचे-ऊँचे पहाड़, हरे-भरे जंगल और झील के ठीक बीचों-बीच बना वो छोटा सा प्यारा द्वीप… देखते ही पूरी थकावट दूर हो गई! अगर आप झीलों के शौकीन है तो मेरे कुछ स्पेशल टूर को देख सकते है जो खास कर झीलों का है।
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झील किनारे की शाम और बीते दिनों की यादें
Bhimtal पहुँचकर हम लोगों ने झील के ठीक किनारे बने एक छोटे से, प्यारे से होटल में कमरा ले लिया। हमारे कमरे की खिड़की खोलते ही सामने पूरी झील का नीला पानी और धुंध में लिपटे पहाड़ नज़र आ रहे थे।
शाम होते-होते बारिश थोड़ी थम चुकी थी। हम दोनों बालकनी में बैठकर हाथ में चाय का गरम कप लिए झील की तरफ़ देख रहे थे। अचानक रश्मि ने शांत माहौल को तोड़ते हुए कहा अमित, याद है जब हम कॉलेज के दिनों में पहली बार पहाड़ों पर गए थे? तब कितना बचपना और कैसा बेपरवाह उत्साह था! अब थोड़े बड़े हो गए हैं, ज़िम्मेदारियाँ आ गई हैं… लेकिन यहाँ आकर बिल्कुल वैसा ही महसूस हो रहा है।
मैं कुछ देर चुप ही रहा, क्योंकि सच में अंदर तक मन भर आया था।
शहर की वही रोज़ की भागदौड़, काम की चिक-चिक और भागती हुई ज़िंदगी को पीछे छोड़कर जब आप ऐसी जगह पर आते हो ना भाई, तो लगता है जैसे वक़्त अचानक धीमा हो गया है। ऐसा लगता है जैसे थमकर थोड़ा साँस लेने का मौका मिल गया हो।
Bhimtal Lake और बोटिंग का यादगार अनुभव
अब बात करते हैं Things to Do in Bhimtal यानी यहाँ आकर आपको सबसे पहले क्या करना चाहिए।

यहाँ का सबसे पहला और सबसे ज़रूरी अनुभव है बोटिंग! भीमताल झील में आपको पैडल बोट और रो बोट यानी चप्पू वाली नाव दोनों आसानी से मिल जाती हैं। हम दोनों ने एक पैडल बोट किराए पर ली। हमारी बोट चलाने में मदद कर रहा स्थानीय भाई बड़ा ही ज़िंदादिल और मज़ाकिया निकला। नाव में बैठते ही मुस्कुराकर बोला “अरे साहब, ज़रा जल्दी-जल्दी पैडल चलाइए, नहीं तो बारिश तेज़ हो गई तो झील के बीच में ही भीग जाएँगे!” उसकी बात सुनकर हम दोनों हँस पड़े और ज़ोर-शोर से पैडल मारने लगे। नीचे झील का पानी इतना साफ़ और बर्फीला ठंडा था कि हाथ डालते ही रोंगटे खड़े हो जाएँ।
झील के ठीक बीचों-बीच जो छोटा सा Island है, वहाँ एक बहुत ही प्यारा Aquarium बना हुआ है। हम बोट से उसी द्वीप पर पहुँचे। अंदर गए तो देखा तरह-तरह की रंग-बिरंगी मछलियाँ तैर रही थीं। रश्मि ने तुरंत अपने फ़ोन से कुछ तस्वीरें खींचीं और बोली”अमित, यह जगह तो बच्चों के साथ आने के लिए भी बहुत बढ़िया है!” सच कहूँ तो एक्वेरियम आकार में भले ही बहुत बड़ा न हो, लेकिन झील के बीचों-बीच एक टापू पर बने होने की वजह से यहाँ पहुँचने का अनुभव ही एकदम अलग और ख़ास लगता है।
वैसे, अगर आपको Bhimtal Lake का भौगोलिक इतिहास और आंकड़े पसंद हैं, तो इसके Wikipedia पर भी अच्छी जानकारी मिल जाती है, जहाँ इसे कुमाऊँ क्षेत्र की सबसे बड़ी झील और इसके बीच स्थित इस एक्वेरियम आलैंड के बारे में बताया गया है।
बोटिंग का मज़ा लेने के बाद हम किनारे-किनारे पैदल टहलने निकले। झील के पास ही ऐतिहासिक Victoria Dam स्थित है, जो ब्रिटिश ज़माने में सन् 1883 में बनाया गया था। यह बाँध झील के पानी के स्तर को कंट्रोल करता है। बाँध के ऊपर खड़े होकर जब आप झील को देखते हैं, तो नज़ारा और भी शानदार नज़र आता है।
उस वक्त शाम ढल रही थी और ढलते सूरज की सुनहरी किरणें झील की लहरों पर बिखर रही थीं। मैंने शांत पानी पर चमकती उस सुनहरी रोशनी को देखते हुए रश्मि से कहा देख रश्मि, ऐसी जगहों पर आकर ही अहसास होता है कि हमारी ज़िंदगी सिर्फ़ दफ़्तर की फ़ाइलों, डेडलाइंस और शहर के ट्रैफ़िक तक सीमित नहीं है… ज़िंदगी में इससे परे भी बहुत कुछ खूबसूरत है।
भीमेश्वर महादेव मंदिर और हिडिम्बा पर्वत का अनुभव

अगर आप भीमताल आ रहे हैं, तो Bhimeshwar Mahadev Temple जाना बिल्कुल मत भूलिएगा। यह ऐतिहासिक मंदिर झील के बिल्कुल किनारे ही स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसका निर्माण महाभारत काल में भीम ने करवाया था, जबकि इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि 17वीं सदी में चंद राजवंश के राजा बाज बहादुर चंद ने इसका पुनर्निर्माण कराया था।
हम लोग जब मंदिर प्रांगण में पहुँचे, तो वहाँ का माहौल बेहद शांत और पवित्र था। अंदर बैठकर हमने थोड़ी देर आँखें बंद करके प्रार्थना की। मंदिर के बाहर विशालकाय, पुराने पेड़ों की ठंडी छाया है, जहाँ से सामने बहती झील और पीछे खड़े विशाल पहाड़ साफ़ नज़र आते हैं। सच कहूँ तो वहाँ बैठकर जो मानसिक शांति मिलती है, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
अगर आपको थोड़ा एडवेंचर पसंद है और प्रकृति के और करीब जाना चाहते हैं, तो मंदिर दर्शन के बाद Hidimba Parvat का ट्रेक ज़रूर करें। यह लगभग 2 किलोमीटर का बेहद आसान और खूबसूरत ट्रेक है। अगर आप महादेव के भक्त है और उत्तराखंड में है तो केदारनाथ धाम को भी जा सकते है।
हम दोनों अगली सुबह-सुबह ही हिडिम्बा पर्वत के लिए निकल पड़े थे। रास्ते भर चीड़ (Pine) के घने जंगल, भीगी मिट्टी की खुशबू और पंछियों की मीठी चहचहाहट हमारा साथ दे रही थी। बीच में चढ़ाई चढ़ते-चढ़ते रश्मि थोड़ा थक गई, तो हम एक चट्टान पर बैठकर पानी पीने लगे। फिर जब हम ऊपर चोटी पर पहुँचे और वहाँ से नीचे का नज़ारा देखा… तो रश्मि के मुँह से बस यही निकला “अमित, अब समझ आया कि लोग पहाड़ों को धरती का स्वर्ग क्यों कहते हैं!”
सच में भाई, हिडिम्बा पर्वत की चोटी से जो 360-डिग्री व्यू मिलता है, वो अद्भुत है! वहाँ से दूर सातताल की झीलों की सुंदर झलक भी देखने को मिलती है।
भीमताल के आसपास घूमने की सबसे बेहतरीन जगहें
अगर आप Bhimtal आए हैं और आपके पास थोड़ा और वक़्त है, तो आसपास की खूबसूरत जगहों को छोड़ना बिल्कुल बेवकूफ़ी होगी! भीमताल के एकदम पास ही नौकुचियाताल (Naukuchiatal) है, जो यहाँ से मुश्किल से 5 किलोमीटर की दूरी पर है।

इस जगह की ख़ासियत यह है कि इस झील के नौ कोने यानी Nine Corners हैं, इसीलिए इसे ‘नौकुचियाताल’ कहते हैं। यह झील काफी गहरी है लगभग 40 मीटर तक! यहाँ भी बोटिंग का बेहतरीन अनुभव मिलता है और अगर मौसम सही हो, तो आपको पैराग्लाइडिंग/पैरासेलिंग जैसी एडवेंचर एक्टिविटीज़ भी करने को मिल जाती हैं। हम लोग अगले दिन सुबह ही नौकुचियाताल चले गए थे। हालाँकि हमने पैरासेलिंग नहीं की, बस शांति से बोटिंग का आनंद लिया और किनारे बैठकर चाय की चुस्की लेते हुए ढेरों बातें कीं।
नौकुचियाताल के अलावा, Sattal (सातताल) तो यहाँ की जान है, जहाँ जाना हमारा अभी बाकी है। सातताल में सात छोटी-छोटी प्राकृतिक झीलों का समूह है जैसे राम ताल, सीता ताल, लक्ष्मण ताल आदि। पक्षियों के शौकीनो के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। ख़ासकर सर्दियों में यहाँ दूर-देशों से प्रवासी पक्षी आते हैं। वैसे, भीमताल में भी पक्षी बहुत दिख जाते हैं हमने घूमते-घूमते कई बुलबुल, पहाड़ी कौए और कुछ ऐसे अजीब-अनोखे रंग-बिरंगे पक्षी देखे जिन्हें देखकर रश्मि एकदम खुश हो गई!
अगर आपको आसपास के ट्रेक्स और बाकी अट्रैक्शन्स की और पूरी लिस्ट चाहिए, तो आप भारत सरकार की पर्यटन वेबसाइट Incredible India Bhimtal पर भी देख सकते हैं, जहाँ आसपास के ट्रेकिंग रूट्स और दर्शनीय स्थलों की बढ़िया जानकारी दी गई है।
भीमताल में खाने-पीने और रहने की व्यवस्था
अब बात करते हैं पेट पूजा और रुकने की!
भीमताल में आपको सादा और स्वादिष्ट लोकल कुमाऊँनी खाना आसानी से मिल जाएगा जैसे पहाड़ी दाल, चावल, हरी सब्ज़ियाँ और यहाँ के ख़ास ‘आलू के गुटके’। झील के किनारे बने छोटे-छोटे कैफ़े में गरम-गरम मैगी, पकौड़े और चाय का मज़ा तो अलग ही है। हमने एक जगह ताज़ी ट्राउट फ़िश (Trout Fish) ट्राई की, जिसका स्वाद बेहतरीन था। रश्मि वेज खाती है, तो उसने कुमाऊँनी थाली मंगवाई कम मसालों वाला एकदम सादगी भरा पहाड़ी स्वाद! वैसे, पास के भोवाली बाज़ार में फ्रूट्स बहुत ताज़े मिलते हैं। मौसम के हिसाब से सेब, आड़ू और प्लम (आलू बुखारा) मिल जाते हैं, तो हमने भी रास्ते के लिए कुछ फल ख़रीद लिए थे।
रहने की बात करें तो यहाँ बजट होटल्स से लेकर लग्ज़री रिसॉर्ट्स तक सब मौजूद हैं। Lake View वाले कमरों का किराया थोड़ा ज़्यादा होता है, लेकिन खिड़की खोलते ही झील का नज़ारा देखकर वो पैसा वसूल लगता है। हमने एक बढ़िया मिड-रेंज होटल चुना था।
अगर आप लोकल कल्चर महसूस करना चाहते हैं, तो होमस्टे सबसे बेस्ट ऑप्शन हैं। वहाँ ठहरने का एक फायदा यह भी है कि लोकल परिवारों के साथ बातचीत हो जाती है। हमारे होमस्टे वाले एक बुज़ुर्ग अंकल से बात हुई, तो उन्होंने चाय पिलाते-पिलाते भीमताल के पौराणिक इतिहास और अंग्रेज़ों के ज़माने की कई दिलचस्प कहानियाँ सुना डालीं!
Best Time to Visit Bhimtal और मौसम का हाल
अब सबसे ज़रूरी सवाल भीमताल आने का सबसे सही समय कौन सा है?
वैसे तो भीमताल का मज़ा पूरे साल लिया जा सकता है, लेकिन मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के महीने यहाँ आने के लिए सबसे बेस्ट माने जाते हैं।
गर्मियों के दौरान यहाँ का मौसम बेहद सुहावना रहता है तापमान लगभग 15°C से 25°C के बीच रहता है, जो मैदानी इलाकों की चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए एकदम परफेक्ट है। सर्दियों (दिसंबर से फरवरी) में यहाँ अच्छी-खासी ठंड पड़ती है और सुबह-शाम धुंध व कोहरा छाया रहता है, जो कपल्स और विंटर-लवर्स को खूब भाता है।
रही बात बारिश (मानसून) की, तो इस दौरान पूरे पहाड़ हरे-भरे हो जाते हैं, झरने जी उठते हैं और नज़ारा बेहद खूबसूरत लगता है। लेकिन हाँ, बारिश में सड़कें थोड़ी फिसलन भरी हो जाती हैं और लैंडस्लाइड का ख़तरा रहता है। हम लोग जब पहुँचे तो हल्की रिमझिम फुहारें पड़ रही थीं, इसलिए हमें तो बड़ा मज़ा आया! लेकिन अगर आप आ रहे हैं, तो बहुत तेज़ बारिश के मौसम से थोड़ा बचना ही बेहतर होगा।
उत्तराखंड टूरिज्म की ऑफिशियल साइट पर भी मार्च से जून और शरद ऋतु के महीनों को ही यहाँ घूमने के लिए सबसे मुफ़ीद समय बताया गया है।
मेरे व्यक्तिगत अनुभव, कुछ मज़ेदार पल और काम की बातें
अब चलते-चलते अपने अनुभव से निकली कुछ ऐसी काम की बातें (Tips) बता देता हूँ, जो भीमताल आते वक्त आपके बहुत काम आएँगी:
- कैश साथ रखें: पहाड़ों में कभी-कभी नेटवर्क धोखा दे जाता है, इसलिए जेब में थोड़ा कैश ज़रूर रखें ताकि UPI न चलने पर फँस न जाएँ।
- आरामदायक जूते: यहाँ घूमना-टहलना बहुत पड़ता है, इसलिए हील्स या भारी जूतों की जगह आरामदायक स्पोर्ट्स शूज़ ही पहनें।
- प्लास्टिक कम इस्तेमाल करें: भाई, यह खूबसूरत झील हमारी ही संपत्ति है, इसे साफ़ रखने में मदद करें और कचरा डस्टबिन में ही डालें।
- लोकल लोगों से घुलो-मिलो: यहाँ के लोग बहुत सीधे और मददगार हैं। रास्ते या खाने की सलाह के लिए बेझिझक उनसे बात करें।
- लाइफ़ जैकेट ज़रूर पहनें: बोटिंग करते वक्त मज़ाक-मस्ती अपनी जगह है, पर सुरक्षा के लिए लाइफ़ जैकेट हमेशा पहनकर रखें।
- रात में ज़्यादा दूर न निकलें: पहाड़ों पर रात को जल्दी सन्नाटा छा जाता है, इसलिए देर रात अकेले अनजान रास्तों पर घूमने से बचें।
अब थोड़ी दिल की बात…
रश्मि के साथ यह ट्रिप सच में हमेशा के लिए दिल में बस गई है। कैंची धाम में जब अचानक ज़ोरदार बारिश हुई थी और हम दोनों एक ही छाते के नीचे ठिठुरते हुए हँस रहे थे, वहाँ से भोवाली में ठहरना और फिर Bhimtal पहुँच जाना, यह पूरा सफ़र यादों का एक खूबसूरत कारवाँ बन गया। यहाँ आकर समझ आया कि ज़िंदगी की असली और छोटी-छोटी ख़ुशियाँ कहाँ छिपी होती हैं।
एक शाम हम दोनों झील किनारे एकदम चुपचाप बैठे थे। सन्नाटा इतना गहरा था कि सिर्फ़ पानी की लहरों की आवाज़ आ रही थी। रश्मि ने धीरे से कहा “यार अमित, शहर वापस जाकर यह शाम बहुत याद आएगी।”
मैंने मुस्कुराकर कहा “हाँ याद तो आएगी, लेकिन यह सोचकर भी अच्छा लग रहा है कि इस सुकून को दोबारा जीने के लिए हमें यहाँ फिर लौटकर आना पड़ेगा!”
सच कहूँ तो Bhimtal सिर्फ़ नक्शे पर कोई घूमने की जगह भर नहीं है, यहाँ आकर इंसान का भारी मन एकदम हल्का हो जाता है।
अगर आप Family Trip प्लान कर रहे हैं, तो बच्चों को एक्वेरियम और बोटिंग बहुत पसंद आएगी। अगर Couples हैं, तो झील किनारे की ठंडी और रोमांटिक शामें आपका दिल जीत लेंगी। और अगर मेरी तरह Solo Traveler हैं, तो हिडिम्बा पर्वत का ट्रेक, बर्ड वॉचिंग और यहाँ की शांति आपके लिए बेस्ट है यह जगह अकेले घूमने वालों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।
तो कब बना रहे हैं भीमताल का प्लान?
तो दोस्तों, यह थी हमारी भीमताल की एक छोटी सी, खूबसूरत और दिल के बेहद करीब रहने वाली कहानी।
कैंची धाम के पावन दर्शन से शुरू हुआ यह सफर, भोवाली की ठंडी हवाओं से गुजरता हुआ Bhimtal के किनारे आकर जैसे ठहर सा गया है। यहाँ की रिमझिम बारिश, चाय की चुस्कियाँ, रश्मि के साथ वो अनगिनत बातें और झील के शांत पानी का जादू यह सब कुछ मैं अपने साथ यादों के बक्से में बंद करके वापस ले जा रहा हूँ।
अगर आपकी ज़िंदगी भी शहर की भागदौड़, काम के तनाव और गाड़ियों के हॉर्न के बीच उलझ गई है, तो मेरी मानिए बैग उठाइए और Bhimtal की तरफ निकल पड़िए। यह जगह आपको सिर्फ़ एक नया नज़ारा ही नहीं देगी, बल्कि आपके अंदर के शोर को शांत करके एक नई ताज़गी से भर देगी।
उम्मीद है आपको ‘खूबसूरत भारत’ की यह यात्रा और मेरा यह अनुभव पसंद आया होगा। अगर आपके मन में भीमताल ट्रिप को लेकर कोई भी सवाल हो चाहे रुकने की बात हो, रास्तों की या बजट की तो नीचे कमेंट करके बेझिझक पूछ लेना, आपका भाई जवाब ज़रूर देगा!
बहुत जल्द मिलेंगे सातताल की अगली कहानी के साथ। तब तक घूमते रहिए, मुस्कुराते रहिए और अपने खूबसूरत भारत को महसूस करते रहिए!
आपका दोस्त, अमित!





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