क्या सच में ऐसा है Chhattisgarh? एक लोकल की नज़र से देखिए भारत का सबसे अनछुआ राज्य

लाल चींटी की चटनी से लेकर 75 दिन का दशहरा: Chhattisgarh के वो रहस्य जो किताबों में नहीं मिलते!

जब भी हम भारत की सैर पर निकलते हैं, तो अक्सर हमारी नज़रें ऊंचे बर्फीले पहाड़ों या समंदर के किनारों पर टिक जाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी उस धरती की ओर रुख किया है, जिसे सही मायनों में Heart of India और Green Paradise कहा जाता है? जी हां, आज हम बात कर रहे हैं Chhattisgarh Tourism की एक ऐसा राज्य जो अपनी Natural Beauty, घने Dense Forests और Tribal Culture के लिए दुनिया भर में एक खास पहचान रखता है।

​ज़रा सोचिए, विशाल जंगलों के बीच गूंजती Chitrakote Waterfalls जिसे Niagara Falls of India भी कहा जाता है की गर्जना, पाषाण काल से अपनी पहचान बनाए बैठी Kanger Ghati National Park की Kutumsar Caves, और सदियों पुरानी Bastar Art और Culture की वो सौंधी खुशबू जो आपको सीधे मिट्टी से जोड़ देती है। चाहे Sirpur Heritage Sites का प्राचीन इतिहास हो या बस्तर के अनछुए रास्ते, यहां की हर पगडंडी पर एक नई कहानी इंतज़ार कर रही है।

​अगर आप भी कुछ हटके Offbeat Travel Destinations in India तलाश रहे हैं, तो ज़रा ठहरिए! बैग पैक कीजिए और तैयार हो जाइए, क्योंकि आज खूबसूरत भारत के इस सफर में हम आपको ले चल रहे हैं Chhattisgarh Top Tourist Places की एक रोमांचक सैर पर, जिन्हें देखकर आप बस एक ही बात कहेंगे‘वाह, सच में अद्भुत है हमारा भारत!’

Chhattisgarh के अनसुने ऐतिहासिक पन्ने

नमस्ते यारों! मैं हूँ आपका दोस्त अमित, और आज खूबसूरत भारत के लिए यह दिल से लिखी गई बात आपके सामने रख रहा हूँ। सच कहूँ तो काफी दिनों से मन में एक ही ख्याल घूम रहा था कि अपनी मातृभूमि, यानी हमारे प्यारे Chhattisgarh की वो सौंधी खुशबू और असली पहचान आप सब तक पहुँचाऊँ।

​यहाँ पैदा हुआ, यहीं पला-बढ़ा, इसलिए जानता हूँ कि यहाँ की Natural Beauty, घने Dense Forests की ताज़गी, लोगों की सादगी और झरनों के पानी की वो ज़ोरदार आवाज़ दिल को कितना सुकून देती है। जब भी बाहर से कोई दोस्त यहाँ आता है, तो बस एक ही बात कहता है भाई, ये जगह तो सीधे दिल में उतर जाती है!” तो मैंने सोचा, क्यों न अपने घर के दरवाज़े आपके लिए खोलूँ और Chhattisgarh Tourism के हर एक रंग से आपको रूबरू कराऊँ?

​यहाँ के Ancient History से लेकर Top Tourist Places in Chhattisgarh तक, ज़ायकेदार Local Food Culture से लेकर रंग-बिरंगे Tribal Festivals तक सब कुछ एकदम अपने अंदाज़ में बताऊंगा। कोई किताबी ज्ञान या भारी-भरकम शब्द नहीं, बल्कि जैसे दो पुराने यार चाय की चुस्की के साथ बतियाते हैं, बिल्कुल वैसी ही Travel Storytelling होगी। कहीं हँसी-मज़ाक चलेगा, कहीं बात दिल को छू जाएगी, तो कहीं इतिहास की गहराई में जाकर थोड़े गंभीर भी होंगे।

​तो बस, अपनी कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए और हमारे साथ चलिए Best Offbeat Destinations of India में गिने जाने वाले इस हरे-भरे राज्य की एक यादगार सैर पर!

छत्तीसगढ़ का संक्षिप्त परिचय

​सबसे पहले तो एक बात दिल से साफ़ कर दूँ यार जब भी Chhattisgarh Tourism का नाम आता है, तो अक्सर लोग सोच बैठते हैं कि यहाँ बस घने जंगल और आदिवासी समाज ही है। हाँ भाई, समृद्ध Tribal Culture और हरियाली तो हमारी जान है ही, लेकिन हमारा छत्तीसगढ़ सिर्फ इतने में ही नहीं सिमटा है। इसका कैनवास बहुत बड़ा और बेहद खूबसूरत है।

​हमारा यह प्यारा राज्य 1 November 2000 को Madhya Pradesh से अलग होकर बना था। लेकिन इसकी जड़ें सदियों पुरानी हैं। प्राचीन काल में इसे Dakshin Kosala के नाम से जाना जाता था, और रामायण काल से लेकर Haihaya Dynasty के राजाओं तक, इस धरती ने गौरवशाली इतिहास देखा है।

​अब नाम की बात करें, तो इसके पीछे भी एक गजब की कहानी है। इस क्षेत्र में कभी 36 Ancient Forts यानी छत्तीस मजबूत गढ़ हुआ करते थे, और वहीं से इसका नाम पड़ा Chhattisgarh। सोच कर देखिए, छत्तीस किले! आज भी कई ऐतिहासिक कोणों पर इनके अवशेष उस दौर की भव्यता बयां करते हैं। चैतुरगढ किला इसी में से एक है।

​बचपन में जब दादा जी के पास बैठता था, तो वे बड़े चाव से सुनाते थे कि कैसे पुराने दौर में यहाँ Buddhism और Shaivism दोनों ही परंपराएं एक साथ फली-फूलीं। यकीन न आए तो कभी Sirpur Heritage Sites का रुख कीजिए वहाँ खुदाई में निकले प्राचीन Buddhist Monasteries और नक्काशीदार मंदिर देखकर आपकी आँखें खुली की खुली रह जाएंगी।

​अगर आप Indian History and Heritage को बारीकी से समझने के शौकीन हैं, तो Encyclopedia Britannica जैसी जगहों पर भी Chhattisgarh History के बारे में काफी गहरा विवरण मिल जाता है। लेकिन मेरा मानना है कि किताबों से पढ़कर जानने और खुद इस पावन मिट्टी पर कदम रखकर महसूस करने में ज़मीन-आसमान का फर्क है!

छत्तीसगढ़ का इतिहास थोड़ा और विस्तार से

​अगर Chhattisgarh History के पन्नों को थोड़ा और गहराई से पलटें, तो समझ आता है कि हमारी यह पावन भूमि सिर्फ जंगलों का घर नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यताओं का एक प्रमुख केंद्र रही है।

​पौराणिक काल से शुरू करें, तो प्राचीन ग्रंथों में इस पूरे भूभाग को Dakshin Kosala और इसके घने जंगलों को Dandakaranya Forest कहा गया है। मान्यता है कि Ramayana Era में अपने 14 वर्षों के वनवास के दौरान भगवान श्री राम ने एक लंबा समय इसी दंडकारण्य (वर्तमान बस्तर और आसपास के क्षेत्र) में बिताया था। यहाँ के कण-कण में प्रभु राम की यादें बसी हैं चाहे वह शivrinarayan में माता शबरी का आश्रम हो या राम वन गमन पथ से जुड़े अनगिनत तीर्थ।

​इतिहास के अगले पड़ाव पर नजर डालें तो Maurya Empire और Gupta Dynasty के दौर में भी यह क्षेत्र राजनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से बेहद खास रहा। इसके बाद मध्यकाल में यहाँ Haihaya Dynasty और कलचुरी राजाओं ने सदियों तक शासन किया। रतनपुर और रायपुर को राजधानी बनाकर उन्होंने ऐसे-ऐसे नक्काशीदार भव्य मंदिर और मजबूत Ancient Forts बनवाए, जिनके शानदार अवशेष आज भी इतिहास की गवाही देते हैं।

​समय बदला और 18वीं सदी के मध्य में यहाँ Maratha Empire (भोंसले शासकों) का अधिकार हुआ, और फिर 1854 में यह इलाका British Rule के अधीन आ गया। अंग्रेजों के दौर में भी हमारे छत्तीसगढ़ के वीरों ने कभी झुकना स्वीकार नहीं किया। 1857 की क्रांति में शहीद वीर नारायण सिंह का बलिदान हो या बस्तर का ऐतिहासिक Bhumkal Rebellion (1910), यहाँ के आदिवासियों और स्थानीय लोगों ने अपनी आजादी और जल-जंगल-जमीन के लिए अंग्रेजी हुकूमत की ईंट से ईंट बजा दी थी।

​1947 में देश की आजादी के बाद यह क्षेत्र विशाल Madhya Pradesh का हिस्सा बना, और फिर स्थानीय अस्मिता, विकास और संस्कृति को नई पहचान देने के लिए 1 November 2000 को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में उभरा।

​आज का आधुनिक छत्तीसगढ़ Coal Mining, Iron Ore Reserves और भिलाई जैसे विशाल Steel Plants के साथ देश का प्रमुख इंडस्ट्रियल हब बन चुका है। लेकिन सबसे खूबसूरत बात जानते हैं क्या है यार? औद्योगिकीकरण और विकास की इस तेज रफ्तार के बावजूद, हमारे छत्तीसगढ़ ने अपने घने जंगलों की हरियाली, नदियों की पवित्रता और सदियों पुरानी जनजातीय संस्कृति की सादगी को आज भी सीने से लगाकर जिंदा रखा है।

भूगोल, जलवायु और प्राकृतिक सौंदर्य

​अगर Geography of Chhattisgarh की बात करें, तो यह राज्य बिल्कुल Central India के दिल में बसा हुआ है। इसके उत्तर में Uttar Pradesh और Jharkhand, पूर्व में Odisha, दक्षिण में Telangana, और पश्चिम में Maharashtra और Madhya Pradesh की सीमाएं लगती हैं। राज्य की धड़कन और राजधानी है Raipur। यहाँ का भूभाग ऐसा है कि आपको एक ही राज्य में उपजाऊ मैदानी इलाके, ऊँची-नीची पहाड़ियाँ और रहस्यमयी घने जंगल सब देखने को मिल जाते हैं।

Chhattisgarh geography in hindi

​आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन राज्य का लगभग 44% Forest Cover से ढका हुआ है, जो इसे भारत के सबसे हरे-भरे राज्यों में शामिल करता है। नदियाँ तो मानो यहाँ की नसों में बहती हैं Mahanadi River, Indravati River, Hasdeo River, और Shivnath River जैसी जीवनदायिनी नदियाँ इस धरती की असली जान हैं।

मै जहां रहता हूँ वहां से Hasdeo River बहती है। इसके बारे में मैने एक वीडियो भी बनाया है आप चाहे तो देख सकते है।

​अब बात करें यहाँ के मौसम यानी Climate and Weather की, तो गर्मियों में पारा कभी-कभी 45 से 48 डिग्री तक पहुँच जाता है। लेकिन जैसे ही Monsoon Season दस्तक देता है, पूरी प्रकृति मानो हरी चादर ओढ़कर खिल उठती है।

​मुझे आज भी याद है, बचपन में जब पहली बारिश की फुहारें गिरती थीं, तो हम सीधे गाँव के तालाबों की तरफ भागते थे। छपाक से पानी में कूदना, तैरना और फिर घर लौटने पर माँ की वो मीठी डाँट “गंदे पानी में क्यों कूदे, बीमार पड़ जाओगे!” सच कहूँ, उस बेफिक्र मस्ती का मज़ा ही कुछ अलग था।

​यहाँ के Dense Sal और Teak Forests इतने गहरे और शांत हैं कि कदम रखते ही लगता है किसी दूसरी जादुई दुनिया में आ गए हों। ऊंचे-ऊंचे हरे-भरे पेड़, अनगिनत परिंदों की चहचहाहट, और चेहरे को छूकर गुजरती ठंडी हवा यार, शहर की सारी थकान और तपती गर्मी पल भर में काफूर हो जाती है!

यहाँ के लोग, आदिवासी संस्कृति और रहन-सहन

​अब बात करते हैं यहाँ की असली रूह यानी यहाँ के सीधे-सादे और प्यारे लोगों की। छत्तीसगढ़ की कुल आबादी में हमारे Indigenous Tribal Communities का एक बहुत बड़ा और बेहद खूबसूरत हिस्सा है। Gond Tribe, Muria, Maria, Halba, Bhatra… कितने नाम गिनाऊँ यार! इन समुदायों का पूरा जीवन, इनकी भाषा, इनकी परंपराएं और Traditional Lifestyle सीधे तौर पर कुदरत की गोद से जुड़े हुए हैं।

Chhattisgarh culture

​मुझे अपने कॉलेज के दिनों का एक वाकया आज भी याद है। एक बार मैं दोस्तों के साथ Bastar Tribal Region के एक सुदूर गाँव में ठहरा था। रात के वक्त जब चारों तरफ गहरा सन्नाटा था, हम सब अलाव (Bonfire) के इर्द-गिर्द बैठे थे। गाँव के बुजुर्ग अपनी मीठी बोली में Folk Tales सुना रहे थे कि कैसे जंगल के देवता उनकी हर कदम पर रक्षा करते हैं और कैसे Mahua Flowers से पारंपरिक पेय तैयार किया जाता है। उस रात तारों से भरे आसमान के नीचे जो रूहानी सुकून महसूस हुआ था, वो आज भी मेरे दिल में ताज़ा है।

​उसी रात गाँव की महिलाओं ने हमें बस्तर की मशहूर Chaprah Chutney यानी लाल चींटियों की चटनी परोसी। सच बताऊँ यार, पहली नज़र में तो मेरे होश उड़ गए कि भाई, चींटियाँ कैसे खाएँगे? लेकिन जब हिम्मत करके एक निवाला चखा, तो ज़ुबान पर जो तीखा और खट्टा चटकारा लगा, उसने सच में हैरान कर दिया! यह अनोखा Tribal Cuisine पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। अगर आप Tribal Culture of Chhattisgarh और उनकी समृद्ध जीवनशैली को और विस्तार से समझना चाहते हैं, तो Incredible India के आधिकारिक पोर्टल पर काफी बेहतरीन और प्रामाणिक जानकारी मिल जाती है।

​यहाँ के लोग दिखने में जितने सादे हैं, दिल के उतने ही बड़े और दरियादिल हैं। अगर रास्ते में किसी अनजान से भी पता पूछ लो, तो वो सिर्फ रास्ता ही नहीं बताएगा, बल्कि अपने घर ले जाकर चाय पिलाए बिना जाने नहीं देगा।

​यहीं बस्तर में आपको प्राचीन Ghotul System जैसी अनूठी सामाजिक व्यवस्था के निशान भी मिलते हैं, जो दर्शाती है कि सदियों पहले भी यहाँ का समाज कितना प्रगतिशील और खुला था। युवा लड़के-लड़कियाँ वहाँ एक साथ आते थे, Tribal Dance & Music के ज़रिए अपनी कला का इज़हार करते थे और एक-दूसरे को समझते थे। आज आधुनिकता के दौर में भी यहाँ की हवा में वही सादगी, अपनापन और खुलापन पूरी तरह ज़िंदा है।

छत्तीसगढ़ी खाना-पीना और स्वाद की कहानियाँ

​अब जब खाने की बात निकल ही आई है यार, तो आपको बता दूँ कि हमारे छत्तीसगढ़ को यूँ ही पूरे देश में Rice Bowl of India यानी धान का कटोरा नहीं कहा जाता। यहाँ की हर थाली में चावल की महक और उसका जादू बसता है।

Chhattisgarh foods

​सबसे पहले बात करते हैं हमारे राज्य के सबसे मशहूर और देसी सुपरफूड Bore Baasi की! रात के पके चावल को पानी में भिगोकर रखा जाता है और अगली सुबह उसमें थोड़ा सा दही या छाछ मिलाकर खाया जाता है। चिलचिलाती धूप और तपती गर्मियों में जब आप Bore Baasi के साथ एक टुकड़ा कच्चा प्याज, हरी मिर्च, आम का अचार और थोड़ा सा सिलबट्टे पर पिसा नमक लेते हैं ना… तो कसम से, पेट तो तृप्त होता ही है, पूरा बदन अंदर से एकदम ठंडा हो जाता है।

​यहाँ के Traditional Snacks का ज़ायका भी लाजवाब है। चाहे भाप में पका कुरकुरा Fara (चावल के आटे में चना दाल की स्टफिंग) हो, गरमा-गरम चटपटा Chila (चावल और उड़द दाल का देसी पैनकेक), या फिर बस्तर की मशहूर मिक्स-वेज करी Aamat। इसके अलावा कम तेल में बनी Bafauri, भाप में पकी Muthia, और मीठे में खस्ता Khurmi व Dehori… भाई, नाम लेते ही मुँह में पानी आ जाए!

​मुझे आज भी याद है, बचपन में सर्दियों की शामों को माँ चूल्हे की धीमी आँच और अंगारों पर Angakar Roti बनाती थीं। चावल के आटे की वो मोटी, सोंधी रोटी, और उसके ऊपर घर का बना ताजा देसी घी… यार, उस स्वाद की बराबरी दुनिया का कोई फाइव-स्टार शेफ भी नहीं कर सकता! जब भी बाहर से कोई दोस्त मेरे घर आता है, तो पहले तो इन देसी नामों को सुनकर हैरान होता है कि “भाई, ये क्या चीज़ है?” लेकिन एक बार निवाला चखने के बाद वो पूरी की पूरी प्लेट साफ़ कर देता है।

​सर्दियों के दिनों में तिल के लड्डू, गुड़ की मिठास और खुरमी की खुशबू से पूरा घर महक उठता है। आज भी जब मैं शहर की भागदौड़ से थककर घर लौटता हूँ, तो माँ बड़े प्यार से थाली सजाकर सामने रख देती हैं और मुस्कुराते हुए कहती हैं “बेटा, ये सोंधापन और प्यार तेरे शहर के डिब्बाबंद खाने में कहाँ मिलेगा!” और सच कहूँ यार, माँ की इस बात में सौ आने सच्चाई है।

​अगर आप इस अनोखे और पौष्टिक खान-पान की पूरी लिस्ट खंगालना चाहते हैं, तो Chhattisgarhi Cuisine के पेज पर भी कई पारंपरिक व्यंजनों और उनकी सामग्रियों का बढ़िया ब्योरा मिल जाता है।

त्योहार, नृत्य और संगीत की रंगीन दुनिया

​त्योहार और लोक कलाएं तो हमारे छत्तीसगढ़ की असली धड़कन हैं यार! यहाँ का हर पर्व प्रकृति, खेती और मिट्टी से जुड़ा हुआ है।

Chhattisgarh festival

​सबसे पहले बात करते हैं Hareli Festival की, जो किसानों का सबसे पहला और बड़ा त्योहार है। सावन के महीने यानी जुलाई-अगस्त में जब चारों तरफ हरियाली की चादर बिछ जाती है, तब यह मनाया जाता है। किसान अपने हल, कुदाल और नागर जैसे कृषि औजारों की पूजा करते हैं, बैलों को नहला-धुलाकर सजाते हैं, और पूरा गाँव उत्साह से झूम उठता है। बच्चे लकड़ी की गेड़ी (बांस की डंडियों पर बने पैर) पर चढ़कर संतुलन साधते हुए गाँव की गलियों में दौड़ लगाते हैं वो नज़ारा देखने लायक होता है!

​और जब बात आती है Bastar Dussehra की, तो भाई, इसका मुकाबला पूरी दुनिया में कहीं नहीं है। यह दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला लोक उत्सव है, जो पूरे 75 Days Celebration तक जगदलपुर में चलता है। यहाँ रावण का पुतला नहीं जलता, बल्कि कुलदेवी Maa Danteshwari की आराधना होती है। विशालकाय लकड़ी के दोमंजिला रथ को हजारों आदिवासी भाई अपने हाथों से खींचते हैं। मुझे याद है, एक बार मैं बस्तर दशहरे के दौरान वहाँ मौजूद था। भीड़ इतनी थी कि तिल धरने की जगह नहीं थी, लेकिन ढोल-नगाड़ों की थाप और उस आध्यात्मिक माहौल में जो ऊर्जा थी, उसने सीधे रोंगटे खड़े कर दिए थे!

​अगर आप छत्तीसगढ़ की इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आयोजनों को करीब से देखना चाहते हैं, तो Chhattisgarh Tourism Board के आधिकारिक पोर्टल पर पूरी जानकारी और वार्षिक कैलेंडर चेक कर सकते हैं। इसके अलावा, प्रयागराज की तर्ज पर महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पवित्र संगम पर लगने वाला Rajim Kumbh Mela भी आस्था का एक विशाल केंद्र है।

​अब बात करते हैं यहाँ के Folk Dance & Music की, जिसके बिना छत्तीसगढ़ की कहानी बिल्कुल अधूरी है।

​तंबूरे की एक तार पर महाभारत की गाथा को जीवंत कर देने वाली Pandwani Folk Art का जादू तो पूरी दुनिया देख चुकी है, जिसे महान कलाकार Padma Vibhushan Teejan Bai ने अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया। जब वे मंच पर तंबूरे को कभी गदा तो कभी धनुष बनाकर गाती हैं, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं!

​इसके साथ ही सतनामी समुदाय की भक्ति और हैरतअंगेज पिरामिड कला से भरा Panthi Dance, फसल पकने की खुशी में किया जाने वाला Karma Dance, यादव समाज का वीर रस से भरा Raut Nacha, और महिलाओं का सुरीला Sua Dance… ये सब मिलकर साबित करते हैं कि हमारे यहाँ जीवन कितना उत्सवधर्मी और रंगीन है।

​जब Pola Festival आता है, तो घर-घर में मिट्टी के नंदी बैल (पोरा) पूजे जाते हैं और बच्चे उन खिलौनों के साथ गलियों में खेलते हैं। सच कहूँ यार, सादगी और परंपराओं का ऐसा खूबसूरत संगम आपको कहीं और देखने को नहीं मिलेगा!

मुख्य पर्यटन स्थल और घूमने की जगहें

​अब आते हैं उस सबसे अहम बात पर, जिसका आपको सबसे ज़्यादा इंतज़ार था Top Tourist Places in Chhattisgarh!

​सच कहूँ तो यार, हमारे राज्य में घूमने-फिरने के लिए इतनी जादुई और खूबसूरत जगहें हैं कि अगर सबको एक-एक करके गिनाने बैठूँ, तो पूरी किताब लिखी जा सकती है। फिर भी, आपका देसी गाइड होने के नाते मैं पूरी कोशिश करूँगा कि छत्तीसगढ़ के सबसे शानदार, ऐतिहासिक और दिल छू लेने वाले नज़ारों की एक ऐसी लिस्ट आपके सामने रखूँ, जिसे देखकर आपका बैग खुद-ब-खुद पैक होने लगे।

Chhattisgarh tourist places in hindi

​तो चलिए, एक-एक करके चलते हैं उन जगहों पर जो आपके Chhattisgarh Travel Itinerary का सबसे यादगार हिस्सा बनने वाली हैं!

1. Chitrakote Waterfalls बस्तर का नियाग्रा

इंद्रावती नदी पर बना यह विशालकाय जलप्रपात Niagara Falls of India के नाम से मशहूर है। घोड़े की नाल के आकार में लगभग 90 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी जब नीचे सफेद धुंध और गर्जना पैदा करता है, तो वो नज़ारा देखकर आप दंग रह जाएंगे। खासकर मॉनसून और सर्दियों की शाम को ढलते सूरज की रोशनी में यहाँ का दृश्य सच में दिल जीत लेता है।

2. Sirpur Heritage Site इतिहास और आस्था का संगम

महानदी के किनारे बसा सिरपुर प्राचीन काल में दक्षिण कोसल की राजधानी हुआ करता था। यहाँ 7वीं शताब्दी का लाल ईंटों से बना भव्य Lakshman Temple, प्राचीन Buddhist Monasteries (विहार) और सुरंग टीला स्थित हैं। अगर आपको इतिहास, पुरातत्व और बारीक मूर्तिकला में दिलचस्पी है, तो सिरपुर आपके लिए किसी खजाने से कम नहीं है।

3. Kanger Ghati National Park and Kutumsar Caves

बस्तर के घने जंगलों में फैला यह नेशनल पार्क जैव विविधता का गढ़ है। यहाँ की सबसे रोमांचक जगह है Kutumsar Caves, जहाँ जमीन के नीचे गहरी अंधेरी गुफाओं में चूना पत्थर से बनी प्राकृतिक Stalagmites and Stalactites आकृतियां देखने को मिलती हैं। यहाँ मिलने वाली अंधी गुफा मछलियां (Blind Cave Fish) वैज्ञानिकों के लिए भी कौतूहल का विषय हैं। पास ही तीरथगढ़ जलप्रपात की खूबसूरती भी देखते ही बनती है।

4. Mainpat छत्तीसगढ़ का शिमला 

सरगुजा जिले में विंध्य पर्वतमाला पर समुद्र तल से 3500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर बसा मैनपाट अपनी ठंडी आबोहवा, हरे-भरे पठार और झरनों के लिए जाना जाता है। इसे ‘छोटा तिब्बत’ भी कहते हैं क्योंकि यहाँ तिब्बती शरणार्थियों की बड़ी आबादी और एक खूबसूरत बौद्ध मठ स्थित है। यहाँ की Jalpari Waterfall, फिश प्वाइंट और दलदली जमीन (Bouncing Land) सैलानियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। मेरे दोस्तो के साथ यंहा की टाइगर पॉइंट से जलजली तक, दोस्तों के साथ धमाकेदार ट्रैवल ट्रिप को आप भी देख सकते हैं

5. Maa Danteshwari Temple, Dantewada

शंखिनी और डंकिनी नदियों के पवित्र संगम पर स्थित यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। बस्तर क्षेत्र के लोगों और जनजातीय समाज के लिए माँ दंतेश्वरी सर्वोच्च आराध्य देवी हैं। बस्तर दशहरा के दौरान इस मंदिर का वैभव और धार्मिक माहौल देखने लायक होता है।

6. Bhoramdeo Temple छत्तीसगढ़ का खजुराहो

कबीरधाम (कवर्धा) जिले में मैकाल पर्वतमाला की तलहटी में स्थित यह 11वीं शताब्दी का नागर शैली का शिव मंदिर अपनी उत्कृष्ट और कामुक मूर्तिकला के लिए मशहूर है। चारों तरफ घने जंगल और शांत सरोवर के बीच पत्थरों पर तराशी गई बारीक नक्काशी उस दौर के कलचुरी और फणि नागवंश कालीन स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है।

7. Barnawapara Wildlife Sanctuary

महासमुंद और बलौदाबाज़ार जिले के पास स्थित यह अभयारण्य वाइल्डलाइफ और नेचर लवर्स के लिए बेस्ट वीकेंड गेटवे है। यहाँ जंगल सफारी के दौरान चीतल, सांभर, गौर (भारतीय बाइसन), तेंदुआ और सैकड़ों प्रजातियों के दुर्लभ पक्षी आसानी से देखने को मिल जाते हैं। मेरे और नवीन का बारनवापारा एक्साइटिंग बाइक ट्रिप को देख सकते है कैसे हम लोग जंगल में भटक गए थे।

8. Nandanvan Jungle Safari and Raipur Sightseeing

राजधानी रायपुर में स्वामी विवेकानंद सरोवर (बूढ़ा तालाब), पुरखौती मुक्तांगन (खुला जनजातीय संग्रहालय) और नया रायपुर में एशिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित Nandanvan Jungle Safari बच्चों और परिवारों के साथ घूमने के लिए बेहतरीन जगहें हैं।

9. Hasdeo Bango Dam, Korba (मिनीमाता जलाशय)

हसदेव नदी पर बना यह विशालकाय बांध छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण बांधों में से एक है। हरे-भरे जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस जलाशय का बैकवाटर देखने में किसी विशाल झील या समंदर जैसा अहसास कराता है। यहाँ के शांत पानी में बोटिंग का लुत्फ़ उठाना और सूर्यास्त के समय पानी पर बिखरती सुनहरी किरणों को देखना मन को असीम शांति देता है। यह परिवार और दोस्तों के साथ एक परफेक्ट पिकनिक और रिलैक्सिंग स्पॉट है। बहुत जल्द मै खूबसूरत भारत के यूट्यूब चैनल पर इस जगह की खुबसूरती को आप सब को दिखाने वाला हूं।

10. Khutaghat Dam, Bilaspur (खारंग जलाशय)

बिलासपुर से लगभग 35-40 किलोमीटर दूर रतनपुर के पास खारंग नदी पर स्थित खूंटाघाट डैम अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। जंगल और छोटी पहाड़ियों की तलहटी में बसा यह जलाशय मानसून और सर्दियों के समय सैलानियों से गुलजार रहता है। यहाँ पानी के बीच में बने छोटे-छोटे प्राकृतिक टापू और शांत वातावरण इसे फोटोग्राफी व डे-आउटिंग के लिए बिलासपुर संभाग का सबसे पसंदीदा ठिकाना बनाते हैं। जांजगीर से खूंटाघाट एक एक्साइटिंग बाइक यात्रा की कहानी को देखने के बाद आपको यकीन हो जायेगा कि क्यों ये सबका पसंदीदा जगह है।

11. Ratanpur Mahamaya Temple, Bilaspur

खूंटाघाट के बिल्कुल करीब स्थित रतनपुर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और धार्मिक राजधानी रहा है। कलचुरी राजा रत्नदेव द्वारा 11वीं शताब्दी में स्थापित Maa Mahamaya Devi Temple एक सिद्ध शक्तिपीठ है। यहाँ नवरात्र के दौरान लाखों दीपों की ज्योति प्रज्वलित की जाती है। मंदिर परिसर के आसपास कई प्राचीन कुंड, तालाब और ऐतिहासिक किले के खंडहर बिखरे हुए हैं जो इतिहास प्रेमियों को बेहद आकर्षित करते हैं।

12. Dongargarh Maa Bamleshwari Temple, Rajnandgaon

लगभग 1600 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित माँ बम्लेश्वरी का भव्य मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। ऊपर मुख्य मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियों के अलावा आधुनिक Ropeway Facility भी मौजूद है। पहाड़ी की चोटी से चारों ओर का विहंगम दृश्य और नीचे तलहटी में स्थित ‘छोटी बम्लेश्वरी मंदिर’ का शांत माहौल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भावविभोर कर देता है। वैसे तो माँ का दर्शन कई बार कर चुका हु लेकिन मेरे रिसेंटली ट्रिप के बारे यह देख सकते है। क्यों हर साल लाखों लोग जाते हैं डोंगरगढ़?

13. Gangrel Dam, Dhamtari (मिनी गोवा)

महानदी पर बना R.S. Sagar Dam (गंगरेल बांध) छत्तीसगढ़ का सबसे लंबा बांध है। यहाँ टूरिज्म बोर्ड द्वारा विकसित किया गया Bardia Water Tourism Resort और विशाल रेतीला किनारा पर्यटकों के बीच ‘छत्तीसगढ़ का गोवा’ कहलाता है। यहाँ जेट स्की, बनाना राइड, स्पीड बोट जैसी Water Sports Activities और लग्जरी कॉटेज स्टे की बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है।

14. Giraudpuri Dham, Balodabazar

सतनामी पंथ के प्रवर्तक संत गुरु घासीदास जी की पावन जन्मभूमि गिरौदपुरी में बना Jaitkham (जैतखाम) कुतुबमीनार से भी ऊंचा (लगभग 243 फीट) एक भव्य और आधुनिक स्थापत्य का प्रतीक है। यह दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए शांति और समानता का बड़ा केंद्र है। वहीं उत्तर-पश्चिम सीमा पर स्थित पेंड्रा-अमरकंटक का इलाका नर्मदा और जोहिला के उद्गम के करीब साल वनों से ढका बेहद खूबसूरत हिल-स्टेशन जैसा अनुभव कराता है।

15. Shivrinarayan (गुप्त तीर्थ और शबरी की पावन भूमि)

महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के त्रिवेणी संगम पर बसा Shivrinarayan छत्तीसगढ़ का प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक केंद्र है, जिसे ‘गुप्त तीर्थ’ भी कहा जाता है। यह वही पावन धरती है जहाँ रामायण काल में माता शबरी ने भगवान श्री राम को अपने मीठे और जूठे बेर खिलाए थे। यहाँ कलचुरी कालीन 10वीं-11वीं शताब्दी का भव्य Narah-Narayan Temple और प्राचीन Shabri Temple स्थित हैं, जहाँ पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी उस दौर की उत्कृष्ट स्थापत्य कला को दर्शाती है। हर साल माघ पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ महानदी के तट पर विशाल Shivrinarayan Mela लगता है, जहाँ दूर-दराज से लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने और इस पौराणिक संगम का दर्शन करने पहुँचते हैं। शिवरीनारायण के बारे मेरे और ज्यादा जानकारी के लिए ये देखिये

इन मशहूर जगहों के अलावा, अगर आपको भीड़-भाड़ से दूर छत्तीसगढ़ के कुछ छिपे हुए और अनछुए नज़ारे (Hidden Gems of Chhattisgarh) देखने हैं, तो अपनी लिस्ट में ये नाम ज़रूर जोड़ लें:

छत्तीसगढ़ कैसे पहुँचें? How to Reach Chhattisgarh

​अब जब छत्तीसगढ़ की खूबसूरती देखकर आपका मन यहाँ आने का कर ही रहा है, तो चलिए मैं आपको बता देता हूँ कि यहाँ पहुँचना कितना आसान है:

  • By Air (हवाई मार्ग): राज्य का मुख्य और सबसे व्यस्त हवाई अड्डा रायपुर में Swami Vivekananda Airport (RPR) है, जो दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, कोलकाता और हैदराबाद जैसे देश के सभी बड़े शहरों से सीधी उड़ानों (Direct Flights) से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा बिलासपुर और जगदलपुर में भी रीजनल कनेक्टिविटी के लिए डोमेस्टिक एयरपोर्ट मौजूद हैं।
  • By Train (रेल मार्ग): छत्तीसगढ़ भारतीय रेलवे के Howrah-Mumbai Main Line पर स्थित है। Raipur Junction, Bilaspur Junction, Durg, और Champa यहाँ के प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जहाँ राजधानी और दुरंतो जैसी सुपरफास्ट ट्रेनें देश के कोने-कोने से आसानी से पहुँचती हैं।
  • By Road (सड़क मार्ग): राज्य का रोड नेटवर्क काफी बेहतरीन है। National Highway 53 (NH-53), NH-30, और NH-130 जैसे प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग इसे पड़ोसी राज्यों (महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड) से जोड़ते हैं। रायपुर और बिलासपुर से पूरे राज्य के लिए सरकारी और प्राइवेट एसी बसें 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं।

​छत्तीसगढ़ घूमने का सबसे सही समय | Best Time to Visit Chhattisgarh

​वैसे तो छत्तीसगढ़ हर मौसम में अपना एक अलग रंग दिखाता है, लेकिन एक परफेक्ट ट्रिप के लिए यह समय सबसे मुफीद रहेगा:

  • October to March (Winter Season – सबसे बेस्ट समय): सर्दियों का मौसम यहाँ घूमने के लिए सबसे शानदार माना जाता है। मौसम बेहद सुहावना और ठंडा रहता है (तापमान 12°C से 25°C के बीच)। वॉटरफॉल्स पूरे उफान पर होते हैं, बस्तर दशहरा और लोकल मेलों का मज़ा इसी दौरान लिया जा सकता है।
  • July to September (Monsoon Season – प्रकृति प्रेमियों के लिए): अगर आपको धुंध, घने बादलों और रिमझिम बारिश के बीच हरे-भरे जंगल और उफनते झरने देखना पसंद है, तो मॉनसून में चित्रकूट, मैनपाट और तीरथगढ़ की खूबसूरती देखते ही बनती है।
  • टिप: अप्रैल से जून की भीषण गर्मियों में यहाँ 45°C तक धूप रहती है, इसलिए आउटडोर साइटसीइंग के लिए इस समय आने से बचें।

हस्तकला और खरीदारी

​छत्तीसगढ़ आकर अगर आपने यहाँ की देसी कला और दस्तकारी को अपने घर का हिस्सा नहीं बनाया, तो समझिए आपका सफर अधूरा रह गया यार! यहाँ की Tribal Handicrafts & Art पूरी दुनिया में अपनी बेजोड़ कारीगरी के लिए विख्यात है।

​सबसे पहले बात करते हैं बस्तर की शान Dhokra Art (Bell Metal Craft) की। लगभग 4,000 साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता वाली ‘लॉस्ट-वैक्स’ (Lost-Wax Casting) तकनीक से आज भी हमारे आदिवासी दस्तकार पीतल और कांस्य से देवी-देवताओं, नर्तकों, हाथियों और दीपकों की अद्भुत मूर्तियाँ ढालते हैं। बिना किसी आधुनिक मशीन के, सिर्फ हाथों के हुनर से बनी ये कलाकृतियाँ जब आपके लिविंग रूम या ड्राइंग रूम में सजती हैं, तो घर की खूबसूरती में चार चाँद लगा देती हैं।

​इसके अलावा बस्तर का Wrought Iron Craft (लोहा शिल्प) भी कमाल का है, जहाँ पुराने और रीसायकल किए गए लोहे को भट्टी में तपा-तपाकर दीये, लैंप और पशु-पक्षियों के खूबसूरत शोपीस तैयार किए जाते हैं। लकड़ी पर उकेरी गई बारीक Wood Carving, मिट्टी के बर्तन यानी Terracotta Art, और जांजगीर-चांपा का मशहूर शुद्ध Kosa Silk Sarees & Fabrics यहाँ की खरीदारी को बेहद खास बना देते हैं।

​जब आप जगदलपुर, कोंडागांव या रायपुर के लोकल हाट-बाजारों और Shabari Chhattisgarh Handicrafts Emporium की गलियों में टहलते हुए कारीगरों से सीधे ये नायाब चीज़ें खरीदते हैं ना, तो वो सिर्फ एक शॉपिंग नहीं होती बल्कि उन हुनरमंद हाथों की सदियों पुरानी विरासत और मेहनत को आपका सीधा समर्थन होता है!

चलते-चलते दिल की एक बात

​अंत में दिल से एक बात कहूँ यार हमारे लिए छत्तीसगढ़ सिर्फ नक्शे पर खिंची हुई कोई लकीर या महज एक राज्य नहीं है, यह एक रूहानी एहसास है। यहाँ की मिट्टी पर कदम रखते ही शहर की सारी भागदौड़, तनाव और शोर-शराबा कहीं दूर छूट जाता है और मन एकदम शांत हो जाता है। जब Sal and Teak Forests की ताज़ी हवा आपके सीने में उतरती है और दूर बहते झरनों का कलकल संगीत कानों में गूँजता है, तो लगता है जिंदगी की असली धड़कन यहीं है।

​मैंने अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा इसी पावन माटी की गोद में बिताया है। जिंदगी के कितने ही उतार-चढ़ाव, खुशियाँ और मुश्किलें देखीं, लेकिन इस धरती की सोंधी खुशबू और सुकून ने हमेशा एक माँ की तरह सीने से लगाए रखा। बस इसीलिए दिल में तमन्ना थी कि खूबसूरत भारत के इस खूबसूरत मंच के ज़रिए अपनी इस मातृभूमि का असली Offbeat Travel Experience आप सब तक पहुँचाऊँ।

​अगर आप कभी हमारे छत्तीसगढ़ की सैर का प्लान बनाएं, तो मुझे ज़रूर बताइएगा यार! एक लोकल दोस्त और गाइड की तरह आपको यहाँ के अनछुए कोने घुमाऊँगा, साथ बैठकर चाय की चुस्कियाँ लेंगे और आपको गरमा-गरम Fara एंड Chila खिलाऊँगा। अगर ट्रिप से जुड़ा कोई भी सवाल या संकोच हो, तो नीचे कमेंट बॉक्स में बेझिझक पूछ लेना बिल्कुल अपने दोस्त की तरह बात करेंगे।

​सच कहूँ तो यह ब्लॉग पोस्ट लिखते-लिखते मैं खुद अपने उसी बचपन के दिनों में लौट गया था जब दादा जी की उंगली पकड़कर नदी के किनारे बैठते थे, माँ के साथ धान के लहलहाते खेतों की पगडंडियों पर दौड़ते थे, या कॉलेज के दिनों में दोस्तों के साथ वॉटरफॉल्स पर बेफिक्र पिकनिक मनाते थे। वो सारी मीठी यादें आज फिर से ताज़ा हो गईं। शायद पढ़ते-पढ़ते आपके दिल में भी अपने गाँव, अपने घर या बचपन के किसी कोने की यादें ताज़ा हो गई होंगी।

​किताबों और वीडियो में चाहे जितना देख लो, असली छत्तीसगढ़ को महसूस करने के लिए यहाँ खुद आना बेहद ज़रूरी है। यहाँ के सीधे-सादे लोगों की आत्मीयता, जंगलों की खामोशी और संस्कृति की मिठास तभी समझ आती है जब आप इस ज़मीन पर पाँव रखते हैं।

​दिल से शुक्रिया खूबसूरत भारत की इस पूरी टीम और कम्युनिटी का, जिन्होंने अपनी इस माटी की दास्तां बयां करने का मौका दिया। और आप सभी प्यारे पाठकों का बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने इतने प्यार से इस सफर को पढ़ा।

जय जोहार, जय छत्तीसगढ़, जय भारत!

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