Nainital का जादुई सफर: तालों के शहर में बोटिंग, मॉल रोड और खूबसूरत यादें

Nainital Trip Plan: नैनीताल कैसे पहुँचें, कहाँ रुकें, बजट और घूमने की बेहतरीन जगहें

अगर आप शहर के शोर-शराबे, काम के तनाव और रोज-रोज की भागदौड़ से दूर कहीं सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो ‘खूबसूरत भारत’ में आज की यह Nainital की यात्रा बिल्कुल आपके लिए ही है।

उत्तराखंड की हसीन वादियों में बसा नैनीताल सिर्फ एक हिल स्टेशन नहीं है, बल्कि यह एक एहसास है। चारों तरफ से ऊंचे-ऊंगे हरे-भरे पहाड़ों से घिरी नैनी झील, उसमें तैरती रंग-बिरंगी नावें, ढलते सूरज की हल्की-हल्की रोशनी और ठंडी-सुहानी हवा यहाँ पहुँचते ही आपका दिल कह उठेगा, वाह! जिंदगी हो तो ऐसी!

चाहे आप झील के किनारे बैठकर सुकून से चाय का घूंट लेना चाहते हों, मॉल रोड पर टहलते हुए खरीददारी करना चाहते हों, या फिर पहाड़ियों से खूबसूरत नजारों का मज़ा लेना चाहते हों नैनीताल के पास हर दिल को लुभाने के लिए कुछ खास है।

तो देर किस बात की? अपनी चाय का कप उठाइए, आराम से बैठिए और चलिए ‘खूबसूरत भारत’ के साथ नैनीताल की इस हसीन और यादगाह यात्रा पर!

नैनीताल के जादुई सफर में आपका स्वागत है!

भाई, नमस्कार! मैं हूँ अमित, और आज मैं आप लोगों से अपनी हालिया एक बेहद यादगार यात्रा की कहानी शेयर करने वाला हूँ। क्योंकि जब भी मैं किसी नई और खूबसूरत जगह घूमता हूँ, तो दिल करता है कि वह पूरा अनुभव खूबसूरत भारत के जरिये आप सभी दोस्तों के साथ बाँटू।

हाल ही में मैं अपनी बेस्ट फ्रेंड रश्मि के साथ उत्तराखंड की हसीन पहाड़ियों में घूमने गया था। रिमझिम बारिश की बूँदों को महसूस करते हुए हम सबसे पहले कैंची धाम गए, फिर भवाली में रुके और उसके बाद झीलों की खोज में निकल पड़े। हमने भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल और आखिर में नैनीताल का सफर तय किया। यह यात्रा इतनी खूबसूरत और सुकून देने वाली थी कि जब मैं अपने घर जंजगीर लौटा, तो मेरे मन में अनगिनत खूबसूरत यादें भर चुकी थीं। अब मैं आपको एक-एक करके बताऊंगा कि हमने वहाँ क्या-क्या देखा, क्या महसूस किया और क्यों लाइफ में कम से कम एक बार आपको भी Nainital tourist places एक्सप्लोर करने जरूर जाना चाहिए!

देखो यार, पहाड़ों का अपना ही एक अलग जादू होता है। मैदानी इलाकों की गर्मी और भागदौड़ से दूर जब आप ऊँचाई पर पहुँचते हो, तो हवा में फैली वो ठंडी ताजगी सीधा दिल को छू जाती है। हम लोग चांपा से ट्रेन पकड़कर दिल्ली गए थे और फिर वहाँ से आगे बस पकड़ी थी लेकिन वह पूरी कहानी मैं अपने कैंची धाम वाले पोस्ट में पहले ही बता चुका हूँ, इसलिए उसे यहाँ नहीं दोहराऊँगा। यहां मैं आपको इस खूबसूरत यात्रा की बाकी यादों का लिंक दे देता हूं आप देख लीजिएगा। क्योंकि अभी बात होगी सिर्फ नैनीताल की।

तो चलिए, अब सीधा बात शुरू करते हैं तालों के शहर नैनीताल से…

Nainital पहुँचना और पहला नजारा

जैसे ही हमने नैनीताल की सीमा में कदम रखा, लगा जैसे सफर की सारी थकान पल भर में गायब हो गई! नैनीताल को यूँ ही Lake District of India नहीं कहा जाता, यह नाम इस जगह पर पूरी तरह खरा उतरता है।

Nainital trip

आपको बताऊँ तो नैनीताल मुख्य रूप से सात खूबसूरत पहाड़ियों से घिरा हुआ है अयारपाटा (Ayarpata), देवपाटा (Devpata), हंडी-बंदी (Handi-Bandi), नैना (Naina Peak), अल्मा (Alma), लारियाकांता (Lariakanta) और शेर-का-डांडा (Sher-ka-Danda)। और इन सब पहाड़ियों के ठीक बीच में मुस्कुराती हुई मौजूद है प्रसिद्ध नैनी झील यानी Naini Lake, जो देखने में बिल्कुल एक आँख अर्थात Eye shape के आकार की लगती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता सती का ‘नयन’ यानी आँख गिरा था, इसीलिए इस पावन और खूबसूरत जगह का नाम ‘नैनीताल’ पड़ा।

शहर में प्रवेश करते ही चारों तरफ फैली घनी हरियाली, बादलों का खेल और ठंडी-सुहानी हवाओं ने ऐसा जादू चलाया कि मन मोह गया। झील का पहला नजारा देखते ही रश्मि के मुँह से अचानक निकला, यार अमित, यह जगह तो सच में किसी सपनों की दुनिया जैसी लग रही है!

नैनी झील और नौका विहार

Nainital पहुँचकर सबसे पहले हम सीधे नैनी झील के किनारे पहुँचे। मौसम एकदम सुहाना था, हल्की-हल्की बारिश रुक-रुककर हो रही थी और पूरी झील पर धुंध की एक पतली सी चादर सी बिछी हुई थी। सुबह-सुबह का वह नजारा देखकर लग रहा था जैसे हम किसी पेंटिंग के अंदर आ गए हों।

Nainital lake photos

झील को देखकर हमसे रुका नहीं गया, तो हमने तुरंत Boating करने का मन बनाया। हमने एक पैडल बोट ली और धीरे-धीरे चप्पू चलाते हुए झील के बिल्कुल बीचों-बीच पहुँच गए। उस वक्त झील का पानी इतना शांत था कि चारों तरफ मौजूद ऊँची-ऊँची पहाड़ियाँ, खूबसूरत होटल, रंग-बिरंगे घर और हरे-भरे पेड़ सब पानी में साफ झलक रहे थे। झील के बीच में पहुँचकर जब रश्मि ने चारों तरफ देखा तो मुस्कुराते हुए बोली, “यार अमित, यह नजारा तो किसी पोस्टकार्ड जैसा लग रहा है!”

सच कहूँ तो Naini Lake Boating ही नैनीताल आने का असली मज़ा है। अगर आप भी कभी जाएँ, तो मेरी सलाह मानकर सुबह के समय बोटिंग जरूर करें उस वक्त भीड़ काफी कम होती है, पानी बिल्कुल शांत रहता है और सुकून का एक अलग ही अहसास होता है। वहीं शाम के वक्त जब झील के चारों तरफ लाइटें जल उठती हैं, तो पानी में उनकी जगमगाहट देखकर नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है।

बोटिंग के बाद झील के किनारे बैठकर ठंडी हवाओं के साथ बारिश की बूँदों को महसूस करना… सच में, वह एक ऐसा अनुभव था जिसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता!

नैना देवी मंदिर

नैनी झील के बिल्कुल उत्तरी किनारे (मल्लीताल) पर स्थित है प्रसिद्ध नैना देवी मंदिर। बोटिंग के बाद हम सीधे माता के दर पर माथा टेकने पहुँचे। यह 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहाँ माता सती के नयन गिरे थे।

Naina devi mandir

जैसे ही हमने मंदिर परिसर में कदम रखा, पूरे माहौल में एक अद्भुत भक्तिमय ऊर्जा महसूस हुई। चारों तरफ घंटियों की मधुर गूंज थी और भक्तजन लीन होकर आरती में शामिल थे। उस समय हल्की-हल्की बारिश की बूँदें मंदिर की छतों और प्रांगण पर गिर रही थीं, जिससे मन में एक असीम शांति और सुकून छा गया।

वहाँ का माहौल देखकर रश्मि ने धीरे से कहा, यार अमित, यहाँ आकर तो ऐसा लग रहा है जैसे जिंदगी की सारी मुश्किलें और परेशानियाँ अपने आप हल हो जाएँगी।

सच में, पहाड़ों में बसे मंदिरों की बात ही कुछ अलग होती है; यहाँ हवा में एक अलग ही पवित्रता और पॉजिटिव वाइब्स होती हैं। माँ नैना देवी के दर्शन करके मन एकदम हल्का और खुशियों से भर गया।

मॉल रोड और आसपास की खूबसूरत जगहें

Nainital में घूमने के लिए जगहों की कोई कमी नहीं है। और अगर आप नैनीताल आए हैं, तो शाम के वक्त मॉल रोड पर टहलना तो बिल्कुल ‘मस्ट-ट्राय’ (Must-Try) है! यहाँ की रंग-बिरंगी दुकानों में खूबसूरत ऊनी कपड़े, हैंडमेड मोमबत्तियाँ, सोवेनियर (स्मृति चिन्ह), होममेड चॉकलेट्स और लोकल पहाड़ी खाना मिलता है।

Mall road nainital

पहाड़ों की ठंडी हवा और हल्की बारिश के बीच हमने मॉल रोड पर गरमागरम मैगी खाई और कुल्हड़ वाली चाय की चुस्कियाँ लीं उसका मज़ा ही कुछ और था! रश्मि ने यहाँ से अपने परिवार के लिए कुछ सुंदर शॉल भी खरीदे। मॉल रोड पर घूमते हुए आपको ऐसा महसूस होगा जैसे आप ब्रिटिश दौर के किसी पुराने खूबसूरत शहर में आ गए हों, क्योंकि यहाँ के आसपास की इमारतों और मकानों की बनावट आज भी उसी पुरानी औपनिवेशिक शैली की झलक देती है।

स्नो व्यू पॉइंट और रोपवे का रोमांच

इसके बाद हम गए स्नो व्यू पॉइंट! यहाँ तक पहुँचने के लिए हमने रोपवे ली। रोपवे की ट्रॉली में बैठकर जैसे-जैसे हम ऊपर बढ़ रहे थे, नीचे झिलमिलाती नैनी झील और हरे-भरे पहाड़ों का नजारा सचमुच अद्भुत दिख रहा था। ऊपर पहुँचकर दूर-दूर तक फैली हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियाँ नज़र आती हैं। हालाँकि उस दिन बारिश की वजह से थोड़ी धुंध छाई हुई थी, लेकिन फिर भी वहाँ से दिखने वाला नजारा एकदम कमाल का था!

Nainital की अन्य प्रमुख जगहें

  • टिफिन टॉप (Tiffin Top / Dorothy’s Seat): अगर आपको थोड़ा पैदल चलना या ट्रेकिंग करना पसंद है, तो टिफिन टॉप जरूर जाएँ। यहाँ तक पहुँचने के लिए थोड़ा चढ़ना पड़ता है, लेकिन ऊपर पहुँचने के बाद जो पूरे नैनीताल शहर का 360-डिग्री व्यू मिलता है, वह आपकी सारी थकान भुला देता है।
  • इको केव गार्डन (Eco Cave Gardens): अगर आप फैमिली या बच्चों के साथ travel कर रहे हैं, तो यह जगह बहुत पसंद आएगी। यहाँ प्राकृतिक रूप से बनी जानवरों के आकार की कई छोटी-बड़ी गुफाएँ जैसे टाइगर केव, पैनथर केव हैं, जिन्हें एक्सप्लोर करना काफी मजेदार अनुभव होता है।

वैसे तो Nainital के आसपास और भी कई बेहतरीन जगहें हैं जैसे नौकुचियाताल, जो अपने नौ कोनों के लिए प्रसिद्ध एक बेहद खूबसूरत और शांत झील है। इसके अलावा, अगर आपको पक्षियों और प्रकृति से प्यार है, तो पंगोट बर्ड वाचिंग के लिए बहुत मशहूर है। अगर आपके पास 1-2 दिन का अतिरिक्त समय हो, तो इन जगहों को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें!

इतिहास और लोकल कल्चर की एक झलक

Nainital की खूबसूरती के साथ-साथ इसका इतिहास भी बड़ा दिलचस्प है। 1841 में एक ब्रिटिश व्यापारी पी. बैरन (P. Barron) ने इस खूबसूरत झील की खोज की थी, जिसके बाद से ही यह अंग्रेजों के बीच एक बेहद लोकप्रिय समर रिसॉर्ट और हिल स्टेशन बन गया।

हालाँकि, नैनीताल ने मुश्किल वक्त भी देखा है। 1880 में यहाँ एक भीषण भूस्खलन आया था, जिसने शहर के एक बड़े हिस्से को भारी नुकसान पहुँचाया। लेकिन इस त्रासदी के बाद शहर को फिर से बड़ी खूबसूरती और बेहतर प्लानिंग के साथ बसाया गया।

आज भी नैनीताल की सड़कों पर चलते हुए आपको ब्रिटिश दौर की पुरानी वास्तुकला साफ़ दिखाई देगी। यहाँ का शानदार राजभवन, जिसकी बनावट इंग्लैंड के बकिंघम पैलेस से प्रेरित है, आज भी उस गुजरे हुए ब्रिटिश कालीन दौर की भव्यता की गवाही देता शान से खड़ा है। अगर आपको इतिहास पसंद है, तो इसे बाहर से देखना भी एक शानदार अनुभव होता है!

खाना-पीना और बारिश का अपना ही मज़ा

अब बात करते हैं घूमते-घूमते पेट पूजा की, यानी खाने-पीने की! सच कहूँ तो पहाड़ों की ठंडी हवा में हर चीज़ का स्वाद दोगुना हो जाता है। नैनीताल आकर हमने यहाँ के पारंपरिक कुमाऊँनी व्यंजनों का ज़ायका लिया।

विशेष रूप से यहाँ के मसालेदार ‘आलू के गुटके’, गरमागरम रोटियाँ और उत्तराखंड की मशहूर ‘बाल मिठाई’ जो खोये से बनती है और जिस पर सफेद दानेदार चीनी लगी होती है, चखी तो स्वाद ऐसा कि बस मुँह में पानी आ जाए! इसके अलावा नैनीताल में झील किनारे कई खूबसूरत और वाइब्रेंट कैफे हैं, जहाँ बैठकर खिड़की से बाहर गिरती बारिश को देखते हुए हॉट कॉफी की चुस्कियाँ लेना अपने आप में एक अलग सुकून देता है। रश्मि को वहाँ की लोकल बेकरीज़ और होममेड चॉकलेट्स इतनी पसंद आईं कि उसने घर ले जाने के लिए कुछ पैकेट्स भी पैक करवा लिए।

बारिश के मौसम में नैनीताल का जादू और कुछ जरूरी सावधानियाँ

मानसूनी बारिश के दौरान नैनीताल का अपना ही एक अलग रंग और रूप होता है। चारों तरफ धुंध में लिपटे हरे-भरे पहाड़, लबालब भरी हुई झीलें और पेड़ों से छनकर आती ठंडी हवाएँ माहौल को एकदम जादुई बना देती हैं। हालाँकि, बारिश के मौसम में पहाड़ों की यात्रा करते समय थोड़ी सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।

बारिश में सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं और कई बार लैंडस्लाइड (पहाड़ खिसकने) का जोखिम रहता है। इसलिए गाड़ी चलाते समय या पैदल चलते समय पूरी सावधानी रखें। अपने साथ वॉटरप्रूफ/ग्रिप वाले हल्के जूते, एक अच्छी क्वालिटी का रेनकोट या छाता, और मौसम के हिसाब से पर्याप्त गर्म कपड़े साथ रखना बिल्कुल न भूलें।

नैनीताल घूमने का सही समय | Best Time to Visit Nainital

वैसे तो Nainital हर मौसम में खूबसूरत लगता है, लेकिन आपकी पसंद के हिसाब से कौन-सा समय बेस्ट रहेगा, चलिए मैं आपको बताता हूँ:

  • मार्च से जून (गर्मी का मौसम): आमतौर पर यह नैनीताल घूमने का सबसे पॉपुलर और पीक सीजन माना जाता है। जब मैदानी इलाकों में कड़ाके की धूप और भीषण गर्मी पड़ रही होती है, तब नैनीताल का सुहाना मौसम दिल खुश कर देता है। इस समय पर्यटक सबसे ज्यादा आते हैं।
  • सितंबर से नवंबर (मानसून के बाद): अगर आपको साफ-सुथरा नीला आसमान, हल्की गुलाबी ठंड और पहाड़ों के एकदम साफ नजा़रे चाहिए, तो यह समय सबसे मुफीद है।
  • दिसंबर से फरवरी (सर्दी का मौसम): जो लोग कड़ाके की ठंड, धुंध और स्नोफॉल (Snowfall) का मज़ा लेना चाहते हैं, उनके लिए सर्दियों की यह विंटर वंडरलैंड वाली यात्रा एकदम परफेक्ट रहती है।

बारिश का मौसम (जुलाई – अगस्त) और हमारा अनुभव

वैसे तो बहुत से लोग मानसून में पहाड़ों पर जाने से कतराते हैं, लेकिन बारिश का मौसम उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो भीड़-भाड़ से दूर एकांत, चारों तरफ छाई गहरी हरियाली और बादलों से घिरे पहाड़ देखना पसंद करते हैं।

हमने अपनी यह यात्रा जुलाई-अगस्त के आसपास यानी मानसून के दौरान ही की थी। सच कहूँ तो हमारा अनुभव बहुत ही शानदार और यादगार रहा! कम भीड़ होने की वजह से हमें हर जगह सुकून मिला, होटल आसानी से मिल गए और बारिश में धुली हुई पहाड़ियों की सुंदरता देखने लायक थी। अगर आप भी प्रकृति के प्रेमी हैं और थोड़ा संभलकर सफर कर सकते हैं, तो मानसून का नैनीताल आपको भी दीवाना बना देगा!

यात्रा के कुछ जरूरी टिप्स और नैनीताल पहुँचने की पूरी जानकारी

अब अगर आप भी नैनीताल जाने का प्लान बना रहे हैं, तो मेरी इस यात्रा के अनुभवों से जुड़ी ये काम की बातें आपके बहुत काम आएँगी:

  • नैनीताल कैसे पहुँचे (How to Reach): दिल्ली से काठगोदाम (Kathgodam) तक ट्रेन आसानी से मिल जाती है। काठगोदाम से नैनीताल सिर्फ 35 किमी दूर है, जहाँ से आपको शेयरिंग टैक्सी या बस मिल जाएगी। दिल्ली से नैनीताल पहुँचने में लगभग 7-8 घंटे लगते हैं।
  • कहाँ रुकें (Hotels & Stay): नैनी झील के किनारे वाले होटल शानदार व्यू देते हैं, लेकिन थोड़े महंगे होते हैं। बजट ट्रिप के लिए आप पास के भवाली या भीमताल में रुक सकते हैं। सीजन के दौरान Best Hotels in Nainital के लिए एडवांस बुकिंग ज़रूर करा लें।
  • बजट और खर्चे (Trip Cost): दिल्ली से 4-5 दिनों का ट्रिप लगभग ₹10,000 से ₹15,000 प्रति व्यक्ति में आराम से पूरा हो जाता है, अगर आप सादगी से रहें।
  • मुख्य गतिविधियाँ (Things to Do): नैनी झील में बोटिंग, मॉल रोड पर शाम की शॉपिंग, माँ नैना देवी के दर्शन और टिफिन टॉप जैसे पॉइंट पर ट्रेकिंग सबसे खास हैं।

काम के टिप्स: बारिश में वॉटरप्रूफ बैग और ग्रिप वाले जूते ज़रूर रखें। झील के किनारे सुबह जल्दी जाएँ, भीड़ कम मिलेगी। अपनी पानी की बोतल साथ रखें और पहाड़ों में प्लास्टिक कचरा बिल्कुल न फैलाएँ!

Nainital की यादें और दिल की बात

मुझे याद है, जब हम सातताल से नैनीताल की तरफ बढ़ रहे थे, तो रास्ते में एक छोटा सा झरना दिखा। बारिश की वजह से पानी बड़े वेग से गिर रहा था। हमने गाड़ी रुकवाई और कुछ देर वहीं ठहर गए। पानी की खिलखिलाती आवाज़, ठंडी हवा और चारों तरफ फैली हरी-भरी पहाड़ियाँ… लगा जैसे प्रकृति खुद हमसे बातें कर रही हो। रश्मि ने फोन निकालकर वीडियो बनाया और बोली, यह पल हमेशा याद रहेगा! सच में यार, यही छोटी-छोटी यादें तो ज़िंदगी को खूबसूरत बनाती हैं।

रश्मि के साथ यह यात्रा इसलिए भी खास थी क्योंकि हम दोनों लंबे समय बाद मिले थे। पहाड़ों के बीच पुरानी यादें ताज़ा हुईं, ढेरों हँसी-मज़ाक हुए और कई बार बस चुपचाप बैठकर नज़ारों को निहारते रहे। एक शाम झील के किनारे बैठे-बैठे रश्मि ने कहा, अमित, ज़िंदगी में ऐसे सुकून भरे पल कम ही मिलते हैं। शहर की भागदौड़ में हम इतना उलझ जाते हैं कि प्रकृति के करीब आने का वक्त ही नहीं मिलता। नैनीताल ने जैसे दिल का सारा बोझ हल्का कर दिया। जंजगीर लौटकर जब दोस्तो को तस्वीरें दिखाईं, तो चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी।

जब भी नैनीताल जाएँ, लोकल लोगों से बातचीत जरूर करें। वे बहुत सीधे और मददगार होते हैं। हमारी टैक्सी वाले भाई और चाय की टपरी वालों से हुई बातें इस ट्रिप की बेहतरीन यादों में शामिल हो गईं!

अंत में इतना ही…

नैनीताल सिर्फ एक हिल स्टेशन नहीं है, यह एक खूबसूरत एहसास है। झील का शांत पानी, पहाड़ों की ठंडी हवा, मंदिर की घंटियाँ और दोस्त के साथ बिताए हसीन पल सब मिलकर एक कभी न भूलने वाली याद बन जाते हैं।

इस यात्रा का एक मज़ेदार किस्सा तो मैं बताना ही भूल गया! नैनीताल में बंदर बहुत हैं, और एक जगह तो रश्मि का बैग एक बंदर लगभग छीन ही चुका था! हम दोनों उस वक्त बहुत हँसे। ऐसे ही छोटे-छोटे किस्से किसी भी ट्रिप को यादगार बना देते हैं।

घर लौटकर मैंने तय किया है कि अगली बार पूरे परिवार को लेकर आऊँगा बच्चों को बोटिंग करानी है और पत्नी को मॉल रोड पर शॉपिंग! रश्मि भी कह रही थी कि अगली बार लंबी छुट्टी लेकर पास के मुक्तेश्वर और रानीखेत भी एक्सप्लोर करेंगे।

अगर आप भी ज़िंदगी की भागदौड़ से थक चुके हैं, तो Nainital Travel Guide देखकर तुरंत प्लान बना लीजिए। अधिक आधिकारिक जानकारी के लिए आप Nainital Official Website या Uttarakhand Tourism और Incredible India की साइट्स चेक कर सकते हैं।

चलते-चलते…

यार, अंत में बस इतना ही कहूँगा कि नैनीताल जाना सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि प्रकृति के बीच खुद से मिलना है। पहाड़ों की खामोशी और बारिश की बूँदों में एक अलग ही जादू है, जो दिल का सारा बोझ हल्का कर देता है।

अगर आपने अभी तक नैनीताल नहीं देखा, तो इस साल प्लान ज़रूर बनाइए। अपने ट्रिप में Naini Lake, Naina Devi Temple, Snow View, Bhimtal और Sattal को ज़रूर शामिल करें।

अब मैं अपनी चाय की चुस्की के साथ इस ब्लॉग पोस्ट को यहीं खत्म करता हूँ। उम्मीद है आपको हमारी यह कहानी पसंद आई होगी। अगर आप नैनीताल जा चुके हैं, तो कमेंट में अपने अनुभव ज़रूर शेयर करें!

‘खूबसूरत भारत’ के साथ जुड़े रहिए और घूमते रहिए।

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