Sattal Lake Uttarakhand: सत्तल घूमने से पहले जानिए इन 7 झीलों की पौराणिक कहानी और पूरा ट्रैवल प्लान

Sattal Lake Travel Guide: नैनीताल से दूर 7 झीलों का यह शांत कोना क्यों है इतना खास?

अगर आप भी भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा ब्रेक लेकर कुदरत की गोद में सुकून के दो पल बिताना चाहते हैं, तो दोस्तों, आज की यह पोस्ट आपके लिए ही है! उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में बसा Sattal Lake एक ऐसी जगह है, जहाँ की सात कुदरती झीलों का संगम, देवदार के लंबे-लंबे पेड़ और पक्षियों की मीठी चहचहाहट पहली ही नजर में दिल जीत लेती है। नैनीताल की भीड़भाड़ से दूर यह शांत कोना किसी जन्नत से कम नहीं लगता। तो चलिए, बैग पैक कीजिए और मेरे साथ निकल पड़िए सत्तल के इस खूबसूरत सफर पर!

जब बारिश की बूंदों के बीच हम पहुँचे Sattal Lake

दोस्तों, सोचिए… बारिश की हल्की-हल्की बूंदें चेहरे को छू रही हों और हवा में मिट्टी और चीड़ के पेड़ों की वो सौंधी सी खुशबू घुली हो, जो सिर्फ पहाड़ों में ही मिलती है। सच कहूँ तो उस अहसास को शब्दों में बयां करना भी मुश्किल है!

अभी कुछ ही दिन पहले की बात है। मैं और मेरी पुरानी दोस्त रश्मि भोवाली में रुके हुए थे। कैंची धाम में बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन कर चुके थे, भोवाली के शांत रस्तों पर टहल लिया था और भीमताल का मनमोहक नज़ारा भी देख चुके थे। तभी चाय का कुल्हड़ हाथ में थामे रश्मि बोली, “यार अमित, जब यहाँ तक आ ही गए हैं, तो आसपास की सारी झीलें क्यों न देख ली जाएँ?”

बस फिर क्या था! हमने अपनी गाड़ी उठाई और निकल पड़े। थोड़ी ही देर की खूबसूरत ड्राइव के बाद हम जहाँ पहुँचे, उसने हमारी सारी थकान पल भर में मिटा दी हम खड़े थे Sattal Lake के सामने!

हेलो दोस्तों! मैं हूँ आपका दोस्त अमित और स्वागत है आपका हमारे प्यारे ब्लॉग Khubsurat Bharat पर।

आज की इस पोस्ट में मैं आपको सत्तल के बारे में कोई किताबी ज्ञान या गूगल वाली भारी-भरकम बातें नहीं बताने वाला। आज तो बस ऐसे बात करेंगे जैसे हम और आप सत्तल की किसी झील किनारे बैठकर कटिंग चाय पी रहे हों। सत्तल क्यों खास है, यहाँ क्या-क्या देखने लायक है, कैसे पहुँचना है और यहाँ आकर आपको कैसा महसूस होगा एक-एक चीज़ बिल्कुल अपने अंदाज़ में बताऊँगा।

तो चलिए, देर किस बात की? अपनी चाय की चुस्की लीजिए और मेरे साथ सफर पर निकल पड़िए!

Sattal Lake क्या है और क्यों खास है?

दोस्तों, सत्तल कोई एक अकेली झील नहीं है। जैसा कि नाम से ही ज़ाहिर होता है सत्तल यानी ‘सात ताल’। यहाँ घने ओक और पाइन यानी चीड़ के जंगलों के बीच सात छोटी-बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक झीलें एक-दूसरे से आपस में जुड़ी हुई हैं। उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले की मेहरागांव घाटी में, समुद्र तल से करीब 1370 मीटर की ऊँचाई पर बसा यह कोना लोअर हिमालयन रेंज का एक अनमोल नगीना है।

अगर दूरी की बात करें तो नैनीताल से यह महज़ 23 किलोमीटर और भीमताल से तो बस 3 से 5 किलोमीटर दूर है। दिल्ली से अगर आप अपनी गाड़ी से आ रहे हैं, तो लगभग 310 से 320 किलोमीटर का सुहाना सफर तय करके यहाँ पहुँच सकते हैं।

जब मैं और रश्मि वहाँ पहुँचे, तो हमारी पहली नज़र उस घने हरे-भरे जंगल और उसके बीच फैले शांत, पारदर्शी पानी पर पड़ी। रश्मि ने चारों तरफ देखते हुए कहा, अमित, ये जगह नैनीताल और भीमताल से कितनी अलग है न!”

Sattal Lake

और सच कहूँ दोस्तों, वो बिल्कुल सही कह रही थी। यहाँ नैनीताल जैसी व्यावसायिक भीड़भाड़ नहीं थी, न गाड़ियों का शोर था और न ही कोई आपाधापी। यहाँ बस कुदरत की अपनी एक सुरीली धुन थी पक्षियों की चहचहाहट, चीड़ के पत्तों से टकराती हवा की सरसराहट और पानी में उठती हल्की-हल्की लहरें।

इतिहास के झरोखे से देखें तो ब्रिटिश काल में यहाँ चाय के बागान हुआ करते थे। लेकिन आज भी यह जगह काफ़ी हद तक अपनी मूल खूबसूरती को सहेजे हुए, अनछुई सी लगती है।

अगर आप शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति के करीब सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो दोस्तों, Sattal Lake Uttarakhand आपके लिए एक एकदम परफेक्ट डेस्टिनेशन है!

Sattal की सात झीलें और उनकी पौराणिक कहानी

दोस्तों, सत्तल का असली जादू छिपा है इसकी इन सात झीलों की ख़ासियत और उनके पीछे छिपी पौराणिक लोककथाओं में। यहाँ जो मुख्य सात झीलें हैं, उनके नाम हैं नल दमयंती ताल, पन्ना ताल या गरुड़ ताल, राम ताल, लक्ष्मण ताल, सीता ताल, पूर्ण ताल और सूखा ताल। कुछ स्थानीय लोग हनुमान ताल को भी इस समूह में गिनते हैं।

इन झीलों के नाम यूँ ही नहीं रखे गए। स्थानीय लोककथाओं की मानें तो महाभारत काल के प्रतापी राजा नल और उनकी पत्नी दमयंती का संबंध इसी जगह से रहा है। एक और बेहद सुंदर मान्यता यह भी है कि अपने वनवास के दौरान भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने यहाँ कुछ समय बिताया था। पौराणिक कथाएँ सच हों या जनश्रुतियाँ, लेकिन एक बात तय है जब आप यहाँ पहुँचते हैं, तो हवा में एक अजीब सा सुकून और पवित्रता महसूस होती है।

हम सबसे पहले पहुँचे नल दमयंती ताल। यार, वहाँ का पानी इतना साफ़ और पारदर्शी था कि नीचे तैरती छोटी-छोटी मछलियाँ और पत्थर साफ़ नज़र आ रहे थे। वहाँ से थोड़ा और आगे बढ़े तो आया पन्ना ताल या गरुड़ ताल।

लेकिन असली सरप्राइज तो जंगल के थोड़ा और अंदर जाकर मिला राम, लक्ष्मण और सीता ताल का क्लस्टर! एक ख़ास पॉइंट पर खड़े होकर जब हमने देखा, तो तीनों झीलें एक साथ नज़र आ रही थीं। सच कहूँ, वो नज़ारा देखकर मन एकदम खुश हो गया!

रश्मि ने तुरंत फोन निकाला और तस्वीरें लेने लगी, पर दो-चार फोटो खींचने के बाद फोन नीचे करके बोली, “अमित, कैमरे की स्क्रीन में वो फील ही नहीं आ रही जो अपनी आँखों से देखकर मिल रही है।” और उसकी यह बात शत-प्रतिशत सच थी कुदरत के इस नज़ारे को सिर्फ दिल में महसूस किया जा सकता है, किसी लेंस में कैद नहीं।

इनमें से सूखा ताल का पानी मौसम के हिसाब से कभी-कभी कम हो जाता है या सूख जाता है, लेकिन बाकी झीलों में साल भर लबालब पानी रहता है। सबसे अच्छी बात यह है कि ये झीलें आपस में जुड़ी हुई हैं, तो आप आराम से बोटिंग करते हुए एक साथ कई झीलों की खूबसूरती को करीब से निहार सकते हैं।

Sattal Lake: बर्ड वॉचिंग और प्रकृति का असली स्वर्ग

दोस्तों, सत्तल सिर्फ झीलों के लिए ही नहीं जाना जाता, इसकी सबसे बड़ी खासियत है बर्ड वॉचिंग। अगर आप नेचर लवर हैं या फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो यह जगह आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। यहाँ देशी और प्रवासी मिलाकर पक्षियों की 500 से भी ज़्यादा प्रजातियाँ पाई जाती हैं!

Sattal Lake Travel

रेड-बिल ब्लू मैगपाई, हिमालयन ग्रिफॉन, वर्डिटर फ्लाईकैचर, क्रेस्टेड किंगफिशर, प्लम-हेडेड पैराकीट, ग्रेट बार्बेट और व्हाइट-क्रेस्टेड लाफिंगथ्रश जैसे नायाब पक्षी यहाँ आम देखने को मिल जाते हैं।

सुबह-सुबह जब हम जंगल के पगडंडियों पर निकले, तो पूरा जंगल पक्षियों की मीठी चहचहाहट से गूंज रहा था। हमने एक लोकल गाइड को साथ ले लिया था, जो बहुत प्यार से बता रहा था कि किस पेड़ की डाल पर कौन सा पक्षी आशियाना बनाए बैठा है। रश्मि तो रंग-बिरंगी चिड़ियों को देखकर किसी छोटी बच्ची की तरह चहक रही थी! मैं भी गले में कैमरा लटकाए घूम रहा था, लेकिन सच बताऊँ तो फोटो खींचने से ज़्यादा मन उन पक्षियों को सिर्फ़ एकटक निहारने का कर रहा था।

सत्तल में एक और बहुत ख़ास जगह है जोन्स एस्टेट में बना बटरफ्लाई म्यूजियम। इसे फ्रेड्रिक स्मीटाचेक जी ने बनाया था, जिन्हें लोग प्यार से ‘बटरफ्लाई मैन’ कहते थे। इस म्यूजियम में तितलियों की 2500 से ज़्यादा प्रजातियाँ और लगभग 1100 तरह के दुर्लभ कीड़े-मकोड़े सहेज कर रखे गए हैं।

हम थोड़ी देर वहाँ भी रुके। म्यूजियम में चारों तरफ तितलियों का संसार देखकर रश्मि बोल उठी, यार अमित, इतनी सारी रंग-बिरंगी तितलियाँ एक साथ देखकर लग रहा है जैसे हम किसी जादुई दुनिया में आ गए हों!

यहाँ के घने जंगलों में कभी-कभी हिरण, लोमड़ी और किस्मत अच्छी हो तो पीला गला वाला मार्टिन भी झलक दिखा जाते हैं। लेकिन सच कहूँ, तो सत्तल का असली जादू यहाँ की शांत झीलें, घने पेड़ और हवा में गूंजती परिंदों की आवाज़ ही है!

Sattal Lake में क्या-क्या कर सकते हैं?

दोस्तों, सत्तल सिर्फ देखने की जगह नहीं है, यहाँ आकर आप कुदरत के बीच ऐसी कई एक्टिविटीज का मज़ा ले सकते हैं जो आपकी ट्रिप को यादगार बना देंगी:

1. बोटिंग और कयाकिंग 

सत्तल की झीलों का पानी इतना शांत और स्थिर है कि यहाँ बोटिंग करने का मज़ा ही अलग है। यहाँ पैडल बोट, रोइंग बोट और कयाकिंग के अलग-अलग ऑप्शन और रेट्स जैसे हाफ राइड, फुल राइड मिल जाते हैं। हमने भी एक छोटी सी बोट ली। हमारे नाविक भैया बहुत मिलनसार थे। वो हमें बताते जा रहे थे कि बरसात में झीलों का वाटर लेवल कैसे बढ़ जाता है और सर्दियों में पानी शीशे जैसा साफ़ दिखता है।

बीच झील में रश्मि ने अचानक मज़ाक में कहा, “अमित, अगर गलती से नाव पलट गई तो क्या करेंगे? मैंने हँसते हुए जवाब दिया, यार, तैरना तो हम दोनों को आता है, लेकिन फिलहाल शांति से लाइफ जैकेट पहन लो!” और यह सुनकर हम दोनों ज़ोर से हँस पड़े।

2. नेचर वॉक और सुभाष धारा 

सत्तल के झीलों के चारों तरफ़ घने जंगलों के बीच छोटे-छोटे बेहद ख़ूबसूरत ट्रैल्स बने हुए हैं। यहीं पास में सुभाष धारा नाम का एक प्राकृतिक मीठे पानी का झरना है। झरने का पानी इतना ठंडा और साफ़ था कि हमने सीधा चुल्लू में भरकर पिया। पानी पीते ही रश्मि बोली, “शहर का मिनरल वाटर पीने के बाद यह पानी तो एकदम अमृत जैसा लग रहा है!” और सच कहूँ दोस्तों, पहाड़ों के प्राकृतिक झरने के पानी का स्वाद ही अलग होता है।

3. कैम्पिंग और नाईट स्टे 

अगर आप एडवेंचर और तारों भरे आसमान के शौकीन हैं, तो यहाँ कैम्पिंग का ऑप्शन भी मौजूद है। कई लोकल वेंडर्स झीलों के किनारे टेंट लगाते हैं, जहाँ रात में बोनफायर (धूनी) और गिटार की धुन के साथ रुकने का अलग ही मज़ा है। चूँकि हमारा कमरा भोवाली में पहले से बुक था, इसलिए हम उस रात रुक नहीं पाए, लेकिन मैंने मन ही मन तय कर लिया कि अगली बार सत्तल आऊँगा तो कैम्पिंग ज़रूर करूँगा!

4. फोटोग्राफी, ट्रेकिंग और फिशिंग

  • फोटोग्राफी: यह जगह फोटोग्राफर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। सुबह-सुबह जब झील के ऊपर हल्की-हल्की धुंध तैरती है और शाम को जब ढलते सूरज की सुनहरी किरणें पानी पर पड़ती हैं दोनों ही नज़ारे देखने लायक होते हैं।
  • ट्रेकिंग: यहाँ आसपास की पहाड़ियों पर छोटे-छोटे लाइट ट्रैकिंग रूट्स हैं, जो हाइकिंग के शौकीनों के लिए एकदम बढ़िया हैं।
  • फिशिंग (Angling): अगर आपको मछली पकड़ने का शौक है, तो स्थानीय प्रशासन/फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से परमिशन लेकर आप एंगलिंग का मज़ा भी ले सकते हैं।

अगर आप नैनीताल की भीड़भाड़ से दूर और भीमताल से भी ज़्यादा शांत माहौल चाहते हैं, तो सत्तल आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट जगह है!

Sattal Lake जाने का सबसे अच्छा समय

दोस्तों, अगर आप सत्तल घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो वैसे तो यहाँ साल भर मौसम सुहाना रहता है, लेकिन सबसे बेहतरीन समय मार्च से मई और अक्टूबर से जनवरी का माना जाता है:

  • मार्च से मई (वसंत और शुरुआत की गर्मियों का मौसम): इस समय मौसम एकदम सुहावना होता है, चारों तरफ़ नए फूल खिलते हैं और जंगल में चिड़ियों की चहचहाहट सबसे ज़्यादा सुनाई देती है। बर्ड वॉचिंग और घूमने के लिए यह सबसे बढ़िया समय है।
  • अक्टूबर से जनवरी (सर्दियों का मौसम): सर्दियों में यहाँ थोड़ी कड़ाके की ठंड ज़रूर पड़ती है, लेकिन आसमान एकदम साफ़ रहता है। सबसे ख़ास बात यह है कि इस मौसम में दूर-दराज़ के देशों से माइग्रेटरी बर्ड्स यहाँ आते हैं, जिन्हें देखना अपने आप में एक अलग अनुभव है।
  • मानसून (जुलाई से सितंबर): बारिश के दिनों में यहाँ की हरियाली देखने लायक होती है, पहाड़ एकदम धुल कर निखर जाते हैं। हालाँकि, इस दौरान रास्तों पर थोड़ी फिसलन हो सकती है और जंगलों में जोक (leeches) का डर रहता है, इसलिए थोड़ा सावधानी से निकलना पड़ता है।

वैसे, हम जब गए थे तो हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। वो पानी की नन्हीं बूंदें जब झील की सतह पर गिर रही थीं, तो झील पर छोटी-छोटी तरंगें बन रही थीं पूरा माहौल ही एक अलग रोमानियत और शांति बयां कर रहा था।

रश्मि ने झील के पानी को निहारते हुए कहा, “अमित, बारिश की इस फुहार में यह जगह और भी ज़्यादा ख़ूबसूरत लग रही है।” और सच में यार, उस हल्की सी बारिश ने सत्तल के हुस्न में चार चाँद लगा दिए थे!

Sattal Lake कैसे पहुँचें?

यार, Sattal Lake पहुँचना बहुत ही आसान है। आप अपनी सुविधा के हिसाब से ट्रेन, फ़्लाइट या रोड ट्रिप किसी भी ज़रिए से यहाँ आ सकते हैं:

  • ट्रेन से (By Train): सत्तल का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो यहाँ से लगभग 32 किलोमीटर दूर है। दिल्ली और देश के कई प्रमुख शहरों से काठगोदाम के लिए सीधी ट्रेनें चलती हैं। स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको सत्तल के लिए डायरेक्ट टैक्सी या शेयरिंग कैब आराम से मिल जाएगी। सुबह ट्रेन से उतरकर आप दोपहर तक आसानी से सत्तल पहुँच सकते हैं।
  • सड़क मार्ग से (By Road/Road Trip): अगर आपको ड्राइविंग का शौक है, तो दिल्ली से सत्तल की दूरी लगभग 310 से 320 किलोमीटर है। आप हापुड़, मुरादाबाद, हल्द्वानी और भीमताल होते हुए यहाँ पहुँच सकते हैं। रास्ते भर रुक-रुककर कुल्हड़ वाली चाय पीना, ढाबों पर खाना और पहाड़ों के नज़ारे देखना रोड ट्रिप का मज़ा ही अलग है!
  • हवाई जहाज़ से (By Air): सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट पंतनगर है, जो सत्तल से करीब 60 से 65 किलोमीटर की दूरी पर है। वहाँ से आप टैक्सी लेकर लगभग 2 घंटे में यहाँ पहुँच सकते हैं।

वैसे हम तो भोवाली में ठहरे हुए थे, इसलिए भोवाली से Sattal Lake पहुँचना हमारे लिए महज़ कुछ मिनटों का सुहाना सफर था। घुमावदार सड़कें, रास्तों के किनारे बनी छोटी-छोटी ढकी हुई दुकानें और दूर तक फैले हरे-भरे गाँव… सच कहूँ दोस्तों, वो पूरा रास्ता ही इतना खूबसूरत था कि दिल खुश हो गया!

हमारी दोस्ती का वो खूबसूरत पल

रश्मि और मेरी दोस्ती कोई आज-कल की नहीं है, कॉलेज के ज़माने से है। हम दोनों में एक बात कॉमन है सफ़र का जुनून! फ़र्क सिर्फ इतना है कि रश्मि थोड़ी ज़्यादा एडवेंचरस और बिंदास है, जबकि मैं हर चीज़ की प्लानिंग करने वाला बंदा हूँ।

Sattal Lake Uttarakhand

इस ट्रिप में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कैंची धाम के दर्शन करने के बाद जब उसने झीलों की तरफ़ चलने की ज़िद की, तो मैं शुरुआत में थोड़ा हिचकिचाया। मैंने कहा, “यार अभी थोड़ी थकान लग रही है, बाकी झीलें कल देख लेंगे।” लेकिन वो कहाँ मानने वाली थी! तुरंत बोली, “अमित, मौका हाथ से मत जाने दो। हल्की बारिश हो रही है, ऐसा माहौल दोबारा नहीं मिलेगा!” और सच कहूँ दोस्तों, वो बिल्कुल सही कह रही थी। अगर उस दिन मैंने उसकी बात न मानी होती, तो सत्तल का यह जादू मुझसे छूट जाता।

सत्तल की झील किनारे खड़े होकर जब आप चारों तरफ़ नज़र घुमाते हैं, तो ऐसा लगता है मानो वक़्त थम सा गया हो। शहर की भागदौड़, ऑफिस का तनाव और फोन की लगातार बजती नोटिफिकेशन्स, सब कुछ कहीं पीछे छूट जाता है। बस आप होते हैं और सामने बिखरी कुदरत।

सफ़र के दौरान एक पल ऐसा भी आया जब हम दोनों झील किनारे लकड़ी के एक बेंच पर चुपचाप बैठ गए। हमारे बीच कोई बात नहीं हो रही थी… चारों तरफ़ बस परिंदों की मीठी चहचहाहट और पानी में उठती हल्की लहरों की आवाज़ थी। रश्मि ने झील को एकटक निहारते हुए धीरे से कहा, अमित, ज़िंदगी में यही सुकून तो चाहिए था।” मैंने बिना कुछ बोले मुस्कुराकर सिर हिला दिया। सच में दोस्तों, ज़िंदगी में कभी-कभी ऐसे खामोश पल भी हमेशा-हमेशा के लिए दिल में छप जाते हैं।

अच्छा, एक बड़ा मज़ेदार किस्सा याद आ गया! जब हम बोटिंग कर रहे थे, तो एक सुंदर सी रंग-बिरंगी चिड़िया हमारी नाव के बिल्कुल पास आकर बैठ गई। रश्मि ने बड़ी चालाकी से धीरे-धीरे फोन निकाला ताकि उसकी फोटो खींच सके, पर चिड़िया बेचारी फुर्र से उड़ गई। रश्मि मुँह बनाकर हँसते हुए बोली, देखा अमित, पहाड़ों के पक्षी भी हम शहरी लोगों से दूर ही भागते हैं! मैंने भी चुटकी लेते हुए कहा, “यार, शायद उन्हें भी हमारी तरह अपनी पर्सनल स्पेस चाहिए! और यह सुनकर हम दोनों खिलखिलाकर हँस पड़े।

शाम को जब हम वापस भोवाली लौट रहे थे, तब तक बारिश पूरी तरह थम चुकी थी और धुंध छटने से आसमान एकदम साफ़ हो गया था। रश्मि ने गाड़ी की खिड़की से बाहर देखते हुए कहा, “अगली बार जब आएँगे, तो यहाँ ज़्यादा दिन रुकेंगे।” मैंने भी पूरे दिल से हामी भरी। सच बताऊँ दोस्तों, Sattal Lake ने हम दोनों के दिल में एक बहुत ख़ास जगह बना ली थी!

सत्तल के आसपास घूमने लायक खूबसूरत जगहें

भाई, अगर आप Sattal आ रहे हैं, तो यहाँ का पूरा ‘लेक सर्किट’ आराम से कवर कर सकते हैं:

  • भीमताल और नौकुचियाताल : भीमताल तो सत्तल से बस 3 से 5 किलोमीटर दूर है, जहाँ की झील के बीच में बना एक्वेरियम आइलैंड बहुत फेमस है। वहीं नौ नौकों वाली नौकुचियाताल झील भी यहाँ से बहुत नज़दीक है।
  • नैनीताल और कैंची धाम : नैनीताल यहाँ से महज़ 23 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा नीम करौली बाबा का सुप्रसिद्ध कैंची धाम और भोवाली भी पास में ही पड़ते हैं।

सच कहूँ तो अगर आप कुमाऊँ की झीलों का चक्कर (Lake Tour) लगाना चाहते हैं, तो भीमताल, सत्तल, नौकुचियाताल और नैनीताल इन चारों को एक साथ आसानी से एक्सप्लोर कर सकते हैं। लेकिन हाँ, इन सबमें सत्तल का माहौल सबसे ज़्यादा ऑथेंटिक, शांत और कुदरत के करीब महसूस होता है!

सत्तल में रहने और खाने का इंतज़ाम

दोस्तों, Sattal Lake में रुकने और खाने के लिए बहुत ही सिंपल और सुकून भरे ऑप्शंस मिल जाते हैं:

  • रहने का इंतज़ाम (Where to Stay): यहाँ झीलों के पास ख़ूबसूरत होमस्टे और इको-लॉजेस मौजूद हैं, जहाँ आपको बिल्कुल घर जैसा माहौल मिलेगा। अगर बजट फ्रेंडली ऑप्शन चाहिए, तो सरकारी KMVN (कुमाऊँ मण्डल विकास निगम) का टूरिस्ट रेस्ट हाउस एकदम बेस्ट है। इसके अलावा, एडवेंचर के शौकीनों के लिए झीलों के किनारे कैम्पिंग के बेहतरीन ऑप्शंस भी उपलब्ध हैं।
  • खाने-पीने की सुविधा : खाने के लिए यहाँ झीलों के आसपास छोटी-छोटी दुकानें और लोकल ढाबे हैं, जहाँ गरमा-गरम दाल, चावल, ताज़ा सब्ज़ी और पहाड़ी स्टाइल की कड़क चाय मिलती है।

हम जब वहाँ थे, तो हमने भी झील किनारे एक छोटी सी दुकान पर खाना खाया। दुकान के मालिक भैया बड़े ही मिलनसार और सीधे-सादे इंसान थे। बातों-बातों में उन्होंने मुस्कुराते हुए एक बहुत ख़ास बात कही अमित भाई, पर्यटक यहाँ आते हैं तो हमें बहुत ख़ुशी होती है, बस आप लोगों से एक ही गुज़ारिश है कि हमारी इस सुंदर जगह को गंदा मत करना।”

उनकी यह बात सीधे दिल को छू गई। सच कहूँ दोस्तों, प्रकृति की इस ख़ूबसूरती को बनाए रखना हम सभी की ज़िम्मेदारी है!

सत्तल की यात्रा के लिए कुछ ज़रूरी टिप्स

दोस्तों, अगर आप Sattal Lake का पूरा मज़ा बिना किसी परेशानी के लेना चाहते हैं, तो मेरी और रश्मि की तरफ़ से ये कुछ छोटी-छोटी लेकिन काम की बातें ज़रूर ध्यान में रखिएगा:

  1. आरामदायक जूते और वॉटर बॉटल: जंगल के ट्रैल्स पर चलने और नेचर वॉक के लिए अच्छी ग्रिप वाले वॉकिंग शूज ही पहनें। अपने साथ पानी की एक री-यूजेबल बोतल ज़रूर रखें।
  2. सेफ़्टी और साफ़-सफ़ाई: बोटिंग करते समय आलस न करें और लाइफ जैकेट ज़रूर पहनें। और हाँ, जैसा कि उस लोकल दुकानदार भैया ने कहा था यहाँ-वहाँ प्लास्टिक या कचरा बिल्कुल न फैलाएँ। प्रकृति को साफ़ रखने में सहयोग करें।
  3. बर्ड वॉचिंग के शौकीनों के लिए: अगर आप परिंदों की दुनिया को करीब से देखना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी उठकर निकलें। अपने साथ एक बढ़िया बाइनोकुलर ज़रूर लाएँ और किसी लोकल गाइड को साथ ले लें वे आपको सही जगह पर सही समय पर ले जाएँगे।
  4. मौसम के हिसाब से तैयारी: अगर मानसून में आ रहे हैं तो रेनकोट, छाता और ग्रिप वाले जूते साथ रखें। वहीं सर्दियों में सुबह-शाम अच्छी-खासी ठंड पड़ती है, इसलिए भारी गर्म कपड़े पैक करना न भूलें।
  5. सबसे ज़रूरी टिप: फोन कैमरे को थोड़ा साइड में रखकर कुछ पल शांत बैठकर इस खूबसूरत जगह को अपनी आँखों और दिल में महसूस कीजिए। सच मानिए, यह सुकून स्क्रीन पर नहीं मिलेगा!

Sattal Lake क्यों याद रहता है?

दोस्तों, Sattal Lake सिर्फ देखने लायक झीलों का एक समूह नहीं है, यह तो एक खूबसूरत अहसास है शांति का, कुदरत के निस्वार्थ प्यार का और उन नन्हीं खुशियों का, जो शहर की आपाधापी में कहीं गुम हो जाती हैं।

वापस लौटते वक्त रश्मि ने मुझसे कहा था, “अमित, अब जब भी शहर में भागदौड़ और तनाव बढ़ेगा, तो मुझे सत्तल की यह शांति याद आएगी। और सच कहूँ दोस्तों, आज भी आँखें बंद करो तो वो घना हरा-भरा जंगल, झीलों का साफ़ पारदर्शी पानी और चेहरे को छूती वो ठंडी हवा दिल में ज़िंदा हो उठती है।

हमारे सफ़र का यह हिस्सा इतना ख़ास इसलिए बन गया क्योंकि इसके लिए कोई बहुत बड़ी प्लानिंग नहीं थी। कैंची धाम में दर्शन के बाद बस एक फ्लो-फ्लो में हम यहाँ आ गए। कभी-कभी ज़िंदगी के सबसे हसीन सफ़र वही होते हैं, जो बिना किसी तय प्लान के अचानक बन जाते हैं!

अगर आप भी उत्तराखंड के लेक डिस्ट्रिक्ट Nainital, Bhimtal का प्लान बना रहे हैं, तो Sattal Lake को अपनी लिस्ट में ज़रूर शामिल कीजिएगा। दिल्ली से रात की ओवरनाइट ट्रेन पकड़कर सुबह काठगोदाम उतरिए और वहाँ से सीधे सत्तल!

रश्मि अब भी जब कभी फोन करती है, तो अक्सर पूछती है यार अमित, सत्तल फिर कब चल रहे हैं?” मैं बस मुस्कुरा देता हूँ। क्योंकि सच यही है दोस्तों पहाड़ हमें बुलाते रहेंगे और हम यूँ ही उनके खींचे चले जाएँगे!

बाकी सरकारी जानकारी और सही रूट्स के लिए आप Uttarakhand Tourism की ऑफिशियल वेबसाइट या Wikipedia देख सकते हैं, लेकिन किताबें और वेबसाइट्स तो सिर्फ़ आंकड़े देती हैं… असली जादू और फील तो वहाँ जाकर ही मिलता है।

अंत में बस इतना ही कहूँगा पहाड़ सिर्फ घूमने की जगह नहीं होते, वो हमें जीना सिखाते हैं। वे सिखाते हैं कि ठहराव क्या होता है और अपनों के साथ बिताए छोटे-छोटे पल कितने कीमती होते हैं।

जाओ तो ज़िम्मेदारी से जाना, कुदरत का ख्याल रखना। सत्तल की ये सात झीलें आपका इंतज़ार कर रही हैं!

मैं अमित, आपके अपने ब्लॉग Khubsurat Bharat से। फिर मिलेंगे किसी नए मोड़ पर, एक नई कहानी के साथ!

Categories:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *