Puri Rath Yatra 2026 Live
पूरी की उन गलियों में एक बार फिर से ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष गूँज उठा है। महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के साथ अपने मंदिर से बाहर निकलकर भक्तों को दर्शन देने के लिए तैयार हैं। Puri Rath Yatra 2026 सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि आस्था का वो महासागर है जहाँ हर कोई प्रभु की भक्ति में डूब जाना चाहता है। आइए, इस ब्लॉग के ज़रिए हम मिलकर महसूस करते हैं इस साल की रथ यात्रा की उस अद्भुत और पावन ऊर्जा को।
Puri Rath yatra 2026
नमस्ते दोस्तों! मैं हूँ अमित और आज ‘खूबसूरत भारत’ से सीधे पुरी की उन गलियों से आप लोगों के लिए एक स्पेशल रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।
सच कहूँ तो, जिस पल मैंने पुरी की मिट्टी को छुआ, ऐसा लगा जैसे साक्षात भगवान जगन्नाथ ने मुझे खुद यहाँ बुलाया है। यार, यह दिन Rath Yatra 2026 सिर्फ एक तारीख नहीं है, यह वो दिन है जिसका इंतजार मैं पूरे साल अपनी पलकें बिछाकर करता हूँ।
भाई, मेरा प्लान तो सिर्फ रथ यात्रा देखने का था, पर यहाँ आकर एहसास हुआ कि पुरी सिर्फ एक जगह नहीं, एक अहसास है। मैं यहाँ कुछ दिन पहले ही पहुँच गया था ताकि इस शहर की रूह को करीब से समझ सकूँ। पहले तो उन विशाल रथों को बनते देखा, लकड़ी की वो खुशबू और कारीगरों की वो लगन देख कर लगा कि जैसे साक्षात विश्वकर्मा जी खुद यहाँ विराजमान हैं। फिर गुंडीचा मंदिर के वो शांत कोने, जहाँ शांति भी शोर मचाती है, वहाँ कुछ पल बिताए।
और हाँ, पुरी के बीच (beaches) पर वो ठंडी हवाएं… यार, वहाँ बैठकर घंटों लहरों को देखना और ये सोचना कि कल शायद यही लहरें महाप्रभु के रथ के स्वागत में झुकेंगी, यह सोचकर ही मन रोमांचित हो उठता है। कल तो मैं चिल्का लेक भी हो आया, वहां की शांति और वो खूबसूरत नज़ारे देख कर मन पूरी तरह शुद्ध हो गया था।
लेकिन आज सुबह से… भाई साहब! पूरा शहर जैसे किसी दूसरी ही दुनिया में पहुँच गया है। हर गली में ‘जय जगन्नाथ’ का शोर, हर चेहरे पर वो अद्भुत मुस्कान और हवाओं में एक ऐसा जादू है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। मैं अभी वहीं खड़ा हूँ जहाँ से रथ गुजरने वाले हैं। भीड़ तो ऐसी है कि पैर रखने की जगह नहीं, पर लोगों का उत्साह किसी भी भीड़ पर भारी पड़ रहा है।
मैंने सोचा क्यों न जैसे अपने किसी करीबी दोस्त को फोन पर सब कुछ सुनाता हूँ, वैसे ही आपको भी हर एक पल का हिस्सा बनाऊँ। तो तैयार हो जाओ, कैमरा ज़ूम कर लो, क्योंकि आज की ये कहानी सिर्फ एक वीडियो नहीं है, यह खूबसूरत भारत की वो आत्मा है जो आज पुरी के इन रथों के साथ पूरी दुनिया को अपना आशीष देने निकल रही है।
तो चलिए, शुरू करते हैं इस पावन सफर का हर वो पल, जो आपको भी भक्ति के उसी सागर में ले जाएगा जहाँ मैं अभी गोते लगा रहा हूँ!
Rath yatra 2026 की शुरुआत
आज खूबसूरत भारत से सीधे पुरी की उस पावन धरती पर खड़ा हूँ जहाँ आज इतिहास खुद को दोहरा रहा है। यार, कल रात की बात बताऊं तो मैं सीधे रथखला (Rathakhala) पहुँच गया था। वो नज़ारा मेरी आँखों में आज भी बसा है जहाँ विशाल ‘नंदीघोष’, ‘तालध्वज’ और ‘दर्पदलन’ रथ आकार ले रहे थे।
इन रथों के नामों को लेते ही शरीर में जो रोमांच दौड़ता है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। मैंने गौर से देखा, वो लकड़ी का बारीक काम… कोई बड़ी मशीनें नहीं, बस श्रद्धा से सने हुए वो हाथों के हुनर! वहाँ के सेवकों से जब मैंने बात की, तो पता चला कि Puri Rath Yatra 2026 की ये तैयारियाँ महीनों पहले शुरू हो जाती हैं। एक-एक कील, एक-एक पहिया जैसे कोई साधना हो। सच कहूँ तो, वहाँ खड़ा होकर मैं सच में भावुक हो गया था। सोचिए ज़रा हज़ारों सालों से ये परंपरा ऐसे ही चली आ रही है, बिना रुके, बिना थके।
और आज… आज है 16 जुलाई 2026। आज वो दिन है जिसका इंतज़ार पूरी दुनिया करती है। दुनिया का सबसे बड़ा ‘चैरियट फेस्टिवल’!
भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा, अपने-अपने दिव्य रथों पर सवार होकर जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर की ओर निकल चुके हैं। वो 3 किलोमीटर का सफर… कहने को तो सिर्फ 3 किलोमीटर है, लेकिन इस रास्ते में जो भावना है, वो अनगिनत है।
मैं आज सुबह भोर होते ही बड़ा डंडा (Bada Danda) पर पहुँच गया था। भीड़? भाई साहब, पैर रखने की जगह नहीं है! चारों तरफ सिर्फ ‘जय जगन्नाथ’ के नारों की गूँज है। और वो पल… जब मैंने खुद वो पावन रस्सी थामी और रथ का पहिया हिला… कसम से यार, उस वक्त ऐसा लगा जैसे भगवान खुद मेरे साथ चल रहे हैं। यकीन मानिए, मेरी आँखों से तो आंसू छलक पड़े। ये सिर्फ एक त्योहार नहीं है जिसे हम देख रहे हैं, ये वो पल है जिसे हम अपनी रूह में जी रहे हैं।
Rath Yatra 2026 सिर्फ एक भीड़ नहीं, एक अटूट आस्था का समंदर है। मैं अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूँ कि इस शोर, इस भक्ति और इस ऊर्जा को अपने कैमरे में कैद करके आप तक पहुँचा सकूँ। बने रहिए मेरे साथ, क्योंकि अभी तो कारवां शुरू हुआ है!
Puri Rath Yatra 2026 में करीब 13000 जवानो और 473 AI कैमरो से निगरानी हो रहा है
रथ यात्रा का उत्साह तो चरम पर है ही, लेकिन इस भक्ति के सागर को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने जो इंतज़ाम किए हैं, वो भी देखने लायक हैं। चलिए, मैं आपको बताता हूँ कि आज पुरी में सुरक्षा का कितना तगड़ा कवच है:
- भारी सुरक्षा बल: आज पुरी में सुरक्षा के कई लेयर बनाए गए हैं। यहाँ 19 IPS अधिकारियों की देखरेख में लगभग 13,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
- CAPF का कवच: सुरक्षा को और अभेद्य बनाने के लिए, अहम जगहों पर सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) की 15 कंपनियों को तैनात किया गया है, जिनमें CRPF, BSF, RAF और नेशनल सिक्योरिटी फोर्स के जवान शामिल हैं।
- AI और ड्रोन की निगरानी: अधिकारियों के मुताबिक, पूरे इलाके पर 473 AI-पावर्ड CCTV कैमरों से नज़र रखी जा रही है, जो ड्रोन-जैमिंग सिस्टम से जुड़े हुए हैं। ये कैमरे दो कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर्स के ज़रिए ग्रैण्ड रोड और उसके आस-पास के हर कोने पर नज़र गड़ाए हुए हैं।
- समुद्र और तट की सुरक्षा: सिर्फ ज़मीन ही नहीं, बल्कि समुद्र में भी भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और ओडिशा पुलिस मैरीटाइम स्टेशन की संयुक्त पेट्रोलिंग जारी है। साथ ही, किसी भी अनहोनी या डूबने की घटना को रोकने के लिए समुद्र तट पर 500 से ज़्यादा लाइफगार्ड और फायर सर्विस के जवान तैनात किए गए हैं।
दोस्तों, इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच भी भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और शांतिपूर्ण है। महाप्रभु की कृपा है कि सब कुछ बहुत ही व्यवस्थित तरीके से चल रहा है!
Puri rath की सुरक्षा व्यवस्था
भाई, इस साल Rath Yatra 2026 की सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं ज़्यादा आधुनिक और अभेद्य है। प्रशासन ने इस बार ऐसी 4 खास चीज़ें लागू की हैं जो रथ यात्रा के इतिहास में पहली बार देखने को मिल रही हैं:
- NSG की तैनाती: इस बार सुरक्षा चक्र में पहली बार NSG यानी ‘ब्लैक कैट कमांडो’ को शामिल किया गया है, जो सीधे तौर पर हाई-वैल्यू एरिया की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
- इमरजेंसी इवैक्वेशन कॉरिडोर: भीड़ बढ़ने या किसी भी अनहोनी की स्थिति से निपटने के लिए खास तौर पर इमरजेंसी कॉरिडोर बनाए गए हैं, ताकि एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और राहत दल बिना किसी देरी के मौके पर पहुँच सकें.
- रियल टाइम भीड़ प्रबंधन: बेहतर क्राउड फ्लो के लिए इस बार प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते तय किए गए हैं, जिससे भीड़ को मैनेज करना कहीं ज़्यादा आसान हो गया है.
- AI कैमरों से निगरानी: पहली बार पूरी रथ यात्रा की निगरानी AI-आधारित कैमरों, ड्रोन्स और रियल टाइम कंट्रोल रूम के ज़रिए पल-पल की जा रही है.
इन इंतज़ामों को देखकर लगता है कि सुरक्षा के मामले में कोई भी कसर नहीं छोड़ी गई है। वाकई, ये तकनीक और आस्था का बेहतरीन संगम है!
आज का Rath Yatra 2026 – Live अनुभव, जो मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा

अभी शाम हो चुकी है, मैं ‘बड़ा डंडा’ के पास ही बैठा हूँ। शरीर में थकान तो बहुत है, लेकिन मेरा मन आज पूरी तरह भरा हुआ है। आज 16 जुलाई 2026, वो दिन जिसका इंतज़ार न सिर्फ मुझे, बल्कि पूरे देश को था Rath Yatra 2026।
आज जो कुछ भी मैंने अपनी आँखों से देखा, वो मैं आपसे शेयर करना चाहता हूँ, जैसे एक दोस्त अपने दूसरे दोस्त को सुनाता है।
भक्ति का वो दिव्य सवेरा
सुबह-सुबह जब मैं ‘सिंहद्वार’ पहुँचा, तो माहौल अलग ही था। ‘पाहंडी बिजे’ का वो रस्म जब देवताओं को मंदिर से बाहर लाया गया, तो वो नज़ारा देख कर गला भर आया। हज़ारों हाथ हवा में थे, फूलों की बारिश हो रही थी और चारों तरफ बस एक ही गूँज थी‘जय जगन्नाथ, जय बलभद्र, जय सुभद्रा!’
रथ यात्रा में बारिश के बीच खूबसूरत दृश्य
दोस्तों, आज की रथ यात्रा में भक्ति का एक बेहद खूबसूरत रूप देखने को मिला। जब सुबह तेज बारिश हो रही थी, तब भी कलाकारों ने रुकने का नाम नहीं लिया और बारिश के बीच ही पुरी की गलियों में ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दी। वहां मौजूद एक ओडिसी डांसर ने बड़ी आस्था के साथ कहा कि वे हर साल भगवान जगन्नाथ के सामने ओडिसी नृत्य करती हैं, क्योंकि यह भगवान का पसंदीदा नृत्य माना जाता है और उन्हें पूरा विश्वास था कि जैसे ही महाप्रभु बाहर आएंगे, बारिश खुद-ब-खुद रुक जाएगी। उनका यह अटूट विश्वास और कला के प्रति समर्पण देखकर मन सच में श्रद्धा से भर गया।
राजा भी सेवक बन गया
फिर आया वो पल जिसे देखकर आँखें नम हो गईं ‘छेरा पहरा’। जब गजपति महाराजा ने खुद झाड़ू लगाकर रथों के सामने का रास्ता साफ किया, तो लगा कि भक्ति के आगे दुनिया का हर राजा भी एक तुच्छ सेवक है। वो पल सिखा गया कि अहंकार को कैसे मिटाया जाता है।
जब रथ ने चलना शुरू किया
और फिर शुरू हुई मुख्य यात्रा! ‘नंदीघोष’, ‘तालध्वज’ और ‘दर्पदलन’ ये रथ नहीं, साक्षात मंदिर चल रहे थे। 45 फीट ऊँचा नंदीघोष जब हिला, तो लगा जैसे धरती कांप रही हो। मैं भी भीड़ में शामिल हुआ, और भाई, जब मैंने वो पावन रस्सी थामी और पूरी ताकत लगाई, तो लगा जैसे भगवान का आशीर्वाद मेरे हाथों में है।
वो प्रसाद और वो सुकून
दोपहर तक रथ गुंडीचा मंदिर की ओर बढ़ चले थे। मैं थोड़ा पीछे था, पर ऊपर से जो नज़ारा दिखा, वो मेरे कैमरे और मेरी आँखों में हमेशा के लिए कैद हो गया है। वहां प्रसाद में मिला वो चावल और खजूर… भाई साहब, उसका स्वाद मैं जीवन भर नहीं भूलूँगा। ऐसा लगा जैसे प्रसाद नहीं, खुद प्रभु का प्यार चख रहा हूँ।
तेज बारिश में 10 लाख श्रद्धालु
भाई, इस वक्त का नज़ारा देखोगे तो रोंगटे खड़े हो जाएंगे! आज 16 जुलाई 2026 है और तेज बारिश हो रही है, लेकिन यहाँ का माहौल देखिए बारिश की बूंदें गिर रही हैं, लेकिन लोगों का जुनून उससे कहीं ज्यादा बरस रहा है।
- जनसैलाब का सैलाब: इस तेज बारिश और उमस के बीच भी ‘बड़ा डंडा’ पर करीब 10 लाख भक्त मौजूद हैं।
- अटूट श्रद्धा: बारिश की वजह से किसी के चेहरे पर शिकन तक नहीं है; ऐसा लग रहा है मानो भगवान जगन्नाथ का स्वागत खुद आसमान भी अपनी फुहारों से कर रहा हो।
- सुरक्षा और सावधानी: इतनी भीड़ और खराब मौसम के बावजूद, सुरक्षा का घेरा और भी चौकस है 473 AI-पावर्ड CCTV कैमरे और 13,000 पुलिसकर्मी चप्पे-चप्पे पर नज़र रखे हुए हैं, ताकि 10 लाख लोगों का ये सैलाब सुरक्षित रहे।
- अद्भुत नज़ारा: हज़ारों लोग छाते लिए या भीगते हुए, बस उस एक झलक के इंतज़ार में खड़े हैं, जहाँ प्रभु का रथ उनके सामने से गुज़रेगा।
यार, सच कहूँ तो ऐसी भीड़ और ऐसा जज्बा मैंने कहीं नहीं देखा। ये साबित करता है कि आस्था हो तो न बारिश रोक सकती है, न ही भीड़ का शोर। हम सब बस एक ही रंग में रंगे हैं जगन्नाथ जी के रंग में!
रथ के घोड़ो का रहस्य
दोस्तों, रथ यात्रा के हर एक पहलू में गहरा रहस्य और विज्ञान छिपा है। अभी थोड़ी देर पहले मैंने बलभद्र जी के रथ ‘तालध्वज’ पर घोड़ों को बंधते देखा, तो लगा कि इस यात्रा की हर एक चीज़ कितनी मायने रखती है। आइए, मैं आपको इन पावन रथों और उनसे जुड़े घोड़ों के बारे में कुछ खास बातें बताता हूँ:
- भगवान बलभद्र का रथ ‘तालध्वज’: इस भव्य रथ की ऊँचाई लगभग 45 फीट है और इसमें 14 पहिए लगे होते हैं। इस रथ के सारथी का नाम मातलि है। इसमें चार काले घोड़े लगाए जाते हैं, जिनके नाम तीव्र, घोर, दीर्घश्रम और स्वर्णनाभ हैं।
- देवी सुभद्रा का रथ: देवी सुभद्रा के रथ में चार लाल घोड़े जोड़े जाते हैं, और उनके नाम रोचक, मोचिका, जीता और अपराजिता हैं।
- भगवान जगन्नाथ का रथ: महाप्रभु जगन्नाथ के रथ पर जो चार घोड़े सुशोभित होते हैं, उनके नाम शंख, बलाहक, श्वेत और हरिदाश्व हैं।
इन रथों की भव्यता और इनके घोड़ों की ये विशेषताएँ देखकर ही समझ आता है कि हमारी परंपराएँ कितनी समृद्ध हैं। सच में, आज का ये दिन अविस्मरणीय है!
रथ यात्रा में कौनसा रथ पहले चलता है?
यार, रथ यात्रा की एक बहुत ही प्यारी और अनुशासन वाली बात आपको बताता हूँ, जो मैंने यहाँ देखी! जब यात्रा शुरू होती है, तो तीनों रथ एक बहुत ही खास क्रम में चलते हैं. सबसे पहले भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई बलभद्र का ‘तालध्वज’ रथ चलता है, क्योंकि बड़े भाई होने के नाते वो सबसे पहले मार्ग दिखाते हैं. उनके ठीक पीछे बहन सुभद्रा का ‘दर्पदलन’ रथ चलता है, और सबसे आखिर में भगवान जगन्नाथ अपने ‘नंदीघोष’ रथ पर सवार होकर अपने भक्तों को दर्शन देते हुए गुंडीचा मंदिर की ओर बढ़ते हैं. ये परंपरा सालों से चली आ रही है और मजे की बात ये है कि यही क्रम हर साल रथ यात्रा और बहुदा यात्रा, दोनों में पूरी निष्ठा से निभाया जाता है!
जब भगवान रथ यात्रा में रहता है तो जगन्नाथ मंदिर में क्या होता है?
दोस्तों, रथ यात्रा के दौरान श्री मंदिर में जो माहौल होता है, वह सच में बहुत ही भावुक कर देने वाला है। जब महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र जी और बहन सुभद्रा रथ पर सवार होकर बाहर निकलते हैं, तो पूरे मंदिर परिसर में एक अजीब सी खामोशी और शांति छा जाती है, जो अपने आप में ही बहुत कुछ कह जाती है।
आमतौर पर जो मंदिर 24 घंटे भक्तों की भीड़ और जयकारों से गूंजता रहता है, वहां उस दौरान एक अलग ही सन्नाटा पसर जाता है क्योंकि साक्षात आराध्य कुछ दिनों के लिए अपनी मौसी के घर यानी गुंडीचा मंदिर चले जाते हैं। हालांकि मुख्य विग्रह रथ यात्रा पर होते हैं, लेकिन मंदिर के गर्भगृह में अनुष्ठान पूरी तरह बंद नहीं होते और मंदिर के भीतर दैनिक सेवा-पूजा और नीतियां सीमित रूप में चलती रहती हैं ताकि मंदिर की दिव्यता और गरिमा हमेशा बनी रहे।
मंदिर का वातावरण उस दौरान बिल्कुल ऐसा हो जाता है जैसे कोई अपने प्रियजन के घर से बाहर जाने के बाद उनके वापस लौटने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हो। भक्त उस समय भी मंदिर के बाहर आते हैं और बंद दरवाजों को देखकर ही प्रभु के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट करते हैं, यह जानते हुए कि वे कुछ ही दूरी पर ‘बड़ा डंडा’ पर अपने भक्तों के बीच रथ पर सवार हैं।
संक्षेप में कहें तो, भले ही भगवान मंदिर से बाहर होते हैं, लेकिन जगन्नाथ मंदिर की असली आत्मा वहीं बनी रहती है, जो सात दिन बाद होने वाली ‘बहुड़ा यात्रा’ का इंतज़ार करती है।
रथ यात्रा कहां पहुंचा है?
दोस्तों, दिन भर की भाग-दौड़ और भक्ति के सैलाब के बाद अब रथ यात्रा ने आज के लिए विश्राम ले लिया है।
- आज का सफर अब यहीं रुक गया है, और भगवान रात भर अपने रथों पर ही विराजमान रहेंगे।
- कल सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरणें पुरी को छुएंगी, यह पावन यात्रा एक बार फिर गुंडीचा मंदिर की ओर अपनी गति शुरू करेगी।
- भले ही आज की यात्रा में थोड़ा ठहराव आया है, लेकिन श्रद्धालुओं का जज्बा अब भी वही बना हुआ है।
इसके अलावा, कुछ अप्रिय घटनाएँ भी सामने आई हैं जहाँ कोलकाता से आए कुछ श्रद्धालु घायल हुए हैं और उनके परिजन अस्पताल पहुँच चुके हैं। महाप्रभु से प्रार्थना है कि वे सब जल्द स्वस्थ हों। अब पूरी रात पुरी की हवाओं में भक्ति का यही सुकून रहने वाला है। कल सुबह फिर मिलते हैं, नए जोश और नई ऊर्जा के साथ!
विराम के बाद कितना टाइम शुरू होगा रथ यात्रा
दोस्तों, जैसा कि आज 16 जुलाई 2026 की यात्रा ने विराम ले लिया है और भगवान रात भर अपने रथों पर ही विराजमान रहेंगे, कल यानी 17 जुलाई की सुबह सूर्य निकलने के साथ ही यह पावन यात्रा एक बार फिर गुंडीचा मंदिर की ओर अपनी गति शुरू कर देगी।
तो आप कल सुबह तैयार रहिएगा, क्योंकि जैसे ही सूरज की पहली किरणें पुरी को छुएंगी, हमारे महाप्रभु अपने भक्तों के साथ फिर से आगे बढ़ेंगे!
58 शक्तिशाली पंपों से पूरी की पानी का निकाला जा रहा है
भाई, रथ यात्रा के बीच पुरी में बारिश का दौर लगातार जारी है और IMD के भुवनेश्वर केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने बताया है कि शहर में बारिश का सिलसिला काफी देर तक बना रहेगा। इस स्थिति से निपटने के लिए ओडिशा फायर सर्विस डिपार्टमेंट ने पूरी कमर कस ली है और शहर से पानी निकालने के लिए 58 शक्तिशाली पंप लगातार काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं, ज़िले में 60 अलग-अलग जगहों पर जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए पिछले 2 दिनों से युद्ध स्तर पर काम चल रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।
25 स्पेशल रेस्क्यू यूनिट तैनात
दोस्तों, रथ यात्रा में सुरक्षा और राहत के इंतज़ामों को लेकर फायर और इमरजेंसी सर्विस के IGP डॉ. उमाशंकर डैश ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले 2 दिनों में लगभग 60 जगहों से 3-4 लाख लीटर से ज्यादा पानी निकाला जा चुका है। सबसे खास बात यह है कि रथ यात्रा में पहली बार 25 स्पेशल रेस्क्यू यूनिट तैनात की गई हैं, जिनमें से हर यूनिट में 5 प्रशिक्षित लोग और आधुनिक उपकरण मौजूद हैं। इन टीमों ने अब तक भीड़ में दम घुटने और बेचैनी महसूस कर रहे करीब 100 लोगों को न केवल सुरक्षित निकाला है, बल्कि उन्हें समय रहते अस्थायी अस्पतालों और एम्बुलेंस तक पहुँचाकर बड़ी राहत भी पहुँचाई है।
जय जगन्नाथ! 🙏
✍️…… बने रहिये हमारे साथ इस खूबसूरत यात्रा में अभी और नए नए रहस्यों का राज खुलेगा…





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